Thursday, July 9, 2026
नेशनल फ्रंटियर, आवाज राष्ट्रहित की
  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार
  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार
No Result
View All Result
नेशनल फ्रंटियर
Home राष्ट्रीय

चार दुर्लभ बीमारियों की सस्ती हुईं दवाएं, भारत में कम कीमतों में मिलेंगी

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
25/11/23
in राष्ट्रीय
चार दुर्लभ बीमारियों की सस्ती हुईं दवाएं, भारत में कम कीमतों में मिलेंगी
Share on FacebookShare on WhatsappShare on Twitter

नई दिल्ली: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने शुक्रवार को कहा कि चार दुर्लभ बीमारियों की दवाएं काफी सस्ती दरों पर उपलब्ध हो गई हैं, क्योंकि भारतीय दवा कंपनियां अब महंगे आयातित ‘फॉर्मूलेशन’ पर निर्भरता कम करके उनका उत्पादन कर रही हैं. कीमतों में कटौती तब हुई है, जब मंत्रालय ने ‘सिकल सेल एनीमिया’ के साथ-साथ 13 दुर्लभ बीमारियों से संबंधित कार्रवाई को प्राथमिकता दी है.

स्वदेशी रूप से निर्मित

इनमें से चार बीमारियों- टायरोसिनेमिया टाइप 1, गौचर रोग, विल्सन रोग और ड्रेवेट-लेनोक्स गैस्टॉट सिंड्रोम के साथ-साथ सिकल सेल एनीमिया के लिए दवाओं को मंजूरी दे दी गई है और इन्हें स्वदेशी रूप से निर्मित किया जा रहा है. आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि तीन बीमारियों के लिए चार और दवाएं- फेनिलकेटोनुरिया के लिए गोली सैप्रोप्टेरिन, हाइपरअमोनेमिया के लिए गोली सोडियम फिनाइल ब्यूटायरेट और गोली कार्गलुमिक एसिड और गौचर रोग के लिए कैप्सूल मिग्लस्टैट अनुमोदन के लिए प्रक्रिया में हैं तथा अप्रैल 2024 तक इनके उपलब्ध होने की संभावना है.

दवा की कीमत के सौवें हिस्से तक

इन दवाओं के स्वदेशी रूप से निर्मित होने से, टायरोसिनेमिया टाइप 1 के उपचार में उपयोग किए जाने वाले निटिसिनोन कैप्सूल की वार्षिक लागत आयातित दवा की कीमत के सौवें हिस्से तक कम हो जाएगी. इस संबंध में एक सूत्र ने कहा, “उदाहरण के लिए, जहां आयातित कैप्सूल की वार्षिक लागत 2.2 करोड़ रुपये आती है, वहीं घरेलू स्तर पर निर्मित कैप्सूल अब सिर्फ 2.5 लाख रुपये में उपलब्ध होंगे.” सूत्र ने कहा कि इसी तरह जहां आयातित एलीग्लस्टैट कैप्सूल की लागत 1.8-3.6 करोड़ रुपये प्रति वर्ष आती है, वहीं घरेलू स्तर पर निर्मित कैप्सूल अब केवल 3-6 लाख रुपये प्रति वर्ष में उपलब्ध होंगे.

34 लाख रुपये तक आती है

विल्सन नामक बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाले आयातित ट्राइएंटाइन कैप्सूल की लागत प्रति वर्ष 2.2 करोड़ रुपये आती है, लेकिन दवा के स्वदेश में निर्मित होने से यह 2.2 लाख रुपये में उपलब्ध होगी. ड्रेवेट-लेनोक्स गैस्टॉट सिंड्रोम के उपचार में उपयोग किए जाने वाले आयातित कैनबिडिओल (मुंह के जरिए ली जाने वाली दवा) की लागत प्रति वर्ष सात लाख से 34 लाख रुपये तक आती है, लेकिन देश में उत्पादन होने के कारण यह प्रति वर्ष एक लाख से पांच लाख रुपये में उपलब्ध होगा. सिकल सेल एनीमिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाले हाइड्रोक्सीयूरिया सीरप की व्यावसायिक आपूर्ति मार्च 2024 तक शुरू होने की संभावना है और अस्थायी कीमत 405 रुपये प्रति बोतल होगी. विदेश में इसकी कीमत 70,000 रुपये प्रति 100 मिलीलीटर है.

About

नेशनल फ्रंटियर

नेशनल फ्रंटियर, राष्ट्रहित की आवाज उठाने वाली प्रमुख वेबसाइट है।

Follow us

  • About us
  • Contact Us
  • Privacy policy
  • Sitemap

© Copyright 2025 Uma Shankar Tiwari - All Rights Reserved .

  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार

© Copyright 2025 Uma Shankar Tiwari - All Rights Reserved .