इस समय चीन में कोरोना से हाहाकार मचा हुआ है. वायरस की चपेट में आने से सैंकड़ों लोगों की मौत हो रही है. चीन के अलावा अमेरिका और जापान में भी कोविड के मामलों में तेजी देखी जा रही है. तीन साल पहले कोरोना की शुरुआत भी चीन से ही हुई थी. अब फिर से वायरस वहां तांडव मचा रहा है. इस बीच भारत सरकार ने भी कोविड को लेकर नई एडवाइजरी जारी की है. जिसमें लोगों को मास्क पहनने और बूस्टर डोज लगाने की सलाह दी गई है.
भारत में कोरोना के आंकड़े देखे तो वायरस के मामले पिछले तीन साल के सबसे निचले स्तर पर हैं, लेकिन चीन की वजह से यहां भी खतरा बढ़ने की आशंका है. भारत में कोविड की तीन लहर आ चुकी है, लेकिन इसमें सबसे खतरनाक दूसरी लहर थी. उस दौरान अस्पतालों में बेड कम पड़ गए थे और रोजाना सैकड़ों लोगों की मौत हो रही थी. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि कोविड की दूसरी लहर में क्या गलती हुई थी, जिसे अब ठीक करना जरूरी है. इन सवालों का जवाब जानने के लिए हमने हेल्थ एक्सपर्ट्स से बातचीत की है.
दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ( एम्स) में क्रिटिकल केयर विभाग के प्रोफेसर डॉ युद्धवीर सिंह बताते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान डेल्टा वेरिएंट ने तबाही मचाई थी. तब डॉ सिंह एम्स में कोविड आईसीयू की जिम्मेदारी संभाल रहे थे.
डॉ युद्धवीर ने बताया कि उस दौरान एक भयानक मंजर था. तब अधिकतर मरीजों के फेफड़ों को कोरोना नुकसान पहुंचा रहा था, जिससे उनकी मौत हो रही थी. दूसरी लहर के दौरान यह गलती हुई थी कि किसी को अंदाजा नहीं था कि पहली वेव के कुछ महीनों बाद ही इतनी खतरनाक लहर आ सकती है. तब कोविड को लेकर कोई खास गाइडलाइन भी नहीं थी. स्वास्थ्य कर्मचारी को भी कोरोना मरीजों के इलाज के बारे में जानकारी नहीं थी. तब अधिकतर अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट भी कम क्षमता वाले थे. उस दौरान अन्य देशों के हालातों को देखते हुए तैयारी कर थी जाती तो दूसरी वेव का असर हल्का हो सकता है.
अब इन बातों का ध्यान रखने की है जरूरत
डॉ युद्धवीर सिंह का कहना है कि इस समय सबसे जरूरी है कि कोविड से बचाव के नियमों का सख्ती से पालन करें. इसके अलावा सभी अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए. देश की आबादी काफी अधिक है. ऐसे में जरूरी है कि अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए. जिससे आने वाले किसी खतरे से बचाव हो सके.
डॉ सिंह का कहना है कि चीन में कोविड के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारत को पूरा अलर्ट रहना होगा. अभी से सभी तैयारी पूरी करनी होगी. यह भी देखना होगा कि चीन में कोविड का कोई नया वेरिएंट तो नहीं है. अगर कोई नया वेरिएंट है तो ये चिंता की बात हो सकती है. इसलिए भारत में अभी से कोरोना की रोकथाम के लिए सभी जरूरी कदम उठाने होंगे. इसके लिए दवाएं, बेड और ऑक्सजीन व्यवस्था को अभी से मजबूत करके चलना होगा
जीनोम सीक्वेंसिंग और ट्रेसिंग बढ़ाने की जरूरत
डॉ सिंह का कहना है कि विदेशों से आने वाले कोविड संक्रमितों की जीनोम सीक्वेंसिंग को बढ़ाना होगा और संक्रमित के संपर्क में आए सभी लोगों को जल्द से जल्द ट्रेस करने की जरूरत है. लोगों और सरकार के प्रयास से ही आने वाले किसी खतरे को रोका जा सकता है.
