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स्मार्टफोन ने बनाया अंधा! क्या है डिजिटल विजन सिंड्रोम जो छीन सकता है आंखों की रोशनी?

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
09/02/23
in टेक वर्ल्ड, समाचार
स्मार्टफोन ने बनाया अंधा! क्या है डिजिटल विजन सिंड्रोम जो छीन सकता है आंखों की रोशनी?

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डिजिटल उपकरणों की स्क्रीन की लंबे समय तक देखने से आंखों की रोशनी जा सकती है या अन्य समस्याएं हो सकती हैं, ऐसे में जरूरी है कि समय-समय पर डिजिटल स्क्रीन से ब्रेक लेना चाहिए. स्मार्टफोन ने बनाया अंधा! क्या है डिजिटल विजन सिंड्रोम जो छीन सकता है आंखों की रोशनी?मोबाइल की वजह से आंखों की रोशनी भी जा सकती है.

स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है, लेकिन धीरे-धीरे इसकी लत गंभीर खतरे की ओर ले जा रही है. हाल ही में हैदराबाद में स्मार्टफोन से एक महिला की आंखों की रोशनी जाने का मामला सामने आया है.

हैदराबाद के डॉ. सुधीर कुमार ने हाल ही में ट्विटर पर एक पोस्ट साझा की है. इसमें उन्होंने विस्तार से बताया है कि कैसे अंधेरे में स्मार्टफोन चलाने पर 30 साल की एक महिला की आंखों की रोशनी चली गई. डॉक्टर के मुताबिक मंजू नाम की इस महिला में प्रकाश की तीव्र चमक और जिगजैग पैटर्न और एकाग्रता की कमी लगातार नजर आ रही थी, कई बार ऐसा भी होता था कि महिला को कुछ भी नजर नहीं आता था.

स्मार्टफोन की लत से बिगड़ी बात
महिला मंजू को अक्सर कुछ भी नहीं नजर आता था. खासकर रात के वक्त वह कई सेकेंड के लिए कुछ भी देख नहीं पाती थी. ऐसी स्थिति में वह नेत्र विशेषज्ञ के पास गई, लेकिन आंखों में सब सामान्य था. न्यूरोलॉजिकल कारणों का पता लगाने के लिए उसे रेफर किया गया. डॉक्टर से बातचीत में पता चला कि महिला ब्यूटीशियन की नौकरी करती थी जो उसने छोड़ दी, इसके बाद वह पिछले डेढ़ साल से प्रतिदिन कई घंटे तक स्मार्टफोन पर समय बिता रही थी, खासतौर से रात में लाइट बंद करने के बाद वह लगातार स्मार्टफोन का प्रयोग कर रही थी.

महिला को था डिजिटल विजन सिंड्रोम
जांच के बाद पता चला कि महिला स्मार्टफोन विजन सिंड्रोम (एसवीएस) से पीड़ित है, ये सिंड्रोम कंप्यूटर, स्मार्टफोन या अन्य डिजिटल उपकरण लंबे समय तक चलाने की वजह से हो सकता है, इसे कंप्यूटर विजन सिंड्रोम या डिजिटल विजन सिंड्रोम के तौर पर भी जाना जाता है. जिससे आंखों की रोशनी जाने का खतरा रहता है.

क्या है डिजिटल विजन सिंड्रोम
डिजिटल विजन सिंड्रोम को ही कंप्यूटर विजन सिंड्रोम कहते हैं, इसे डिजिटल आई स्ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है. आंखों पर बहुत अधिक जोर पड़ने की वजह से यह सिंड्रोम हो जाता है, इसके अलावा सिर दर्द, गर्दन में दर्द और कंधे में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अमेरिकन ऑप्टोमेट्रिक एसोसिएशन के मुताबिक यदि कोई व्यक्त कंप्यूटर या किसी अन्य डिजिटल स्क्रीन का इस्तेमाल दो घंटे या उससे अधिक समय तक करता है तो उसे ये सिंड्रोम होने का खतरा बढ़ जाता है.

एक सलाह से बन गई बात
डॉक्टर सुधीर के मुताबिक उन्होंने न तो किसी जांच के लिए कहा और न ही मंजू को कोई दवाई दी. वह आंखों के बारे में चिंतित थी. डॉक्टर सुधीर के मुताबिक स्मार्टफोन विजन सिंड्रोम की कोई दवाई नहीं बस मोबाइल से दूरी ही एक उपाय है. इसीलिए मैंने मंजू से कहा कि स्मार्टफोन का उपयोग कम से कम करें. मंजू ने ऐसा ही किया, उसने कहा कि जब तक बहुत ज्यादा जरूरी न हो तब तक मोबाइल की स्क्रीन नहीं देखूंगी. एक महीने में ही उसकी आंखों की रोशनी फिर से ठीक होने लगी है.

सिंड्रोम से बचने का ये है उपाय
ट्विटर थ्रेड में डॉ. सुधीर ने सिंड्रोम से बचने का उपाय भी लिखा है, उन्होंने कहा कि डिजिटल उपकरणों की स्क्रीन की लंबे समय तक देखने से आंखों की रोशनी जा सकती है या अन्य समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए डिजिटल स्क्रीन (20-20-20 नियम) का उपयोग करना चाहिए, इसका मतलब है कि स्क्रीम पर काम करते समय 20 फीट की दूरी पर देखें, 20 मिनट में 20 सेकेंड का ब्रेक लेना चाहिए.

 

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