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भारतीय सेना और रेलवे के बाद देश में तीसरा सबसे अधिक जमीन का मालिक है वक्फ बोर्ड

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
20/09/22
in राष्ट्रीय, समाचार
भारतीय सेना और रेलवे के बाद देश में तीसरा सबसे अधिक जमीन का मालिक है वक्फ बोर्ड
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इन दिनों देशभर में वक्फ बोर्ड काफी चर्चा में है. दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच ने वक्फ बोर्ड से जुड़े घोटाले के आरोप में हाल ही में ओखला से आम आदमी पार्टी विधायक अमानतुल्लाह खान को गिरफ्तार कर लिया है. उधर, तमिलनाडु के एक हिंदू बहुल गांव की करीब 90 प्रतिशत जमीन को वक्फ की संपत्ति घोषित कर दिया गया है, जिसमें 1500 साल पुराना एक मंदिर भी है. सोचिए, दुनिया में इस्लाम के आने से पहले के मंदिर पर भी वक्फ अपनी मिल्कियत ने दावा कर दिया है! वक्फ बोर्ड की ऐसी ही विवादित गतिविधियों और उसे मिले विशेषाधिकारों को गैर-संवैधानिक बताते हुए वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर वक्फ बोर्ड है क्या, वह क्या करता है और उसके पास कौन-कौन सी शक्तियां हैं.

देशभर में वक्फ बोर्ड काफी चर्चा में है. हालाकि वक्फ बोर्ड के बढ़ती जमीन इस समय लोगों का ध्यान अपने तरफ आकर्षित कर रही है. सबसे पहले तो यह जान लीजिए कि वक्फ बोर्ड के पास भारतीय सेना और रेलवे के बाद सबसे ज्यादा जमीन है. यानी, वक्फ बोर्ड देश का तीसरा सबसे बड़ा जमीन मालिक है. वक्फ मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ इंडिया के मुताबिक, देश के सभी वक्फ बोर्डों के पास कुल मिलाकर 8 लाख 54 हजार 509 संपत्तियां हैं जो 8 लाख एकड़ से ज्यादा जमीन पर फैली हैं. सेना के पास करीब 18 लाख एकड़ जमीन पर संपत्तियां हैं जबकि रेलवे की चल-अचल संपत्तियां करीब 12 लाख एकड़ में फैली हैं. अब जो आंकड़ा जानने वाले हैं, वो चौंका देगा. साल 2009 में वक्फ बोर्ड की संपत्तियां 4 लाख एकड़ जमीन पर फैली थी. मतलब साफ है कि बीते 13 वर्षों में वक्फ बोर्ड की संपत्तियां दोगुनी से भी ज्यादा हो गई हैं. आप भी जानते हैं कि जमीन का विस्तार तो नहीं होता, फिर वक्फ बोर्ड के हिस्से जमीन का इतना बड़ा हिस्सा, इतनी तेजी से कैसे जा रहा है?

क्‍या कहता है वक्‍फ बोर्ड कानून

वकील अश्वनी उपाध्याय ने बताया क‍ि वक्फ बोर्ड देशभर में जहां भी कब्रिस्तान की घेरेबंदी करवाता है, उसके आसपास की जमीन को भी अपनी संपत्ति करार दे देता है. अवैध मजारों, नई-नई मस्जिदों की भी बाढ़ सी आ रही है. इन मजारों और आसपास की जमीनों पर वक्फ बोर्ड का कब्जा हो जाता है. 1995 का वक्फ एक्ट कहता है कि अगर वक्फ बोर्ड को लगता है कि कोई जमीन वक्फ की संपत्ति है तो यह साबित करने की जिम्मेदारी उसकी नहीं, बल्कि जमीन के असली मालिक की होती है कि वो बताए कि कैसे उसकी जमीन वक्फ की नहीं है. 1995 का कानून यह जरूर कहता है कि किसी निजी संपत्ति पर वक्फ बोर्ड अपना दावा नहीं कर सकता, लेकिन यह तय कैसे होगा कि संपत्ति निजी है? जवाब ऊपर दिया जा चुका है. अगर वक्फ बोर्ड को सिर्फ लगता है कि कोई संपत्ति वक्फ की है तो उसे कोई दस्तावेज या सबूत पेश नहीं करना है, सारे कागज और सबूत उसे देने हैं जो अब तक दावेदार रहा है. कौन नहीं जानता है कि कई परिवारों के पास जमीन का पुख्ता कागज नहीं होता है. वक्फ बोर्ड इसी का फायदा उठाता है क्योंकि उसे कब्जा जमाने के लिए कोई कागज नहीं देना है.

पीवी नरस‍िम्‍हा राव ने वक्‍फ बोर्ड एक्‍ट में क‍िए थे क्‍या संशोधन?

