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भारत नहीं आए, लेकिन चीन जाएंगे रूसी राष्ट्रपति पुतिन; क्या वजह?

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
11/10/23
in अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, समाचार
भारत नहीं आए, लेकिन चीन जाएंगे रूसी राष्ट्रपति पुतिन; क्या वजह?

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बीजिंग : पिछले महीने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित की गई जी-20 बैठक में भले ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शामिल नहीं हुए हों, लेकिन अब वे चीन की यात्रा करने की तैयारी कर रहे हैं। दरअसल, चीन बेल्ड एंड रोड इ्ंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के एक दशक पूरा होने के चलते अगले हफ्ते दुनियाभर के कई नेताओं को अपने यहां होस्ट कर रहा है। इसी कार्यक्रम में रूसी राष्ट्रपति पुतिन चीन जाकर शामिल होंगे। इस मौके पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने पहले कहा, “हम बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) में सक्रिय रूप से भाग लेने वाले देशों और भागीदारों का सहयोग योजनाओं पर चर्चा करने और आम विकास की तलाश के लिए बीजिंग आने का स्वागत करते हैं।”

अतीत में चीन अपने कई प्रोजेक्ट्स के जरिए छोटे देशों पर कब्जा जमाने की कोशिश करता रहा है। पहले वह उन देशों को लोन देता है और जब वह चुकाने में असमर्थ हो जाते हैं, तो उन पर कई प्रोजेक्ट्स के जरिए कब्जे की कोशिश करने लगता है। पाकिस्तान, श्रीलंका आदि जैसे देश चीन की इस चाल के जीते जागते उदाहरण हैं। दोनों ही देशों में चीन ने जमकर निवेश किया है और कर्ज दे-देकर कंगाल कर दिया। बीआरआई से जुड़े कार्यक्रम में दुनियाभर के 130 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं। इसमें शी जिनपिंग ओपनिंग स्पीच भी देंगे। वह विदेशी नेताओं के लिए स्वागत भोज भी आयोजित करेंगे। चीन द्वारा विशाल पहल शुरू करने के बाद से यह अपनी तरह का तीसरा मंच होगा, क्योंकि इससे पहले कार्यक्रम 2017 और 2019 में आयोजित किए गए थे।

शामिल होंगे रूसी राष्ट्रपति पुतिन

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि वह इस कार्यक्रम में भाग लेंगे। उनकी यूक्रेन में मॉस्को के युद्ध के बाद चीन की पहली यात्रा है। मॉस्को ने बताया कि सर्गेई लावरोव भी इसमें भाग लेंगे और अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ बातचीत करेंगे। बीजिंग ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक ऑफ चाइना (एक्ज़िमबैंक) से परियोजनाओं के लिए ऋण की शेष राशि अब कुल 2.2 ट्रिलियन युआन ($ 307.4 बिलियन) है। एक्ज़िमबैंक ने सभी परियोजनाओं में प्रमुख परिवहन और ऊर्जा परियोजनाओं को वित्तपोषित किया है। वहीं, निवेश योजना पर हस्ताक्षर करने वाले इटली ने पिछले महीने कहा था कि वह इस सौदे से बाहर निकलने पर विचार कर रहा है।

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