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इस बार कर्तव्य पथ पर दिखेगी भारतीय सेना की स्वदेशी ताकत!

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
13/01/24
in राष्ट्रीय, समाचार
इस बार कर्तव्य पथ पर दिखेगी भारतीय सेना की स्वदेशी ताकत!
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नई दिल्ली : भारतीय सेना इस बार गणतंत्र दिवस समारोह यानी परेड में स्वदेसी हथियारों का प्रदर्शन करेगी. जिनमें लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर प्रचंड, पिनाका मल्टीबैरल रॉकेट सिस्टम, नाग एंटी-टैंक मिसाइल, टी-90 भीष्म टैंक जैसे हथियार शामिल हैं.

LCH Prachand की होगी उड़ान

लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल वहां किया जाता है जहां पर फाइटर जेट्स की जरुरत नहीं होती. भारत में बना LCH दुनिया का इकलौता अपनी कैटेगरी का सर्वश्रेष्ठ हेलिकॉप्टर है. ये यह अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों से लैंडिंग और टेकऑफ कर सकता है.

15.5 फीट ऊंचे लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर यानी LCH की की लंबाई 51.10 फीट है. इसे दो पायलट मिलकर उड़ाते हैं.  550 km की कॉम्बैट रेंज में यह अधिकतम 268 km/hr की गति से उड़ता है. लगातार सवा तीन घंटे उड़ान भर सकता है.  LCH 16,400 फीट की ऊंचाई तक जा सकता है. अभी दुनिया में इस तरह का कोई हेलिकॉप्टर नहीं है, जो इतनी ऊंचाई पर उड़ सके.

लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर की चोंच यानी कॉकपिट के ठीक नीचे 20 mm की तोप है. हेलिकॉप्टर में चार हार्डप्वाइंट्स हैं. यानी चार एक जैसे या अलग-अलग प्रकार के हथियार लगाए जा सकते हैं. जैसे – चार 12 FZ275 लेजर गाइडेड रॉकेट्स या हवा से हवा में मार करने वाली चार Mistral मिसाइलें. चार ध्रुवास्त्र एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें. या चार क्लस्टर बम, अनगाइडेड बम, ग्रेनेड लॉन्चर लगाया जा सकता है. या फिर इन सबका मिश्रण सेट कर सकते हैं.

Pinaka Rocket System

पिनाका रॉकेट्स की गति ही इसे सबसे ज्यादा खतरनाक बनाती है. इसकी स्पीड 5757.70 km प्रतिघंटा है. यानी एक सेकेंड में 1.61 km की गति से हमला करता है. पिछले साल इसके 24 टेस्ट किए गए थे. इसके प्रमुख तौर पर दो वैरिएंट्स मौजूद हैं. तीसरा निर्माणधीन है. पहला है – पिनाका एमके-1 (एनहैंस्ड) रॉकेट सिस्टम (Pinaka Mk-1 Enhanced Rocket System).

Republic Day Parade Indian Army

इसका नाम भगवान शिव के धनुष ‘पिनाक’ के नाम पर रखा गया है. पिनाका रॉकेट सिस्टम 44 सेकेंड में 12 रॉकेट दागता है. यानी हर 4 सेकेंड में एक रॉकेट. 214 कैलिबर के इस लॉन्चर से एक के बाद एक 12 पिनाका रॉकेट दागे जा सकते हैं. इसकी रेंज 7 km के नजदीकी टारगेट से लेकर 90 km दूर बैठे दुश्मन को नेस्तानाबूत कर सकता है. पहले वैरिएंट की रेंज 45 किलोमीटर है. दूसरे वैरिएंट की 90 किलोमीटर है. तीसरे निर्माणाधीन वैरिएंट की रेंज 120 किलोमीटर होगी. इस लॉन्चर की लंबाई 16 फीट 3 इंच से लेकर 23 फीट 7 इंच तक है. इसका व्यास 8.4 इंच है.

Nag Missile Launcher

भारत में बने ध्रुवास्त्र एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल को हेलिना (HELINA) भी कहते हैं. इससे पहले इसका नाम नाग मिसाइल (Nag Missile) था. ध्रुवास्त्र मिसाइल 230 मीटर प्रति सेकेंड की स्पीड से चलती है. यानी 828 km/hr प्रति घंटा. ध्रुवास्त्र की रेंज 500 मीटर से लेकर 20 km तक है. ध्रुवास्त्र तीसरी पीढ़ी की ‘दागो और भूल जाओ’ टैंक रोधी मिसाइल है. जिसे हेलिकॉप्टर, टैंक, बीएमपी या किसी भी आर्मर्ड व्हीकल पर तैनात किया जा सकता है. ध्रुवास्त्र मिसाइल का वजन करीब 45 kg है. यह 6 फीट एक इंच लंबी है. इसका व्यास 7.9 इंच है. इसमें 8 किलो विस्फोटक लगाकर इसे बेहतरीन मारक मिसाइल बनाया जा सकता है.

MRSAM लॉन्चर

इस मिसाइल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने इजरायल के IAI कंपनी के साथ मिलकर बनाया है. सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (Surface to Air Missile – SAM) आर्मी वेपन सिस्टम में कमांड पोस्ट, मल्टी फंक्शन राडार, मोबाइल लॉन्चर सिस्टम होता है.

MRSAM (Medium Range Surface to Air Missile) का वजन करीब 275 kg है. लंबाई 4.5 मीटर और व्यास 0.45 मीटर होता है.  इस मिसाइल पर 60 किलोग्राम वॉरहेड यानी हथियार लोड किया जा सकता है. यह दो स्टेज की मिसाइल है, जो लॉन्च होने के बाद धुआं कम छोड़ती है.

एक बार लॉन्च होने के बाद MRSAM आसमान में सीधे 16 km तक टारगेट को गिरा सकती है. वैसे इसकी रेंज आधा km से लेकर 100 km तक है. यानी इस रेंज में आने वाले दुश्मन यान, विमान, ड्रोन या मिसाइल को नेस्तानाबूत कर सकती है. इसकी गति है 680 मीटर प्रति सेकेंड यानी 2448 km/hr. इसकी गति भी इसे बेहद घातक बनाती है.

T-90 टैंक

टी-90 टैंक रूस का मुख्य युद्धक टैंक है, जिसे भारत ने अपने हिसाब से बदलकर उसका नाम भीष्म रख दिया है. 2078 टैंक सेवा में है. 464 का ऑर्डर दिया गया है. भारत ने रूस के साथ डील किया है कि वह 2025 तक 1657 भीष्म को ड्यूटी पर तैनात कर देगा. इस टैंक में तीन लोग ही बैठते हैं. यह 125 मिलिमीटर स्मूथबोर गन है.

इस टैंक पर 43 गोले स्टोर किए जा सकते हैं. यह 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चल सकता है. इसकी ऑपरेशनल रेंज 550 किलोमीटर है. इस टैंक के रूसी वर्जन का उपयोग कई देशों में किया जा रहा है. इस टैंक ने दागेस्तान के युद्ध, सीरियन नागरिक संघर्ष, डोनाबास में युद्ध, 2020 में हुए नागोमो-काराबख संघर्ष और इस साल यूक्रेन में हो रहे रूसी घुसपैठ में काफी ज्यादा मदद की है.

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