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सांसदी गंवाने के बाद क्या हैं राहुल गांधी के पास चुनौतियां!

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
25/03/23
in राष्ट्रीय, समाचार
सांसदी गंवाने के बाद क्या हैं राहुल गांधी के पास चुनौतियां!
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नई दिल्ली: कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की शुक्रवार को लोकसभा की सदस्यतता रद्द हो गई. सूरत कोर्ट ने उन्हें गुरुवार को मानहानि केस में दोषी ठहराते हुए 2 साल की सजा सुनाई थी. इसी के साथ उन्हें जमानत मिल गई थी. शुक्रवार (24 मार्च 2023) को जैसी ही उनकी सांसदी जाने की खबर आई, उसके बाद राजनीतिक संग्राम शुरू हो गया. सियासी हलकों के साथ आम लोगों के बीच अटकलें लगने लगीं कि कांग्रेस का भविष्य क्या होगा? राहुल गांधी और पार्टी की आगे की रणनीति क्या होगी?

साल 2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं, बीजेपी की अगुवाई में एनडीए लगातार दो चुनाव जीत चुका है. कांग्रेस के लिए बीजेपी को रोकना बड़ी चुनौती तो है ही, राहुल गांधी इसी कड़ी में भारत जोड़ो यात्रा निकाल चुके हैं. लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव हैं. इनमें मध्यप्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक प्रमुख है. इनमें से दो राज्यों में बीजेपी सत्ता में है. वहीं राजस्थान का इतिहास कहता है कि वहां हर पांच साल में सरकार बदलती है, तो कांग्रेस को यहां बीजेपी कठिन चुनौती देने के लिए कमर कस चुका है. राहुल गांधी के लिए ऐसे में ये पहली अग्निपरीक्षा होगी जिन पर वो कितना खरा उतरते हैं ये आने वाले वक्त में पता चलेगा?

राहुल की पहली अग्निपरीक्षा
राजस्थान, मध्य प्रदेश और कर्नाटक में बीजेपी की सीधी टक्कर कांग्रेस से है. हाल ही में पूर्वोत्तर के तीन राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था. वो किसी भी राज्य में सरकार नहीं बना पाई, राहुल गांधी उस दौरान भारत जोड़ो यात्रा में थे और उन्होंने पार्टी के लिए प्रचार नहीं किया था. इस बीच राहुल गांधी अडानी के मुद्दे पर लगातार केंद्र सरकार पर हमला कर रहे हैं और उनके निशाने पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं. इसके अलावा वो लगातार बीजेपी पर विपक्ष को निशाना बनाने और लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगा रहे हैं. ऐसे वो अपनी सांसदी जाने को इससे जोड़ सकते हैं. अब ये देखना होगा कि क्या वो इस रणनीति से मतदाताओं को कांग्रेस से जोड़ सकते हैं या नहीं?

कर्नाटक में क्या हैं चुनौतियां?
कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने 124 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट तैयार कर ली है. पार्टी ने ये फैसला तब लिया है जब चुनाव आयोग ने दक्षिण के इस राज्य में चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं किया है. सूबे में 224 विधानसभा सीटे हैं, ऐसे में 100 सीटों पर अभी उम्मीदवारों का ऐलान नहीं किया गया है. कांग्रेस ने इस बार कर्नाटक में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है. कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस की सरकार के गिरने के बाद बीजेपी ने राज्य में सत्ता हासिल की थी. बीजेपी का फोकस पूरी तरह से कर्नाटक में है, पीएम मोदी एक साल में 6 बार राज्य का दौरा कर चुके हैं.

बीजेपी ने खेला बड़ा दांव
कर्नाटक सरकार ने चुनाव से पहले शुक्रवार को बड़ा दांव खेलेते हुए राज्य के दो समुदायों वोक्कालिगा और लिंयागत का कोटा बढ़ा दिया है. बोम्मई सरकार ने इसके लिए OBC मुसलमानों का मिलने वाला 4 फीसदी कोटा खत्म कर दिया है. दोनों समुदायों के बीच ये कोटा बांटा गया है. बता दें कि साउथ कर्नाटक में वोक्कालिगा और सेंट्रल कर्नाटक में लिंगायत निर्णायक भूमिका में रहते हैं. साउथ कर्नाटक की बात करें तो बीजेपी को 15 और कांग्रेस को 20 सीटें मिली थी. जेडीएस ने यहां 30 सीटें जीती थीं. राहुल गांधी कैसे इन चुनौतियों से निपटते हैं ये देखना होगा. भारत जोड़ो यात्रा के दौरान वो दक्षिणी कर्नाटक से कई जिलों से गुजरे थे. कर्नाटक में भ्रष्टाचार का एक मुख्य मुद्दा है, चुनाव में इसे भुनाना भी उनके लिए बड़ी चुनौती होगी.

राहुल शिवराज को दे पाएंगे चुनौती?
मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने बीजेपी से 15 साल बाद साल 2018 में हराकर सत्ता वापस ली थी. लेकिन कमलनाथ की अगुवाई वाली सरकार 15 महीने भी नहीं चल पाई.ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत के बाद पार्टी में फूट पड़ी और सिंधिया गुट के कई विधायक बीजेपी में शामिल हो गए. 24 मार्च 2020 को शिवराज फिर से सीएम बने. राहुल गांधी के लिए इस बार यहां पार्टी को जीत दिलाने की चुनौती होगी. इस बार भी एंटी इनकंबेंसी चुनाव में मुख्य मुद्दा होगी.

मध्य प्रदेश में आप ने फोकस कर रखा है, ऐसे में उससे निपटना भी राहुल के लिए चुनौती होगी. एक तरफ जहां राहुल की विधायिकी जाने के बाद दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल खुलकर राहुल के सपोर्ट में आए, लेकिन चुनाव में केजरीवाल कांग्रेस पर हमलावर होंगे इसमें संदेह नहीं है. राहुल के लिए पार्टी की अंदरुनी गुटबाजी से निपटना भी बड़ी चुनौती होगी.

राजस्थान में कांग्रेस रचेगी इतिहास?
कर्नाटक, राजस्थान और मध्य प्रदेश में से राजस्थान में ही कांग्रेस की सरकार बची है. सीएम अशोक गहलोत की अगुवाई में यहां कांग्रेस की सरकार है. लेकिन राजस्थान में कांग्रेस को दोबारा सत्ता में लाना राहुल के लिए बिल्कुल आसान नहीं होगा. राजस्थान के सियासी इतिहास पर नजर डालें तो यहां हर पांच साल बाद सरकार बदलती है. इसके अलावा पायलट-गहलोत के बीच कितने गतिरोध हैं. ये किसी से छिपा नहीं है. इस बार राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है, ऐसे में पार्टी को सत्ता विरोधी लहर से बचाना भी उनकी चुनौती है. राजस्थान में भर्ती के दौरान कई बार पेपर लीक हुए हैं, ऐसे में बेरोजगारी के मुद्दे पर वो कैसे राजस्थान के युवाओं को पार्टी के साथ लाएंगे ये देखना भी दिलचस्प होगा. साल 2024 के दंगल से पहले राहुल के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी कि वोटरों का मोह बीजेपी से तोड़ सके और कांग्रेस में नई जान फूंकें.

 

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