वो 5 परंपराएं जो पीएम मोदी ने एक झटके में तोड़ दीं!

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल यानी रविवार 17 सितंबर 2023 को 73 वर्ष के हो जाएंगे. Prime Minister बनने के बाद वह अपना 10 जन्मदिन मना मनाएंगे. PM Modi जहां भी जाते हैं, उनके समर्थक उनसे पहले वहां पहुंच जाते हैं. पीएम मोदी के समर्थन में और अगुवाई के लिए हजारों लोग सड़क पर खड़े होकर उनका अभिवादन करते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने समर्थकों से मिलने के लिए किसी सीमा को नहीं मानते हैं. भले ही पूर्व में गुजरात के मुख्यमंत्री रहे हों या अब देश के प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने कई ऐसी परंपराओं को ध्वस्त किया है, जिन्हें तोड़ने के बारे में पहले कोई सोच भी नहीं सकता था. जब भी उन्होंने किसी परंपरा को तोड़ा तो एक नई परंपरा की शुरुआत भी की. आइए जानते हैं उन पांच परंपराओं के बारे में, जिन्हें तोड़ने के लिए पीएम मोदी ने एक क्षण नहीं सोचा.

बच्चों से मिलना

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हर साल 15 अगस्त को प्रधानमंत्री लालकिले के प्राचीर से देश को संबोधित करते हैं. पूर्व के प्रधानमंत्री संबोधन के बाद सीधे कार में बैठकर आगे निकल जाते थे. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न सिर्फ उस परंपरा को तोड़ा, बल्कि प्रोटोकॉल व सुरक्षा की चिंता किए बिना वह सीधे वहां मौजूद बच्चों से मिलने पहुंच जाते हैं. पिछले 9 वर्षों में हर बार स्वतंत्रता दिवस के संबोधन के बाद पीएम मोदी की बच्चों से मिलने की तस्वीरें मीडिया की सुर्खियों में छाई रहती हैं. इस तरह से पीएम मोदी ने एक परंपरा को तोड़कर दूसरी शुरू की.

कर्तव्यपथ पर चहलकदमी

कर्तव्यपथ (पूर्व में राजपथ) पर हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस की परेड निकलती है. रंग बिरंगी झांकियां अपने-अपने राज्य के गौरव को दर्शाती हैं. हजारों की संख्या में दर्शक यहां भारत की सामरिक शक्ति को देखने के लिए पहुंचते हैं. राष्ट्रपति सलामी लेते हैं, इस दिन प्रधानमंत्री के पास आमतौर पर इस परेड का दर्शक बनने के अलावा ज्यादा कार्य नहीं होते. लेकिन पीएम मोदी परंपराओं से आगे बढ़ने के लिए जाने जाते हैं. साल 2018 की बात है, जब राजपथ पर परेड खत्म होने के बाद पीएम मोदी चहलकदमी करने लगे. वहां परेड देखने आए दर्शक लगातार मोदी-मोदी के नारे लगा रही थी और पीएम मोदी ने राजपथ पर चहलकदमी करते हुए हाथ हिलाकर दर्शकों का अभिवादन किया. इस दौरान उन्होंने सुरक्षा घेरे की भी चिंता नहीं की. उनके वाहनों का काफिला भी कुछ दूर तक उनके पीछे-पीछे चलता रहा.

युद्ध स्मारक से शहीदों को श्रद्धांजलि

हर वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर 26 जनवरी को सुबह प्रधानमंत्री इंडिया गेट पर बनी अमर जवान ज्योति पर जाते रहे हैं. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जनवरी 2020 को 48 साल पुरानी इस परंपरा को तोड़ दिया. ऐसा उन्होंने एक नई परंपरा को शुरू करने के लिए किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस दिन नवनिर्मित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की. इसके बाद से हर साल युद्ध स्मारक पर ही शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है. साल 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद भारतीय सशस्त्र बलों के शहीदों और अज्ञात सैनिकों की याद में अमर जवान ज्योति स्मारक को बनाया गया था. तब से ही परंपरा थी कि प्रधानमंत्री गणतंत्र दिवस के अवसर पर यहां श्रद्धांजलि देने आते थे. साल 2019 इंडिया गेट के ही पास शहीद स्मारक बनकर तैयार हुआ और अमर-जवान ज्योति को यहां शिफ्ट कर दिया गया.

जब पीएम मोदी ने झाड़ू उठाई

प्रधानमंत्री देश का प्रधान सेवक भी होता है और प्रधान सेवक को सामने से लोगों को प्रेरणा देनी होती है. Leading from the Front का उदाहरण देते हुए पीएम मोदी ने जब स्वच्छता अभियान की शुरुआत की तो सबसे पहले स्वयं झाड़ू पकड़ी. उन्होंने 2 अक्टूबर 2014 को गांधी जयंती के अवसर पर दिल्ली की वाल्मीकि बस्ती में जाकर झाड़ू लगाया. पीएम मोदी ने यहां स्वयं कूड़ा भी उठाया और कचरे को प्लास्टिक की डस्टबिन में डाला. इससे लोगों में संदेश गया कि जब देश का प्रधानमंत्री सफाई के लिए सार्वजनिक तौर पर झाड़ू उठाने से नहीं शर्माता तो फिर इस अच्छे कार्य में कैसी शर्म. पीएम मोदी ने झाड़ू उठाकर प्रधानमंत्री के पद के साथ लगे एलीट के तमगे को एक झटके में हटा दिया और इस तरह से पुरानी परंपरा को तोड़ एक नई परंपरा का निर्माण किया.

जब अचानक पाकिस्तान पहुंच गए पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परंपराएं तोड़ने के लिए जाने जाते हैं. बात साल 2015 की है. पीएम मोदी ने काबुल से भारत आने के लिए उड़ान भरी और अचानक पाकिस्तान के लाहौर में उनका विमान उतर गया. यहां उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात की, जो अपनी नातिन की शादी में व्यस्त थे. हालांकि, बाद के समय में उनकी सरकार ने पाकिस्तान से पूरी तरह से संबंध तोड़ लिए. अब उनकी सरकार का रुख है कि पाकिस्तान से तब तक बात नहीं होगी, जब तक वह आतंकवाद का खात्मा नहीं करता. अचानक पाकिस्तान जाना और फिर पाकिस्तान से बातचीत से भी मना कर देना यह परंपरा आमतौर पर नहीं देखी गई, जिसे पीएम मोदी ने करके दिखाया. आज पीएम मोदी की रणनीति ही है कि पाकिस्तान दुनिया में अलग-थलग पड़ गया है.

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