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सरकारी स्कूलों के लिए केंद्र सरकार की वो योजना जिसपर विपक्ष को आपत्ति?

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
17/07/24
in राष्ट्रीय, समाचार
सरकारी स्कूलों के लिए केंद्र सरकार की वो योजना जिसपर विपक्ष को आपत्ति?
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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने पंजाब, दिल्ली और पश्चिम बंगाल को मिलने वाली फंडिंग रोक दी है. बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने इन तीनों राज्यों को ‘समग्र शिक्षा अभियान’ के तहत फंड देना बंद कर दिया है. ऐसा इसलिए क्योंकि इन राज्यों ने केंद्र सरकार की PM-SHRI यानी पीएम-स्कूल फॉर राइजिंग योजना स्कीम से जुड़ने से मना कर दिया है.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि केंद्र सरकार का कहना है कि जो राज्य PM-SHRI योजना से नहीं जुड़ेंगे, उन्हें समग्र शिक्षा अभियान के तहत फंड नहीं दिया जाएगा.  PM-SHRI योजना को सितंबर 2022 में लॉन्च किया गया था. इसका मकसद देशभर के सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूल के तौर पर अपग्रेड करना है.

किस राज्य की कितनी फंडिंग रुकी?

करीब दो साल पहले लॉन्च हुई इस योजना से अब तक लगभग सभी राज्य जुड़ चुके हैं. हालांकि, अब तक तमिलनाडु, केरल, दिल्ली, पंजाब और पश्चिम बंगाल इससे नहीं जुड़े हैं. तमिलनाडु और केरल ने जहां इस योजना से जुड़ने की इच्छा जताई है, वहीं दिल्ली, पंजाब और पश्चिम बंगाल ने सीधे इनकार कर दिया है.

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि PM-SHRI योजना से नहीं जुड़ने के कारण केंद्र सरकार ने दिल्ली, पंजाब और पश्चिम बंगाल को समग्र शिक्षा अभियान के तहत पिछले तीन क्वार्टर से फंड नहीं दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर से दिसंबर, जनवरी से मार्च और अप्रैल से जून तिमाही की फंडिंग इन राज्यों को नहीं मिली है.

अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली को 330 करोड़, पंजाब को 515 करोड़ और पश्चिम बंगाल को 1 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड नहीं मिला है.

योजना से जुड़ने में दिक्कत क्या?

जिन तीन राज्यों ने PM-SHRI योजना से जुड़ने से इनकार किया है, वहां विपक्षी पार्टियों की सरकार है. दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी तो पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी की सरकार है.

दिल्ली और पंजाब ने इस योजना से जुड़ने से इसलिए मना कर दिया है, क्योंकि इन राज्यों में पहले से ही ‘स्कूल ऑफ स्पेशलाइज्ड एक्सीलेंस’ और ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ नाम की योजनाएं लागू हैं. आम आदमी पार्टी की सरकार वाले इन दोनों राज्यों में सरकारी स्कूलों को वर्ल्ड क्लास लेवल पर तैयार करने के लिए ये योजनाएं चलाई जा रही हैं. इसलिए ये राज्य PM-SHRI योजना से जुड़ने से मना कर रहे हैं.

वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार ने इस योजना के नाम पर आपत्ति जताई है. इसके अलावा, पश्चिम बंगाल सरकार का ये भी कहना है कि वो पहले से ही आर्थिक बोझ का सामना कर रही है और इस योजना की 40% लागत नहीं उठा सकती.

क्या है PM-SHRI योजना?

इस योजना को 7 सितंबर 2022 को लॉन्च किया गया था. योजना का मकसद देशभर के 14,500 सरकारी स्कूलों को अपग्रेड करना है और बाकी स्कूलों के लिए ‘मिसाल’ के तौर पर पेश करना है. इन स्कूलों में नई शिक्षा नीति भी लागू की गई है. नई शिक्षा नीति 2020 में आई थी.

इस योजना में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय सरकारों की ओर से चल रहे सरकारी स्कूल शामिल हैं. PM-SHRI डैशबोर्ड के मुताबिक, अब तक इस योजना के तहत देशभर के 10,077 स्कूल जुड़ चुके हैं. इनमें से 839 केंद्रीय विद्यालय और 599 नवोदय विद्यालय हैं. ये दोनों ही स्कूल केंद्र सरकार चलाती है. बाकी के 8,639 स्कूल राज्य सरकार या स्थानीय सरकारों के हैं.

जानकारी के मुताबिक, योजना पर 2026-27 तक कुल 27,360 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इसमें से 18,128 करोड़ रुपये केंद्र सरकार खर्च करेगी. बाकी के 9,232 करोड़ रुपये का खर्च राज्य सरकार की ओर से उठाया जाएगा.

योजना से जुड़ने के लिए कुछ शर्तें तय हैं. जो स्कूल इस योजना से जुड़ना चाहते हैं, उन्हें इन शर्तों को पूरा करना होता है. स्कूल की पक्की इमारत और लड़के-लड़कियों के लिए कम से कम एक टॉयलेट जैसी शर्तें शामिल हैं. योजना से जुड़ने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जाता है. फिर इन स्कूलों को इवैल्युएट किया जाता है. शहरी इलाकों के स्कूलों को 70% और ग्रामीण इलाकों के स्कूलों को 60% लाने होते हैं. इसके बाद राज्य सरकार स्कूल की लिस्ट केंद्र को भेजती है और फिर इनका चयन किया जाता है.

क्या है समग्र शिक्षा अभियान?

समग्र शिक्षा अभियान को 2018-19 में शुरू किया गया था. इसका मकसद स्कूली शिक्षा में सुधार लाना है. इस अभियान में पहले से चली आ रही तीन योजनाओं- सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान और शिक्षक शिक्षा को शामिल किया गया है.

इस योजना में 60:40 के अनुपात में खर्च किया जाता है. यानी 60% पैसा केंद्र और 40% राज्य सरकारें खर्च करती हैं. जबकि, पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों की सरकारें 10% खर्च उठाती हैं.

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