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चीन के खिलाफ एक्शन की तैयारी, भारत करेगा दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य सौदा

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
05/11/23
in राष्ट्रीय, समाचार
चीन के खिलाफ एक्शन की तैयारी, भारत करेगा दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य सौदा
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नई दिल्ली: भारत दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य सौदा कर सकता है और नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत फ्रांस से एक या दो नहीं, बल्कि पूरे 114 राफेल फाइटर जेट खरीद सकता है। यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन को इंडियन नेवी के लिए 26 मरीन राफेल विमान खरीदने के लिए लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (LoR) जारी किया था और अब फ्रांस की नजर इंडियन एयरफोर्स को 114 राफेल विमान बेचने पर है।

भारत और फ्रांस के बीच मरीन राफेल फाइटर जेट के लिए सौदे पर बातचीत अंतिम चरम पर है और यूरेशियन टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि फ्रांसीसी फाइटर जेट कंपनी की नजरें, भारतीय वायु सेना के लिए 114-जेट ऑर्डर पर टिकी हैं।

आपको बता दें, कि एलओआर एक टेंडर डॉक्यूमेंट की तरह होता है, जिसमें भारत सरकार ने मरीन राफेल फाइटर जेट में इंडियन नेवी को क्या क्या चाहिए, उसकी जरूरतों की जानकारी फ्रांसीसी कंपनी को दी है और अब फ्रांसीसी कंपनी को भारत सरकार को जवाब देना है, कि क्या वो इंडियन नेवी की जरूरतों को पूरा कर पाएगी या नहीं।

इंडियन नेवी मरीन राफेल फाइटर जेट को अपने दोनों एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य पर तैनात करना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत होने में कुछ ही समय बाकी है, क्योंकि फ्रांस को अभी भी एलओआर का मूल्यांकन करना है और 26 जेट के लिए कीमत पर उसके बाद बातचीत शुरू होगी। माना जा रहा है, कि अगले साल भारत और फ्रांस के बीच मरीन राफेल के लिए डीन फाइनल हो जाएगी।

इंडियन एयरफोर्स को 36 राफेल विमान बेचने के बाद दुनियाभर से फ्रांस को राफेल के लिए ऑर्डर मिलने शुरू हो गये हैं। सऊदी अरब फ्रांस को 54 राफेल विमान का ऑर्डर दे चुका है।

फ्रांस हासिल कर पाएगा डील?

भारतीय वायु सेना के टेंडर के लिए डसॉल्ट एविएशन का राफेल बोइंग के एफ/ए-18 और एफ/15ईएक्स, लॉकहीड मार्टिन के एफ-21, एसएएबी के ग्रिपेन और दुनिया भर के तीन अन्य प्रमुख लड़ाकू जेट विमानों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है।इंडियन एयरफोर्स के इस सौदे को ‘मदर ऑफ ऑल डील’ कहा जा रहा है, क्योंकि इंडियन एयरफोर्स एक साथ 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) के लिए टेंडर जारी करेगा, जिसकी कीमत अरबों डॉलर में होगी।

राफेल ने 2013 में 126 जेट विमानों के लिए पिछला टेंडर जीता था, जिसे 2007 में भारतीय वायुसेना द्वारा जारी किया गया था, जिसे मीडियम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमएमआरसीए) खरीद कार्यक्रम कहा जाता था। लेकिन, 2015 में, भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने उस टेंडर को रद्द कर दिया था और उसके बाद करीब 8 अरब अमेरिकी डॉलर में 36 राफेल फाइटर जेट के लिए नया सौदा किया गया।

इंडियन एयरफोर्स को है फाइटर जेट्स की जरूरत

इंडियन एयरफोर्स के एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने भारतीय मीडिया को बताया है, कि “एयरफोर्स चरणबद्ध तरीके से एमआरएफए के छह स्क्वाड्रन को शामिल करने की योजना बना रहा है। कार्यक्रम को डीएपी-2020 की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत आगे बढ़ाया जाएगा। आठ प्रकार के विमानों के लिए प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई हैं।”

वहीं, एक्सपर्ट्स फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट के राफेल, बोइंग के F-15EX और साब के JAS-39 ग्रिपेन के बीच प्रतिस्पर्धा को देखते हैं।

एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने कहा था, कि “एएसक्यूआर (एयर स्टाफ क्वालिटी आवश्यकताएं) को अंतिम रूप दे दिया गया है, और ओईएम (मूल उपकरण निर्माताओं) के साथ विस्तृत बातचीत हुई है। चयनित श्रेणियों की स्वदेशी सामग्री और ‘मेक इन इंडिया’ प्रावधानों के लिए ओईएम प्रतिबद्धताएं मांगी जा रही हैं। भारत में निर्मित किए जा रहे एमआरएफए पर स्वदेशी रूप से विकसित ए-ए (एयर-टू-एयर) और ए-जी (एयर-टू-ग्राउंड) हथियारों को एकीकृत करने की परिकल्पना की गई है।”

इंडियन एयरफोर्स ने 2018 में RFI जारी किया और अरबों डॉलर के सौदे के लिए दुनिया भर के विमान निर्माताओं से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली। नए एएसक्यूआर स्थापित करने के बाद, अब इंडियन एयरफोर्स आवश्यकता की स्वीकृति (एओएन) के लिए एक प्रस्ताव भेजने के लिए सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रही है। हालांकि, पिछले एक साल से एमआरएफए डील पर कोई हलचल नहीं हुई है।

भारतीय वायुसेना के पूर्व उप प्रमुख एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी ने एयरो इंडिया 2023 (फरवरी में आयोजित) के दौरान पत्रकारों से कहा था, कि अगले तीन से चार महीनों में सरकार से एओएन मिलने की उम्मीद है। हालांकि, नवंबर आ चुका है, और भारतीय वायुसेना को अभी तक एओएन प्रदान नहीं किया गया है, जिसके पास वर्तमान में 31 स्क्वाड्रन की ताकत है और लड़ाकू स्क्वाड्रन की ताकत घटती जा रही है और बेड़े की उम्र बढ़ती जा रही है। लिहाजा, इंडियन एयरफोर्स अब जल्दबाजी में है।

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (पीएलएएएफ) के लिए डेटरेंट के तौर पर पहचाने जाने के लिए भारतीय वायुसेना को कई विमानों की आवश्यकता है।

एक भारतीय अधिकारी ने कहा, कि “वे (इंडियन एयरफोर्स) भारत सरकार को यह समझाने में सक्षम नहीं हैं, कि इतनी बड़ी संख्या में आयातित विमानों की आवश्यकता क्यों है? विमान डिलीवरी तक की पूरी प्रक्रिया में 6 से 7 साल लगेंगे। तब तक तेजस एमके-2 भी बेड़े में शामिल होने के लिए तैयार हो सकता है। लिहाया, भारत सरकार के फैसले में देरी की ये एक बड़ी वजह हो सकती है।”

भारतीय वायुसेना, भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ नीति पर चलते हुए, पहले ही 90 हल्के लड़ाकू विमान तेजस एमके1 का ऑर्डर देने का इरादा जता चुकी है।

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