खेत में लगी धान की फसल में कौन-सी बीमारी है, अब यह कंप्यूटर बतायेगा। इसके लिए ट्रिपल आईटी ने एक सॉफ्टवेयर तैयार किया है। इससे फसल में लगी सही बीमारी की जानकारी के बाद सही इलाज भी हो सकेगा। इस सॉफ्टवेयर का पेटेंट करा लिया गया है। अभी तक खेतों में लगी धान की फसल में कोई बीमारी लगती है तो किसान उसे खुद ही पहचान कर या फसल को तोड़कर वैज्ञानिक के पास ले जाते हैं। तब पहचान कराकर दवा से उपचार करते हैं।
वैज्ञानिक तक फसल को ले जाने, बीमारी की पहचान और उसका इलाज करने तक कभी-कभी काफी समय बीत जाता है। तब तक फसल को काफी हद तक नुकसान पहुंच चुका होता है। इसी को देखते हुए ट्रिपल आईटी के शोधकर्ता रत्नेश दुबे ने इसे चुनौती के रूप में लिया और ट्रिपल आईटी के पूर्व निदेशक प्रो. अरविंद चौबे और सहायक प्राध्यापक डॉ. दिलीप कुमार चौबे के मार्गदर्शन में इस समस्या को दूर करने के लिए एक सॉफ्टवेयर तैयार किया गया।
बीमारी लगती है तो पत्तों पर भी पड़ता है असर
सॉफ्वेयर तैयार करने वाले शोधकर्ता ट्रिपल आईटी के पीएचडी के छात्र रत्नेश दुबे ने बताया कि जब खेत में धान की फसल को बीमारी लगती है तो उसके पत्ते पर भी असर दिखने लगता है। किसान ड्रोन की मदद से खेत की तस्वीर लेकर कंप्यूटर में अपलोड करेगा, जिसके बाद कंप्यूटर में पहले से पड़ा सॉफ्टवेयर फोटो की जांच कर बता देगा कि धान में कौन-सी बीमारी लगी है। बीमारी कितनी गहराई तक है और खेत के किन-किन क्षेत्रों में लगी है। इसमें मात्र कुछ मिनट का समय लगेगा। फिलहाल यह सॉफ्टवेयर तीन तरह की बीमारी बैक्टेरियल ब्लाईट, ब्लास्ट और टंग्रो की पहचान कर सकेगा।
रिपोर्ट के आधार पर करा सकेंगे इलाज
किसान को जब फसल में किसी तरह की बीमारी का अहसास हो तो वह इस प्रक्रिया को अपनाकर कंप्यूटर द्वारा बीमारी की पहचान करने के बाद उसका उपचार शुरू कर सकेंगे। जल्द निदान शुरू होने से फसल को नुकसान कम होगा। खेत के किन क्षेत्रों में बीमारी का प्रकोप है, इसकी जानकारी मिलने पर सिर्फ उसी क्षेत्र में छिड़काव की आवश्यकता होगी। इससे किसान को छिड़काव में आने वाला खर्च भी घटेगा।
रत्नेश दुबे ने बताया कि ‘पैडी प्लांट लीफ डिजीज क्लासिफिकेशन’ नाम के इस शोध से तैयार सॉफ्टवेयर का पेटेंट 2023 में ही करा लिया गया है। इसकी अब ‘कॉपी राइट’ के लिए आवेदन किया गया है।इस बाबत ट्रिपल आईटी भागलपुर के पूर्व निदेशक प्रो. अरविंद चौबे ने बताया कि पौधे की पत्ती की बीमारी का शीघ्र पता लगाने से पैदावार बढ़ सकती है। यह तभी संभव है जब किसानों को पौधों की पत्तियों की तस्वीरों से धान की बीमारियों का निदान करने में मदद करने के लिए स्वचालित प्रणालियां हों। इसमें यह सॉफ्टवेयर काफी कामयाब होगा।