माइनोरिटी कमीशन के वकील खुर्रम ने बताया क‍ि वर्ष 1995 में पीवी नरसिम्हा राव की कांग्रेस सरकार ने वक्फ एक्ट 1954 में संशोधन किया और नए-नए प्रावधान जोड़कर वक्फ बोर्ड को असीमित शक्तियां दे दीं. वक्फ एक्ट 1995 का सेक्शन 3(आर) के मुताबिक, कोई संपत्ति किसी भी उद्देश्य के लिए मुस्लिम कानून के मुताबिक पाक (पवित्र), मजहबी (धार्मिक) या (चेरिटेबल) परोपरकारी मान लिया जाए तो वह वक्फ की संपत्ति हो जाएगी. वक्फ एक्ट 1995 का आर्टिकल 40 कहता है कि यह जमीन किसकी है, यह वक्फ का सर्वेयर और वक्फ बोर्ड तय करेगा.दरअसल, वक्फ बोर्ड का एक सर्वेयर होता है. वहीं तय करता है कि कौन सी संपत्ति वक्फ की है, कौन सी नहीं. इस निर्धारण के तीन आधार होते हैं. अगर किसी ने अपनी संपत्ति वक्फ के नाम कर दी, अगर कोई मुसलमान या मुस्लिम संस्था जमीन की लंबे समय से इस्तेमाल कर रहा है या फिर सर्वे में जमीन का वक्फ की संपत्ति होना साबित हुआ. बड़ी बात है कि अगर आपकी संपत्ति को वक्फ की संपत्ति बता दी गई तो आप उसके खिलाफ कोर्ट नहीं जा सकते. आपको वक्फ बोर्ड से ही गुहार लगानी होगी. वक्फ बोर्ड का फैसला आपके खिलाफ आया, तब भी आप कोर्ट नहीं जा सकते. तब आप वक्फ ट्राइब्यूनल में जा सकते हैं. इस ट्राइब्यूनल में प्रशासनिक अधिकारी होते हैं. उसमें गैर-मुस्लिम भी हो सकते हैं. हालांकि, राज्य की सरकार किस दल की है, इस पर निर्भर करता है कि ट्राइब्यूनल में कौन लोग होंगे. संभव है कि ट्राइब्यूनल में भी सभी के सभी मुस्लिम ही हो जाएं. वैसे भी अक्सर सरकारों की कोशिश यही होती है कि ट्राइब्यूनल का गठन ज्यादा से ज्यादा मुस्लिमों के साथ ही हो. वक्फ एक्ट का सेक्शन 85 कहता है कि ट्राइब्यूनल के फैसले को हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती नहीं दी जा सकती है.

वक्‍फ ट्राइब्‍यूनल के फैसले को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में नहीं दी जा सकती चुनौती

वरिष्ठ वकील और बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय बताते हैं क‍ि वक्फ बोर्ड में एक वकील, एक विधायक, एक सांसद, एक टाउन प्लानर, एक आईएस ऑफिसर, एक स्कॉलर, एक मुतवल्ली होते हैं. वक्फ एक्ट कहता है कि ये सभी मुस्लिम होंगे. अश्वनी उपाध्याय ने कहा बोर्ड किसी भी जमीन पर कह दे कि यह जमीन वक्फ की है तो उसके नोटिस के खिलाफ कोर्ट नहीं, वक्फ ट्राइब्यूनल से गुहार लगानी होगी. सोचिए, जिस वक्फ बोर्ड ने गलत दावा किया, उसके खिलाफ शिकायत की सुनवाई भी उसी का एक्सटेंडेड इंस्टिट्यूशन करेगा. अश्वनी उपाध्याय ने कहा कि अगर किसी को लगता है कि ट्राइब्यूनल पर तो संदेह नहीं किया जा सकता है तो फिर इसी तरह का कानून, इसी तरह का ट्राइब्यूनल गैर-मुस्लिमों के लिए क्यों नहीं है?

वकील अश्वनी उपाध्याय ने कहा कि वक्फ बोर्ड किस जमीन पर नोटिस जारी करेगा. इसकी कोई सीमा नहीं है. उसकी जहां मर्जी, उस जमीन को वक्फ की संपत्ति बता दे और जिसकी जमीन है, उसे बेवजह परेशानी झेलना पड़ती है. वो आरोप लगाते हैं कि वक्फ इसका फायदा उठाकर वसूली कर रहा है. उसे जिससे उगाही करनी होती है, उसे धमकाता है कि उसकी जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित कर दी जाएगी. डर के मारे वह व्यक्ति वक्फ अधिकारियों की जी-हुजूरी करने लगता है और फिर मनमाने शर्त मानने को मजबूर होता है. उपाध्याय का आरोप है कि वक्फ बोर्ड अपने असीमित अधिकारों के दुरुपयोग से गरीबों का धर्मांतरण करवा रहा है. वह आदिवासी इलाकों में लोगों की जमीन पर नोटिस देता है और जब व्यक्ति परेशान होता है तो उसे कहा जाता है कि अगर वह इस्लाम अपना ले तो जमीन बच जाएगी.

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