नई दिल्ली: चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) का ऑर्बिटर मिशन बड़े चाव से विक्रम लैंडर (Vikram Lander) पर नजर रख रहा है. दरअसल, इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) ने तस्वीर शेयर की है. इस तस्वीर में चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने चंद्रयान-3 के लैंडर को कैप्चर किया है. ISRO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर ये तस्वीर शेयर की थी. इसमें लिखा था कि चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर में लगे हाई रेजॉल्यूशन कैमरे (OHRC) के पास हाई क्वॉलिटी की तस्वीरें खींचने की क्षमता है. हालांकि, ISRO ने बाद में इस तस्वीर को हटा लिया है.
… … and here is how the Chandrayaan-3 Rover ramped down from the Lander to the Lunar surface. pic.twitter.com/nEU8s1At0W
— ISRO (@isro) August 25, 2023
पोस्ट में दो तस्वीरें शेयर की गई थीं. बाईं तरफ वाली फोटो लैंडर के उतरने से पहले की थी और दाईं तरफ लैंडर के उतरने के बाद की फोटो थी. लैंडर वाली जगह को फोटो में जूम करके भी दिखाया गया था. दोनों ही तस्वीरें लॉन्चिंग वाले दिन ली गई थीं. पोस्ट के मुताबिक, बाईं तरफ वाली पहली फोटो 23 अगस्त की दोपहर 02 बजकर 28 मिनट पर ली गई थी. इस समय चंद्रयान-3 चांद की सतह पर उतरने की ओर बढ़ रहा था. दूसरी तरफ की फोटो 23 अगस्त को रात 10 बजकर 17 मिनट पर ली गई थी. इसमें विक्रम लैंडर चांद पर उतरा हुआ नजर आ रहा है.बता दें, चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त की शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग की थी. भारत चांद के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में उतरने वाला पहला देश है. इसरो ने चंद्रयान-3 की लैंडिंग के लिए बहुत सोच समझकर ये समय चुना था. वजह है, इस दिन से अगले 14-15 दिनों तक चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सूरज की रोशनी आती रहेगी. इस रोशनी से विक्रम लैंडर को चांद की सतह का अध्ययन करने में मदद मिलेगी.
Rover के निकलने का वीडियो
ISO ने विक्रम लैंडर के अंदर से प्रज्ञान रोवर के निकलने का वीडियो भी जारी किया है. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि रोवर किस तरह लैंडर में बने रैंप पर चलते हुए चांद की सतह पर उतर रहा है. रोवर में दो सोलर पैनल भी लगे हुए हैं. ये पैनल सूरज की रोशनी से चार्ज होंगे और रोवर को काम करने के लिए जरूरी एनर्जी देंगे.
उधर, ISRO के पूर्व अध्यक्ष जी माधवन नायर ने भी इस मिशन की सफलता पर बधाई दी. उन्होंने तिरुवनंतपुरम में 24 अगस्त को कहा कि चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग से दुनिया भर में भारत की तकनीकी और लॉन्चिंग क्षमता की पहचान होगी. इसके जरिए भारत को ग्लोबल कमर्शियल अग्रीमेंट्स के मोर्चे पर मजबूती मिलेगी.
