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जेनेरिक दवाओं के नए नियम पर NMC और IMA आमने सामने, जानें क्या है मामला

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
15/08/23
in राष्ट्रीय, समाचार
जेनेरिक दवाओं के नए नियम पर NMC और IMA आमने सामने, जानें क्या है मामला
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नई दिल्ली : हाल ही में नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने एक नया नियम लागू किया है. इसके तहत डॉक्टरों को मरीजों के लिए जेनेरिक दवाएं लिखनी होगी. ऐसा न करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई करने का भी प्रावधान बनाया गया है. इस नियम के बाद से ही कई डॉक्टर एसोसिएशन इसका विरोध कर चुकी हैं. अब अब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन यानी आईएमए ने भी एनएमसी के इस नियम पर सवाल खड़े किए हैं. आईएमए ने अपने एक बयान में इस नियम को वापिस लेने की मांग की है. आईएमए ने कहा है कि भारत में बनने वाली दवाओं में 1 फीसदी से भी कम दवाओं की गुणवत्ता जांच की जाती है. ऐसे में ब्रांडेड दवा न लिखने से मरीजों को नुकसान हो सकता है.

आईएमए ने कहा है कि जब डॉक्टर ब्रांडेड दवा नहीं लिख सकते तो उनको इन दवाओं को बनाने का लाइसेंस क्यों दिया जाए.जेनेरिक दवाओं की क्वालिटी को लेकर आज भी अनिश्चितता है. इनकी गुणवत्ता मानकों के हिसाब से नहीं है. ऐसे में अगर दवा की गुणवत्ता मानकों के हिसाब से नहीं है तो इनको मरीजों को देना नुकसानदायक हो सकता है .आईएमए ने कहा है कि एनएमसी को इस तरह के नियमों का लागू नहीं करना चाहिए.

जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता पर देना होगा ध्यान

आईएमए के मुताबिक, अगर जेनेरिक दवाओं को बढ़ावा देना है तो इनकी गुणवत्ता पर भी ध्यान देना होगा. इसके लिए एक दवा, उसकी एक गुणवत्ता और एक ही मूल्य को सुनिश्चित करने की जरूरत है. इसको लागू करने के लिए एनएमसी को कदम उठाने होंगे. फिलहाल जो नया नियम बनाया गया है उसकी काफी खामियां हैं, जिनको दूर करने की जरूरत है.

क्या होती हैं जेनेरिक दवाएं

जेनेरिक दवाओं और ब्रांडेड दवाओं में एक ही तरह का सॉल्ट होता है, लेकिन इनकी बाजार में कीमत अलग-अलग होती है. जेनेरिक दवाएं सस्ती होती हैं, लेकिन ब्रांडेड दवा इनसे कई गुना महंगी होती है. अधिकतर लोगों को सिर्फ ब्रांडेड दवा की जानकारी होती है और जेनेरिक दवाओं के बारे में पता नहीं होता है.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि मेडिकल स्टोर पर जानें से पहले व्यक्ति को दवा के सॉल्ट की जानकारी होनी चाहिए. अगर उस सॉल्ट की जेनेरिक दवा किसी जेनेरिक मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध है तो उसे खरीदना चाहिए. इससे दवा पर खर्च होने वाला पैसा बचेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि कई जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 40 से 50 फीसदी तक सस्ती होती है. इनमें सॉल्ट में एक जैसा ही होता है. ऐसे में लोगों को जेनेरिक दवाओं को लेकर जागरूक होने की जरूरत है.

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