नई दिल्ली: ये भारत है जनाब…दुनिया स्पेसक्राफ्ट चांद पर सुरक्षित उतार कर अपने मिशन को कामयाब मानती है, वहां खोज करती है, लेकिन भारत स्पेसक्राफ्ट क्रैश करवाकर भी दुनिया की सबसे बड़ी खोज को हासिल कर लेता है। चांद पर जो न अमेरिका को मिला, न रूस को और न ही चीन को उसे भारत ने खोज निकाला था, वो भी स्पेसक्राफ्ट को क्रैश कराकर। इसरो ने अपना ही स्पेसक्राफ्ट चांद पर जानबूझकर क्रैश कराया था।
कहानी भारत के पहले चांद मिशन की
भारत ने अक्टूबर 2008 में अपना पहला मून मिशन लॉन्च किया था। इस मिशन का नाम चंद्रयान 1 था। तब तक, केवल चार देश चांद पर अपना मिशन भेजने में कामयाब रहे थे। इनके नाम थे अमेरिका, रूस, यूरोप और जापान। भारत इस लिस्ट में पांचवां था, जिसने चांद पर अपना सफल मिशन भेजा था। भारत का पहला चांद मिशन 2009 तक चला था। यान को 8 नवंबर 2008 को चंद्रमा की कक्षा में स्थापित किया गया था।
चंद्रयान 1 के साथ प्रोब
चंद्रयान के साथ एक 32 किलो का प्रोब भी इसरो ने भेजा था। इस प्रोब को सफल लैंडिंग के लिए नहीं बल्कि इसरो ने क्रैश कराने के लिए चांद पर भेजा था। 17 नवंबर 2008 को इस प्रोब को इसरो से क्रैश का कमांड मिला तो यह चांद की ओर बढ़ चला।
जब क्रैश हुआ प्रोब
चंद्रयान से अलग होने के करीब 25 मिनट बाद प्रोब चांद की सतह से जा टकराया। कहने को तो यह क्रैश लैंडिंग थी, लेकिन इसे क्रैश कराकर के भी भारत इतिहास रच चुका था। प्रोब में लगे उपकरण क्रैश होने के बाद भी काम कर रहे थे और वो लगातार इसरो को डाटा भेज रहे थे।
वो महान खोज
पूरी दुनिया अपने स्पेसक्राफ्ट को लैंड कराकर कोई खोज करती है, भारत ने क्रैश कराकर वो खोज लिया, जिसे अमेरिका-जापान तक नहीं खोज पाए। यह प्रोब जब चांद की ओर बढ़ रहा था, तब इसरो के वैज्ञानिक इससे मिलने वाली डाटा को जुटाने में जुटे थे, क्योंकि इसी डाटा पर उनके अगले मिशन की सफलता निर्भर थी। इस पर हर वो एक्सपेरिमेंट किया गया जो भविष्य में उपयोगी साबित होने वाले थे। इसमें कैमरा सहित कई तरह के उपकरण लगे थे। आज इन्हीं डाटा की बदौलत चंद्रयान-3 सफलता के झंडे गाड़ रहा है, चांद पर लैंड करने की तैयारी कर रहा है। इसी प्रोब ने यह पता लगाया था कि चांद पर पानी है। इस खोज से दुनिया हैरान रह गई थी, बाद में अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने भी इसकी पुष्टि की।
