नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड (Electoral Bond) बेचने पर रोक लगा दी है. शीर्ष अदालत ने इसे पूरी तरह असंवैधानिक बताते हुए खरीद-बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया है. यह तो आपको पता ही होगा कि इस बॉन्ड के जरिये राजनीतिक पार्टियों को चंदा दिया जाता था, लेकिन क्या आपको पता है कि इसके जरिये चंदा देकर भी आम आदमी हजारों रुपये की बचत कर लेता है.
दरअसल, चुनावी बॉन्ड पॉलिटिकल पार्टियों के लिए तो फायदे का सौदा है ही आम आदमी को भी इससे फायदा मिलता था. चुनावी बॉन्ड के जरिये राजनीतिक दल आम लोगों से चंदा जुटाते हैं. यह बात को सभी को पता है कि बड़े-बड़े उद्यमी और कारोबारी तो राजनीतिक दलों को चंदा देते हैं, लेकिन आम आदमी अपनी पसंदीदा पार्टी को कैसे चंदा दे सकता है. इसी की व्यवस्था करने के लिए सरकार ने साल 2018 में चुनावी बॉन्ड की व्यवस्था की थी.
कैसे मिलता है आम आदमी को फायदा
आप यह तो समझ ही गए कि चुनावी बॉन्ड के जरिये अपनी पसंदीदा पार्टी को चंदा दे सकते हैं, लेकिन इस दान पर आपको भी टैक्स बचाने का मौका मिलता है. दरअसल, बॉन्ड जारी करने के साथ ही सरकार ने इनकम टैक्स एक्ट में भी इसे शामिल कर लिया था. इनकम टैक्स की धारा 80जीजीसी और 80जीजीबी के तहत चुनावी बॉन्ड की रकम पर आपको टैक्स छूट मिलती है. सबसे बड़ी बात ये है कि इस बॉन्ड में लगाई गई पूरी रकम पर आपको इनकम टैक्स की छूट मिल जाती है. मसलन, आपने 1 लाख रुपये का चुनावी बॉन्ड खरीदा तो रिटर्न भरते समय आप इस पूरी रकम पर टैक्स छूट क्लेम कर सकते हैं.
कंपनियों को भी मिलती है छूट
चुनावी बॉन्ड पर सिर्फ आम आदमी को ही छूट नहीं मिलती, बल्कि कंपनियों को भी इससे टैक्स बचाने का अवसर मिलता है. सरकार ने बॉन्ड जारी करने से पहले कंपनी एक्ट में भी बदलाव किया था. कंपनी एक्ट 2013 के सेक्शन 182 में बदलाव किया गया, जिसके तहत कोई भी कंपनी चुनावी बॉन्ड खरीदकर पसंदीदा कंपनी को चंदा दे सकती थी. उसका नाम भी पूरी तरह गुप्त रखा जाता था. यह बदलाव 2017 के बजट में ही कर दिया गया था.
कहां बिकते थे ये बॉन्ड
सरकार इस चुनावी बॉन्ड को जारी करती है और एसबीआई के जरिये देशभर में इसे बेचा जाता है. कोई भी व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह अथवा कंपनी एसबीआई की तय ब्रांच पर जाकर इसे खरीद सकते हैं. बॉन्ड खरीदने के एवज में बैंक की ओर से एक रसीद दी जाती है, जिसमें सारा विवरण होता है. जब आप इनकम टैक्स रिटर्न भरते हैं तो वह रसीद लगाकर दिए गए चंदे पर टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं.
