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सीएम ही नहीं बीजेपी के सामने सांसद से विधायक बने नेताओं की भी टेंशन, क्या होगी भूमिका?

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
08/12/23
in राज्य, समाचार
सीएम ही नहीं बीजेपी के सामने सांसद से विधायक बने नेताओं की भी टेंशन, क्या होगी भूमिका?
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नई दिल्ली: देश के पांच राज्यों में से तीन राज्यों में बीजेपी पूर्ण बहुमत के साथ जीत दर्ज करने में कामयाब रही . मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री का नाम तय करने के लिए बीजेपी ने अलग-अलग राज्यों को लिए पर्यवेक्षक तय कर दिए हैं. सीएम के नाम से सस्पेंस जल्द ही खत्म हो जाएगा, लेकिन बीजेपी की असल चुनौती सांसद से विधायक बने नेताओं की भूमिका तय करने की है. मुख्यमंत्री की रेस में अगर वो पिछड़ते हैं तो फिर कैबिनेट का हिस्सा होंगे या फिर विधायक पद से ही संतोष करना होगा?

मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने केंद्रीय मंत्री सहित कुल 21 सांसदों को चुनावी मैदान में उतारा था. बीजेपी के 21 सांसदों में 12 जीतने में कामयाब रहे जबकि 9 को हार मिली है. सांसद से विधायक बने सभी नेताओं ने अपनी-अपनी लोकसभा और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. संसदीय से इस्तीफा देने वाले नेताओं में तीन केंद्रीय मंत्री थे, जिन्होंने मोदी कैबिनेट से भी इस्तीफा दे दिया है. ऐसे में संसदीय और मोदी कैबिनेट छोड़ने वाले नेताओं का सियासी भविष्य क्या होगा?

एमपी में सांसद से विधायक बने नेता क्या भूमिका होगी?

मध्य प्रदेश में बीजेपी ने तीन केंद्रीय मंत्री सहित कुल 7 सांसदों को चुनावी मैदान में उतारा था और एक राष्ट्रीय महासचिव थे. फग्गन सिंह कुलस्ते, राकेश सिंह, उदय प्रताप सिंह, रीति पाठक, प्रह्रलाद सिंह पटेल, गणेश सिंह और नरेंद्र सिंह तोमर शामिल थे. इनमें गणेश और कुलस्ते चुनाव हार गए जबकि उदय प्रताप, रीति पाठक, प्रह्रलाद सिंह, नरेंद्र सिंह और राकेश चुनाव जीतने में सफल रहे. तोमर और प्रह्लाद पटेल केंद्र में मंत्री थे, जिन्होंने लोकसभा सदस्यता के साथ-साथ मंत्री पद छोड़ दिया है. इसके अलावा बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजवर्गीय भी विधायक बने हैं.

एमपी में बीजेपी के पांच सांसद इस बार विधायक बने हैं. इन दिग्गज नेताओं की वजह से बीजेपी को अन्य दूसरी सीटों पर भी सियासी फायदा मिला. बीजेपी की सत्ता में वापसी के बाद अब पार्टी को इन नेताओं के सियासी भविष्य का फैसला करना है. सांसद से विधायक बने कुछ नेता सीएम पद की दौड़ में भी है. ऐसे में मुख्यमंत्री पद की रेस में अगर पिछड़ते हैं तो फिर कैबिनेट में उनके लिए अहम रोल तय करना होगा. देखना होगा कि इन पांच सांसद में से किसे सत्ता की कमान मिलती है तो कौन नंबर दो की पॉजिशन और किसे स्पीकर की भूमिका में रखा जाता है?

राजस्थान में MP से MLA बने बीजेपी नेता का रोल क्या?

राजस्थान में बीजेपी ने सात सांसदों को विधानसभा का चुनाव लड़ाया था, जिनमें से चार जीतने में सफल रहे तो तीन को हार मिली है. बाबा बालकनाथ, किरोड़ीलाल मीणा, दीया कुमारी, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, भागीरथ चौधरी, नरेंद्र खीचड़ और देवजी पटेल चुनाव लड़े थे. चुनाव जीतने वालों में राज्यवर्धन, बाबा बालकनाथ, दीया कुमारी, राजवर्धन सिंह राठौर और किरोड़ीलाल है, जिन्होंने अपनी संसद सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है.

सांसद से विधायक बने चारो नेताओं को केंद्र की सियासत में रखने के बजाय राजस्थान की राजनीति में रखने का फैसला किया गया है, जिसके चलते ही उन्हें विधायक बनाए रखने का फैसला किया गया है. बालकनाथ, दीया कुमारी, किरोड़ीलाल मीणा, राजवर्धन सिंह राठौर. चारो ही नेता दिग्गज माने जाते हैं, जिसके चलते पार्टी को उनकी भूमिका को भी तय करना होगा. बीजेपी उन्हें सत्ता की कमान सौंपती है या फिर कैबिनेट का हिस्सा बनाकर सियासी बैलेंस बनाएगी.

छत्तीसगढ़ में सांसद से विधायक बने नेताओं को क्या मिलेगा?

छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने चार सांसदों को चुनावी मैदान में उतारा था. विजय बघेल, गोमती राय, रेणुका सिंह और अरुण साव को विधानसभा का चुनाव लड़वाया था. इनमें से गोमती राय, रेणुका सिंह और अरुण साव चुनाव जीतने में सफल रहे हैं जबकि विजय बघेल को हार मिली है. बीजेपी के टिकट पर जीते तीनों नेताओं ने अपनी संसदीय सदस्यता से इस्तीफा दे दया है. रेणुका सिंह केंद्र की मोदी सरकार में राज्यमंत्री थी.

मुख्यमंत्री पद की रेस में अरुण साव और रेणुका सिंह के नाम चल रहे हैं, लेकिन किसी एक नेता के नाम पर ही मुहर लगेगी. ऐसे में बीजेपी के जो तीन सांसद विधायक बने हैं, उसकी भूमिका का भी फैसला करना होगा, क्योंकि वे अपने-अपने इलाके और समुदाय के कद्दावर नेताओं में गिने जाते हैं. इस लिहाज से उनके रोल तय करने होंगे?

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