नई दिल्ली: जम्मू में बढ़ती आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए पूरी प्लानिंग कर ली गई है. दहशतगर्दों के नापाक मंसूबों को नाकामयाब करने के लिए सुरक्षाबलों को अब आखिरी आदेश का इंतजार है. शनिवार को जम्मू-कश्मीर में सेना, CRPF, BSF, खुफिया विभाग और पुलिस की हाईलेवल बैठक हुई. माना जा रहा है कि इसमें जम्मू में बढ़ते आंतकवाद को कुचलने पर चर्चा की गई.
आतंकवाद को रोकने के लिए बनी रणनीति
वहीं जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल ने साफ किया कि जम्मू में आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कश्मीर मॉडल अपनाते हुए दहशगर्दों का सफाया होगा. ऐसे में सवाल है कि आखिर जम्मू में ऐसा क्या किया जा सकता है. जिससे आतंकवादी घटनाओं को रोका जा सके. माना जा रहा है कि जम्मू में सुरक्षा एजेंसियां सिक्युरिटी, इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस सिस्टम को मजबूत करेंगी. साथ ही जरूरत पड़ने पर पिन पॉइंट और बड़े ऑपरेशन किए जा सकते हैं.
घने जंगलों में बने आतंकी रूटों को खत्म किया जा सकता है. आतंकियों को पाक रेंजर्स के साथ ओवर ग्राउंड वर्कर की मदद मिल रही है. इसी वजह से ओवर ग्राउंड वर्कर्स के नेक्सस को कमजोर करना जरूरी है. जम्मू रीजन में 13 छोटे छोटे नाले और 3 नदियां हैं..जिसकी मदद से घुसपैठ की जाती है. अब इन इलाकों में गश्ती बढ़ाने की तैयारी है. वहीं आतंकियों के मददगारों की लिस्ट बनाई जा रही है, जिनके खिलाफ एक्शन लिया जा सकता है.
500 पैरा कमांडोज की हुई तैनाती
तमाम सुरक्षा एजेंसियां अब अपने अपने काम में जुट गई है. वहीं आतंकी घटनाओं को रोकने के लिए 500 पैरा SF कमांडोज़ की भी जम्मू में तैनाती की गई है. चौकसी के लिए भारतीय सेना और बीएसएफ दोनों को सीमा पर साथ डिप्लॉय किया जा रहा है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में ना केवल आतंकी घटनाओं पर लगाम लगेगी बल्कि श्रीनगर की तरह जम्मू में भी आतंकियों के पूरे नेटवर्क का सफाया किया जाएगा.
पहला- केरन सेक्टर
यहां के जंगल के इलाकों के जरिए घुसपैठ की कोशिश की जाती है. इस इलाके में सरहद पार आतंकी के लॉन्च पैड भी हो सकते हैं. वहां से ISI और पाकिस्तान रेंजर्स आतंकियों को भारत की सीमा में दाखिल कराते हैं.
दूसरा- नौगाम सेक्टर
जानकारी के मुताबिक आतंकी काइयान और टुटकार जंगल को भारत में घुसपैठ के लिए इस्तेमाल करते हैं.
तीसरा- बिम्बर गली
बिम्बर गली गली को BG सेक्टर के नाम से जाना जाता है. इस इलाके में भी ISI और पाक आर्मी के एक्टिव लॉन्च पैड हैं.
चौथा- चोर गली
आतंकी यहां पर पाकिस्तान से आने वाली चोरगली का इस्तेमाल कर सकते हैं. इस इलाके से भी आतंकियों के धुसपैठ की संभावना है क्योंकि यहां के जंगल वाले इलाके को हाइडआउट की तरह इस्तेमाल किया जाता है.
