दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल का संचालन बिजली के साथ सौर ऊर्जा से भी होगा। करीब 40 प्रतिशत संचालन सौर ऊर्जा से करने का लक्ष्य है। इसके लिए एनसीआरटीसी ने सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीआई) के साथ एमओयू साइन किया है। एनसीआरटीसी अधिकारियों के अनुसार रैपिड रेल कॉरिडोर का कार्य तेजी से चल रहा है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन और प्रदूषण को कम करना है। इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन द्वारा संचालित, रैपिड रेल एनसीआर में परिगमन के ग्रीन मोड के रूप में काम करेगा। यह एनसीआर में बेतरतीब बढ़ रही भीड़भाड़ को भी नियंत्रित करने का कार्य करेगा। इसके लिए रैपिड रेल के परिचालन में ग्रीन या रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल किया जाएगा। करीब 40 प्रतिशत सौर ऊर्जा का प्रयोग होगा।
एनसीआरटीसी ने आरआरटीएस सिस्टम के लिए मुख्य रूप से अक्षय और सौर ऊर्जा से मिश्रित ऊर्जा प्राप्त करने के लिए सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीआई) के साथ एमओयू साइन किया है। इससे सिस्टम को लंबे समय तक चलाया जा सकेगा। एनसीआरटीसी ने अभी न्यूनतम 10 मेगावाट सोलर ऊर्जा उत्पन्न करने का लक्ष्य बनाया है। दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर की कुल ऊर्जा आवश्यकता का लगभग 40 प्रतिशत तक नवीकरणीय ऊर्जा से प्राप्त करने का लक्ष्य है।
स्टेशन, डिपो और भवनों की छत का होगा प्रयोग
स्वच्छ और हरित पर्यावरण एनसीआरटीसी सभी रैपिड रेल स्टेशन, डिपो और अन्य भवनों की छत का प्रयोग सौर ऊर्जा के लिए होगा। आईजीबीसी सर्टिफिकेशन की उच्चतम रेटिंग प्राप्त करने का भी प्रयास किया जा रहा है। ग्रीन ऊर्जा के दोहन के लिए आरआरटीएस स्टेशन और डिपो की छत पर सौर पैनल लगाए जाएंगे। ग्रीन एनर्जी से लैस स्टेशन का बुनियादी ढांचा ग्रीन परिवहन मॉडल पर यात्रियों का समग्र अनुभव बढ़ाएगा और सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
