नई दिल्ली: MSP की कानूनी गारंटी समेत कई मांगों के साथ किसान संगठनों ने दिल्ली कूच किया है. केंद्र सरकार का कहना है कि वह किसानों से बातचीत को राजी है. किसानों की एक प्रमुख मांग स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की है. वे चाहते हैं कि आयोग के सुझाए फॉर्म्युले से MSP तय किया जाए. मंगलवार को जब किसान दिल्ली की सीमाओं पर डटे थे, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वादा किया कि सत्ता में आने पर MSP को कानूनी अधिकार बना देंगे. राहुल ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें जस की तस लागू करने की बात कही. हालांकि, 2010 में जब कांग्रेस नीत UPA सत्ता में थी, तब सरकार ने स्वामीनाथन आयोग के सुझाए फॉर्म्युले से MSP तय करने से इनकार किया था. राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में तत्कालीन कृषि राज्य मंत्री केवी थॉमस ने कहा था कि ऐसा करने से ‘बाजार की सूरत बिगड़ सकती है.’
बीजेपी के प्रकाश जावड़ेकर ने अप्रैल 2010 में तत्कालीन UPA सरकार से राज्यसभा में सवाल पूछा था. जावड़ेकर जानना चाहते थे कि क्या सरकार ने किसानों को भुगतान के लिए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें स्वीकार कर ली हैं. जवाब में थॉमस ने सदन को बताया:
“प्रोफेसर एम.एस. स्वामीनाथन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय किसान आयोग ने सिफारिश की है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) उत्पादन की भारित औसत लागत से कम से कम होना 50% अधिक चाहिए. हालांकि, यह अनुशंसा सरकार द्वारा स्वीकार नहीं की गई क्योंकि एमएसपी की सिफारिश वस्तुनिष्ठ मानदंडों और प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखते हुए कृषि लागत और कीमतें आयोग (CACP) द्वारा की जाती है. इसलिए, लागत पर कम से कम 50% की वृद्धि निर्धारित करने से बाजार विकृत हो सकता है.”
2010 में UPA सरकार का जवाब
MS स्वामीनाथन की अध्यक्षता में ‘राष्ट्रीय किसान आयोग’ का गठन 18 नवंबर 2004 को किया गया था. कमेटी ने आखिरी रिपोर्ट अक्टूबर 2006 में सरकार को सौंपी.
स्वामीनाथन रिपोर्ट में MSP का क्या फॉर्म्युला है?
सरकार अभी A2+FL फॉर्म्युले की मदद से MSP तय करती है. इसमें बीज, खाद, मजदूरी, सिंचाई जैसे नकदी खर्च के साथ-साथ किसान परिवार के सदस्यों की मेहनत की अनुमानित लागत जोड़ी जाती है. सब जोड़कर खर्च से कम से कम 1.5 गुना ज्यादा MSP तय होता है.
स्वामीनाथन आयोग ने रिपोर्ट में MSP के लिए C2+50% फॉर्म्युला दिया. इसके हिसाब से MSP फसल की औसत लागत से 50% ज्यादा होना चाहिए. इसमें इसमें पूंजी की इनपुट लागत और जमीन का किराया शामिल है, जिससे किसानों को 50 फीसदी रिटर्न मिलेगा.
आयोग की सिफारिशें लागू न करने के आरोपों पर कांग्रेस का जवाब
बीजेपी के घेरने पर कांग्रेस की ओर से पवन खेड़ा ने जवाब दिया. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बुधवार को कहा, “मोदी सरकार का कहना है कि ‘स्वामीनाथन आयोग’ को कांग्रेस ने लागू नहीं किया है. लेकिन सच तो ये है कि स्वामीनाथन आयोग में 201 सिफारिशें थीं, जिनमें से यूपीए सरकार ने 175 सिफारिशें लागू कर दी थीं. 26 सिफारिशें बाकी थीं, जिनमें से सबसे अहम MSP से जुड़ी घोषणा कल कांग्रेस अध्यक्ष (मल्लिकार्जुन) खरगे और राहुल गांधी ने की.”
राहुल ने मंगलवार को X (पहले ट्विटर) पर घोषणा की थी कि ‘कांग्रेस ने हर किसान को फसल पर स्वामीनाथन कमीशन के अनुसार MSP की कानूनी गारंटी देने का फैसला लिया है.’ गांधी ने कहा, “अगर इंडिया गठबंधन सत्ता में आता है, तो यह उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी प्रदान करेगा.”
