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इजराइल से सऊदी तक तबाही मचा सकती हैं ईरान की ये मिसाइलें?

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
04/11/24
in राष्ट्रीय
इजराइल से सऊदी तक तबाही मचा सकती हैं ईरान की ये मिसाइलें?
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नई दिल्ली: इजराइल और अमेरिका ने दावा किया है कि पिछले महीने इजराइल ने ईरान पर हमला कर तेहरान में एयर डिफेंस को ध्वस्त कर दिया और मिसाइल उत्पादन सुविधा को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया है. इससे इस बात की आशंका गहरा गई है कि ईरान की ओर से भविष्य में इजराइल पर फिर से मिसाइलों से हमला किया जा सकता है. हालांकि, ईरान के रक्षा मंत्री अजीज नासिरजादेह ने अब दावा किया है कि 26 अक्तूबर को इजराइल की ओर से किए गए हवाई हमले में उनके मिसाइल उत्पादन में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आई है.

आइए इसी बहाने जान लेते हैं कि ईरान कितनी मिसाइलों का निर्माण करता है, क्या हैं इनकी खूबियां? क्या ये दूसरे देशों को भी निर्यात करता है?

इजराइल से सऊदी अरब तक सब निशाने पर

ईरान के शस्त्रागार में ऐसी-ऐसी मिसाइलें हैं, जिनसे वह इजराइल से लेकर सऊदी अरब तक हमले कर सकता है. सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज की ओर से साल 2021 में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक तेहरान के पास हजारों क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलें हैं. उसकी अलग-अलग मिसाइलों की संख्या तो कभी सामने नहीं आ पाईं पर 2023 में अमेरिकी एयरफोर्स के जनरल के. मैकेंजी ने अमेरिकी कांग्रेस को बताया था कि ईरान के पास 3000 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें हैं.

फिलहाल इन मिसाइलों की वजह से चर्चा में ईरान

पिछले कुछ सालों में ईरान की जो मिसाइलें चर्चा में रही हैं, वे हैं शाहाब-3 और शाहाब-4 मिसाइलें. वास्तव में शाहाब-3 मिसाइल ही वर्तमान में ईरान की सभी आधुनिक मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल का आधार है. इसमें लिक्विड प्रोपेलैंट का इस्तेमाल होता है. शाहब-3 मिसाइल की मारक क्षमता 800 से 930 मील तक है और यह 1650 पाउंड (LBS) वजनी पेलोड ले जाने में सक्षम है. वहीं, शाहब-4 की रेंज 1240 मील है और यह 2200 पाउंड पेलोड के साथ आक्रमण कर सकती है. ईरान वाच के हवाले से सीएनएन ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि शाहाब-3 मिसाइलों की नए वैरिएंट के रूप में गदर और एमाद मिसाइलें बनाई जा चुकी हैं, जो 300 मीटर तक के दायरे में सटीक निशाना साधती हैं.

फतह-1 ने भी हासिल कर ली प्रसिद्धि

ईरान की मीडिया के हवाले से सीएनएन ने यह भी बताया है कि तेहरान ने अब एक नई मिसाइल का इस्तेमाल शुरू कर दिया है, जिसका नाम है फतह-1. तेहरान की ओर से इन मिसाइलों को हाईपरसोनिक मिसाइल की संज्ञा दी गई है. इसका मतलब यह है कि ध्वनि (साउंड) की गति से भी पांच गुना तेजी से अपने टारगेट पर झपटती है. इस तरह से इस मिसाइल की अनुमानित गति 3800 से 6100 किमी प्रति घंटे है. विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि फतह-1 में इस तरह से वारहेड का इस्तेमाल किया जाता है कि यह किसी मिसाइल डिफेंस सिस्टम से भी अपना बचाव कर सकती है.

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज के एक रिसर्च फेलो फैबियन हिंज का कहना है कि फतह-1 में एक पैंतरेबाजी करने में सक्षम वारहेड लगाया गया है. यह मिसाइल डिफेंस सिस्टम से बचने के लिए टारगेट की ओर जाते वक्त हाईपरसोनिक स्पीड से बढ़ता है.

1987 में की थी मिसाइल बनाने की कोशिश

ईरान में मिसाइलों के निर्माण के इतिहास पर नजर डालें तो इसकी शुरुआत साल 1987 से हुई थी. तब इसने स्क्ड मिसाइलों (Scud missiles) के निर्माण की शुरुआत की थी. इससे पहले ईरान ने साल 1985 में लीबिया और 1986 में लीबिया से Scud-B मिसाइलें आयात की थीं. शुरुआत में इसकी स्क्ड मिसाइलें बनाने की योजना फेल हो गई तो इसे उत्तर कोरिया से तकनीकी सहायता और मिसाइलें लेनी शुरू कर दीं. साल 1987 से 1992 के बीच इसे 200 से 300 तक ऐसी मिसाइलें आयात कीं. बाद में इसने सीरिया, लीबिया और उत्तर कोरिया होते हुए चीन के साथ मिसाइलों का निर्माण शुरू किया और आज रूस भी उसके साथ खड़ा है.

रूस तक को मिसाइल निर्यात करता है ईरान

रूस मिसाइलों के निर्माण में ईरान को तकनीकी सहायता देता है तो बदले में ईरान रूस को बैलिस्टिक मिसाइलों का निर्यात करता है. यूक्रेन से युद्ध के दौरान ईरान ने रूस को बैलिस्टिक मिसाइलों की सप्लाई की तो जी-7 के देशों ने इसे रोकने तक की चेतावनी दी थी. रूस के अलावा कई और देशों को भी ईरान अपनी मिसाइलों का निर्यात करता है. इनमें वे देश खास हैं, जिन्होंने शुरुआती दिनों में ईरान को अपनी मिसाइलें बनाने में तकनीकी मदद दी थी.

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