नई दिल्ली। कर्नाटक (Karnataka) में कुछ विधायकों और मंत्रियों ने लोकसभा चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है. ऐसे में कांग्रेस के सामने जिताऊ उम्मीदवारों की तलाश करना मुश्किल हो गया है. कांग्रेस को सात सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान किए 10 दिन बीत गए हैं लेकिन बाकी की 21 लोकसभा सीटों पर प्रत्याशियों की लिस्ट को फाइनल नहीं किया जा सका है. जान लें कि कांग्रेस ने 8 मार्च को जारी अपनी पहली लिस्ट में किसी भी मंत्री या विधायक को उम्मीदवार नहीं बनाया था. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान कुछ मंत्रियों और विधायकों को चुनाव लड़ने के लिए मनाने का प्रयास कर रहा है. उन्हें कई लोकसभा सीटों पर जिताऊ उम्मीदवारों को चुनने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
क्यों चुनावी जंग में नहीं उतर रहे मंत्री?
दरअसल, कांग्रेस नेता और गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने हाल ही में कहा था कि पार्टी में 7-8 मंत्रियों को उम्मीदवार बनाने पर चर्चा की जा रही है. लेकिन कुछ मंत्री खुद चुनाव लड़ने के बजाय अपने परिवार के सदस्यों को चुनाव लड़ाने के लिए कह रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी आलाकमान को चिंता है कि अगर मंत्रियों और विधायकों के परिजनों को प्रत्याशी बनाया गया तो जनता में गलत मैसेज जा सकता है.
कांग्रेस के सामने क्या है मुश्किल?
पार्टी के सूत्रों ने बताया कि मंत्रियों या उनके फैमिली मेबर्स को प्रत्याशी बनाने के मुद्दे पर निर्णय अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सांसद राहुल गांधी समेत पार्टी नेतृत्व को लेना है. वहीं, कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने कहा कि उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया लास्ट फेज में है. 19 मार्च को उम्मीदवारों पर फैसले लेने के लिए हमारी बैठक है. 19 मार्च की रात या 20 मार्च की सुबह तक हमारे सभी प्रत्याशियों की घोषणा कर दी जाएगी.
किन मंत्रियों को उम्मीदवार बनाना चाहती है कांग्रेस?
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस कैबिनेट मंत्रियों के एच मुनियप्पा को कोलार, एचसी महादेवप्पा को चामराजनगर, सतीश जारकीहोली को बेलगाम, बी. नागेंद्र को बेल्लारी, कृष्णा बायरे गौड़ा को बेंगलुरु उत्तर और ईश्वर खांद्रे को बिदर से उम्मीदवार बनाना चाहती है. इनमें से लगभग सभी मंत्रियों ने चुनाव लड़ने में रुचि नहीं दिखाई है. जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस ने शुरुआत में मंत्रियों के संभावित उम्मीदवार बनने और उनके सेलेक्शन का जिम्मा डीके शिवकुमार को सौंपा था, पर उन्होंने कहा था कि उनसे मिली रिपोर्ट संतोषजनक नहीं है.
वहीं, कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि पार्टी को 2019 के लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था जबकि वह राज्य में जेडीएस के साथ गठबंधन सरकार में थी. इसे देखते हुए कई सीनियर नेता लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं क्योंकि नेशनल लेवल पर पार्टी की संभावनाएं अब भी आशाजनक नहीं दिख रही हैं. लोकसभा चुनाव 2019 में मल्लिकार्जुन खरगे, वीरप्पा मोइली और मुनियप्पा समेत कई बड़े नेताओं को हार का सामना करना पड़ा था.
