ईडी को दिए गए सभी अधिकारों पर नहीं, कुछ मुद्दों पर ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले की होगी समीक्षा

नई दिल्ली: ईडी को दिए गए अधिकार के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह कुछ पहलुओं को दोबारा विचार करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने पीएमएलए के तहत ईडी की शक्तियों को बरकरार रखने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल रिव्यू पिटिशन सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पहली नजर में जजमेंट के दो पहलुओं पर दोबारा विचार करने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट आरोपी की गिरफ्तारी के वक्त उसे ईसीआईआर (एन्फोर्समेंट केस इन्फोर्मेशन रिपोर्ट) देने की अनिवार्यता नहीं होने और आरोपी पर निर्दोष साबित करने का बर्डेन डाले जाने के प्रावधान को दोबारा देखने की जरूरत बताई है। हम समझते हैं कि इन दोनों मुद्दों पर दोबारा विचार करने की जरूरत है।

सीजेआई बोले- कुछ ही मुद्दों पर दोबारा सुनवाई की जरूरत
चीफ जस्टिस एनवी रमण की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि पूरे जजमेंट पर सुनवाई की जरूरत नहीं है बल्कि लिमिटेड मुद्दे हैं जिसे दोबारा देखने की आवश्यकता है। हम समझते हैं कि ब्लैक मनी और मनी लॉन्ड्रिंग को रोकना जरूरी है और कोई देश उसे बर्दाश्त नहीं कर सकता है। बेंच ने साथ ही कहा कि अंतरिम प्रोटेक्शन चार हफ्ते के लिए जारी रहेगा। आमतौर पर रिव्यू पिटिशन चैंबर में सुना जाता है, वहां कोई दलील नहीं होती है और अर्जी देखकर उसका निपटारा होता है। लेकिन मौजूदा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रिव्यू पिटिशन ओपन कोर्ट में सुनवाई का फैसला लिया है और कुछ मुद्दों पर केंद्र को नोटिस जारी किया है।

ब्लैक मनी और मनी लॉन्ड्रिंग बर्दाश्त नहीं: सुप्रीम कोर्ट
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता कार्ति चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि 27 जुलाई के जजमेंट को रिव्यू किया जाना चाहिए। यह कानून पहले के मामले में भी लागू होता है और कहता है कि लगातार चल रहे अपराध के कारण पहले के मामले में भी लागू होता है। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि हम ब्लैक मनी और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ हैं क्योंकि कोई देश इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता है। कानून आदर्श है लेकिन दो पहलू हैं जिन पर विचार की जरूरत है। ईसीआईआर आरोपी को न देने का मामला और आरोपी को निर्दोष माने जाने के प्रावधान को रिवर्स कर दिया गया है, इन दोनों को देखने की जरूरत है। जब सॉलिसिटर जनरल ने याचिका का विरोध किया तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम ब्लैक मनी और मनी लॉन्ड्रिंग को कंट्रोल करने के फेवर में हैं लेकिन दो मुद्दे हैं जो पहली नजर में लगता है कि विचार करने की जरूरत है और हम उस मुद्दे पर नोटिस जारी करते हैं। इस पर सिब्बल ने कहा कि नोटिस लिमिटेड मुद्दे पर जारी न हो। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सिब्बल से कहा कि आप मुद्दे हमें बताएं। बहरहाल सुप्रीम कोर्ट ने कुछ सीमित मुद्दों पर मामले में केंद्र को नोटिस जारी किया है।

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