मई-जून में अंधेरे में डूब जाएगा पूरा देश, चौंका सकती है NLDC की ये रिपोर्ट!

नई दिल्ली अप्रैल के पहले सप्ताह में ही दिल्ली समेत देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान 38 से 40 डिग्री पहुंच गया है. आने वाले महीनों खासतौर पर मई और जून में भीषण गर्मी की भविष्यवाणी की जा रही है. हर साल की तरह मई और जून में तापमान 45 डिग्री या उससे कहीं अधिक होने की आशंका बनी हुई है. ऐसे में ये जानना जरुरी है कि अगले कुछ दिन देश में बिजली की व्यवस्था कैसी रहने वाली है, क्या बढ़ा हुआ तापमान और चिलचिलाती गर्मी से निजात दिलाने के लिए जरुरी बिजली की आपूर्ति देश में हो पाएगी?

नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर के मुताबिक, मई और जून में बिजली की मांग बेतहाशा बढ़ सकती है. पिछले साल की तुलना में इस साल की गर्मी में लगभग 15 से 20 गीगावाट अतिरिक्त बिजली की मांग बढ़ा सकती है. पिछले साल पीक आवर्स में देशभर में बिजली की मांग 250 गीगावाट यानी 2 लाख 50 हजार मेगावाट थी, जो एनएलडीसी के मुताबिक इस साल 2 लाख 70 हजार मेगावाट (270 GW ) तक जा सकती है.

मई में बिजली डिमांड को पूरा करना मुश्किल

बिजली की इस बढ़ी हुई मांग को पूरा करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है. इतने कम समय में 270 गीगावाट बिजली जनरेशन और उसकी आपूर्ति की संभावना बहुत कम है. एनएलडीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, मई में इस डिमांड को पूरा करना बेहद मुश्किल है. कुछ बड़े ग्रीड ऑपरटर्स ने भी ऊर्जा मंत्रालय को आंतरिक जानकारी दी है कि मई और जून के पीक समय में लोगों को बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है.

24 गीगावाट बिजली कम

रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि मई में इस बात की संभवना 30 प्रतिशत से अधिक है कि बढ़ी हुई बिजली की मांग को पूरा नहीं किया जा सकेगा. जबकि जून में जरूरी बिजली आपूर्ति नहीं होने की संभावना 20 प्रतिशत के आसपास है. अब सवाल यह उठता है कि क्या देश आने वाले दिनों में बिजली संकट की और बढ़ रहा है. फिलहाल सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 5 अप्रैल तक देश में 2 लाख 46 हजार मेगावाट बिजली उपलब्ध है, जोकि पावर डिमांड फोरकास्ट से करीब 24 गीगावाट कम है.

एनएलडीसी ने क्या दी सलाह?

अत्यधिक मांग और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोडक्शन में होने वाले अस्थिरता के कारण बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है. एनएलडीसी ने ग्रिड के दबाव को न्यूनतम करने के लिए डिमांड साइड मैनेजमेंट की सलाह दी है. यानी कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूनिट्स को बिजली उपयोग के लिए पीक ऑवर्स से गैर पीक ऑवर्स में स्थानांतरित किया जा सकता है, क्योंकि सोलर पावर उत्पादन दिन के समय मांग को पूरा करने में मदद करता है, लेकिन इसकी अस्थिरता के कारण शाम और सुबह के समय बिजली की आपूर्ति में कमी कर सकती है.

नॉन सोलर आवर्स

हालांकि, देश में बिजली उत्पादन का प्रमुख स्त्रोत कोयला आधारित है और 6 अप्रैल यानी रविवार तक देश के सभी थर्मल पावर स्टेशनों में पर्याप्त मात्रा में कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, लेकिन भारत की बेस लोड बिजली उत्पादन क्षमता पिछले कई सालों से स्थिर है, जिसके कारण नॉन सोलर आवर्स में बिजली की मांग पूरी करने में कठिनाई हो सकती है.

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