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नारी शक्ति वंदन अधिनियम केंद्र सरकार का ‘युगांतरकारी’ कदम : मुख्यमंत्री धामी

फ्रंटियर डेस्क by फ्रंटियर डेस्क
16/04/26
in देहरादून
नारी शक्ति वंदन अधिनियम केंद्र सरकार का ‘युगांतरकारी’ कदम : मुख्यमंत्री धामी
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मुख्यमंत्री ने नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में किया प्रतिभाग

देहरादून। भारत सरकार, नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विशेष चर्चा किए जाने को लेकर 16 अप्रैल से विशेष सत्र आहूत करने जा रही है। उससे पहले देश भर में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर चर्चाएं जोरों- शोरों से चल रही है। इसी क्रम में उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की ओर से राजकीय दून मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें शामिल हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संसद की ओर से 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम, देश की मातृशक्ति के सम्मान, अधिकार और सशक्तिकरण की दिशा में उठाया गया एक युगांतकारी कदम है।

सीएम धामी ने कहा कि, इस अधिनियम के जरिए लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की शक्ति, साहस और समर्पण ही हमारे समाज और देश की प्रगति का आधार है। ये केवल संख्या बढ़ाने का प्रयास नहीं बल्कि नीति-निर्माण की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया एक क्रांतिकारी कदम है। पीएम मोदी ने अपनी दूरदर्शी सोच के साथ नारी शक्ति को लोकतंत्र के सर्वाेच्च मंचों तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त किया है।

देहरादून में आयोजित नारी शक्ति वंदन टाउन हॉल सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली बहनों को सम्मानित कर उनके योगदान को नमन किया।

आज हमारी मातृशक्ति गांव की चौपाल से लेकर संसद के पटल तक सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रही है, यह नए भारत की बदलती तस्वीर है। नारी शक्ति… pic.twitter.com/CdxbfXeR9x

— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) April 15, 2026

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि, शिव भी तभी समर्थ हैं, जब वे शक्ति से युक्त हों। शक्ति के बिना कोई भी सृजन या सामर्थ्य संभव नहीं हो सकता है। इसलिए नारी शक्ति के सामर्थ्य के बिना राष्ट्र और समाज की वास्तविक उन्नति की कल्पना असंभव है। आज की महिला खेत में अन्न उगाने वाली किसान भी है, तो स्टार्टअप खड़ा करने वाली एंटरप्रेन्योर (उद्यमी) भी है।

वो गांव की पंचायत में विकास की योजनाएं बनाने वाली जनप्रतिनिधि भी हैं, तो देश की संसद में नीति निर्धारण करने की क्षमता रखने वाली सशक्त नेतृत्वकर्ता भी हैं। आज तक हमारे देश की आधी आबादी को वो सम्मान नहीं मिल पाया है, जिसकी वो वास्तव में हकदार है। लेकिन अब देश में नारी शक्ति को सम्मान और अधिकार दिलाने की दिशा में एक नए युग का शुभारंभ हो चुका है।

उन्होंने आगे कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में शपथ लेने के बाद बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री जन-धन योजना, मातृत्व वंदना योजना, स्वच्छ भारत मिशन और लखपति दीदी योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं के जरिए मातृशक्ति का सम्मान करने का काम किया है।

प्रदेश सरकार भी मातृशक्ति के कल्याण के लिए काम कर रही है। इसी क्रम में राज्य में शिक्षा, रोजगार उद्यमिता के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया गया है। राज्य सरकार की ओर से उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया जा रहा है।

इसके साथ ही, सशक्त बहना उत्सव योजना और मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना के जरिए राज्य की मातृशक्ति को नए अवसर और शक्ति देने का काम भी किया है। राज्य सरकार मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के तहत महिला समूहों के निर्मित उत्पादों को एक ब्रांड के रूप में विकसित करने पर भी ध्यान दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि, 16 अप्रैल से संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विशेष सत्र प्रस्तावित है। कई दशकों से लंबित महिला आरक्षण का सपना अब साकार होने की ओर बढ़ रहा है।

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