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वैदिक संस्कृति और तंत्रशास्त्र से है नए संसद भवन का गहरा नाता, जानिए क्या है धार्मिक महत्व

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
28/05/23
in राष्ट्रीय, समाचार
वैदिक संस्कृति और तंत्रशास्त्र से है नए संसद भवन का गहरा नाता, जानिए क्या है धार्मिक महत्व
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नई दिल्ली : आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नए संसद भवन का उद्घाटन करने वाले हैं. ऐसे में पूरे देश की नजर भारतीय लोकतंत्र के नए मंदिर पर टिकी है. अब से पुरानी संसद के बजाए लोकतंत्र के सभी फैसले नए और भव्य संसद भवन में किए जाएंगे. नए संसद भवन के निर्माण में वास्तु शास्त्र का भी पूरा ध्यान रखा गया है. इतना ही नहीं, नए संसद भवन को पुराने संसद भवन की तरह गोल रखने के बजाए त्रिभुजाकार रखने के पीछे भी एक धार्मिक वजह है.

दरअसल, इसका वैदिक संस्कृति और तंत्रशास्त्र से गहरा नाता है. आइए जानते हैं नए संसद भवन को त्रिभुजाकार क्यों बनाया गया है, साथ ही जानेंगे इसके धार्मिक महत्व के बारे में…

आज होगा नए संसद भवन का उद्घाटन

आज देश को नया लोकतंत्र का मंदिर मिलने वाला है. नए संसद परिसर में पहले के बजाय काफी ज्यादा सुविधाएं और हाईटेक व्यवस्था है. इसमें पहले से कहीं ज्यादा बड़े विधायी कक्ष होंगे और लोकसभा में राष्ट्रीय पक्षी मोर की आकृति पर बनी नई 888 सीटों की व्यवस्था की गई है. वहीं, राज्यसभा में 348 सीटों को राष्ट्रीय फूल कमल की आकृति दी गई है.

आकार में तिकोना क्यों है नया संसद भवन

मीडिया रिपोर्ट्स और नए संसद भवन की वास्तुकला निर्मित करने वाले बिमल पटेल के मुताबिक “नया संसद भवन त्रिकोणीय आकार में डिजाइन किया गया है और नए संसद भवन के तिकोने आकार का संबंध वैदिक संस्कृति और तंत्रशास्त्र है. त्रिकोणीय भूखंड पर स्थित नए संसद भवन के तीन प्रमुख हिस्से हैं- लोकसभा, राज्यसभा और एक सेंट्रल लाउंज. वहीं, त्रिकोण आकार देश के विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों में पवित्र ज्यामिति का प्रतीक है.

क्या है इसका धार्मिक महत्व

वास्तुकार बिमल पटेल के मुताबिक इसका धार्मिक महत्व भी है. दरअसल, इस तिकोने आकार में सभी तरह का धार्मिक समायोजन है. इतना ही नहीं कई पवित्र धर्मों में त्रिभुज आकार का महत्व है. श्रीयंत भी त्रिभुजाकार है और तीन देवता या त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी त्रिभुज का प्रतीक हैं. ऐसे में त्रिभुज आकार का नई संसद भवन बेहद पवित्र और शुभ है.

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