टीएस सिंहदेव के एक बयान से बदल गया खेल!

रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से करीब 5 महीने पहले कांग्रेस ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य के सीनियर लीडर और हेल्थ मिनिस्टर टीएस सिंहदेव का उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। टीएस सिंहदेव राज्य के पहले उपमुख्यमंत्री होंगे। बुधवार को दिल्ली में कांग्रेस की अहम बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में राज्य कांग्रेस के सभी सीनियर नेता मौजूद थे। टीएस सिंहदेव को उपमुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है। अब सवाल यह उठ रहा है चुनाव के ठीक पहले टीएस सिंहदेव को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देकर क्या कांग्रेस पार्टी ने गुटबाजी और नाराजगी खत्म कर दी है।

बीते दिनों सरगुजा संभाग में कांग्रेस के संभागीय सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस दौरान टीएस सिंहदेव के समर्थकों की नाराजगी खुलकर सामने आई थी। मंच पर भी ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री का भी जिक्र किया गया था। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा था कि कई राजनीतिक दलों ने उनसे संपर्क किया। उन्होंने कहा था कि बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व भी उनसे संपर्क में था। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि छत्तीसगढ़ में आपसी गुटबाजी को खत्म करने के लिए टीएस सिंहदेव को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है।

सरगुजा संभाग में 14 विधानसभा सीटों पर फोकस

सरगुजा टीएस सिंहदेव का गढ़ माना जाता है। सरगुजा संभाग की अंबिकापुर विधानसभा सीट से टीएस सिंहदेव लगातार तीसरी बार विधायक हैं। बीते दिनों सोशल मीडिया में टीएस सिंहदेव का एक बयान वायरल हुआ था। जिसमें वह कहते दिख रहे थे कि 2018 में हमने सरगुजा संभाग की 14 सीटों पर जीत दर्ज की थी। 2023 के विधानसभा चुनाव में सभी 14 सीटों पर कांग्रेस की जीत पर संशय है। टीएस सिंहदेव ने कांग्रेस की जीत पर भी सवाल उठाया था। ढाई-ढाई साल के सीएम फॉर्म्युले को लेकर टीएस सिंहदेव कई बार अपनी नाराजगी जता चुके थे।

चुनाव लड़ने से भी किया था इंकार

टीएस सिंहदेव ने 2023 का विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर भी संशय वाला बयान दिया था। बाबा ने कहा था कि मैं विधानसभा चुनाव के लिए पहले से तैयारी शुरू कर देता हूं लेकिन इस बार अभी तक तैयारी नहीं कि है। कार्यकर्ता और समर्थकों से चर्चा के बाद ही मैं इस बार का चुनाव लड़ने का फैसला करूंगा।

2018 के चुनाव में टीएस बाबा का था बड़ा योगदान
बता दें कि छत्तीसगढ़ में 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत में टीएस सिंहदेव का बड़ा योगदान था। जिस मेनिफेस्टो को लेकर कांग्रेस 2018 के विधानसभा चुनाव में उतरी थी। उस घोषणा पत्र को बनाने में टीएस सिंहदेव की अहम जिम्मेदारी थी। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद ऐसा माना जा रहा था कि मुख्यमंत्री को लेकर ढाई-ढाई साल की चर्चा हुई थी। जिसके बाद भूपेश बघेल के समर्थक और टीएस सिंहदेव के समर्थक प्रदेश में अलग-अलग नजर आने लगे थे।
टीएस सिंहदेव

नाराजगी दूर करने की कोशिश

टीएस सिंहदेव की नाराजगी खुलकर सामने आई थी। जिसके बाद उन्होंने ग्रामीण विकास मंत्रालय से इस्तीफा दे दिया था। इन सभी बातों को ध्यान में रखकर टीएस सिंहदेव को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस एकजुटता होने की कोशिश कर रही है।

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