नई दिल्ली: ‘मोदी सरनेम’ वाले बयान से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को झटका लगा है. सूरत की एक सत्र अदालत ने इस मामले में दोषी ठहराए जाने के फैसले पर रोक लगाने की राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आर. पी. मोगेरा की अदालत में राहुल ने मजिस्ट्रेट अदालत के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी. अगर आज सत्र न्यायाधीश की अदालत से 52 वर्षीय राहुल को राहत मिलती तो उनकी लोकसभा की सदस्यता बहाल होने का रास्ता साफ हो सकता था. ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि राहुल गांधी के सामने अब अन्य कानूनी विकल्प क्या हैं. क्या उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा?
इसी सवाल का जवाब जानने के लिए हमने सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता से बात की. एडवोकेट विराग का कहना है कि राहुल गांधी के वकीलों ने तीन अप्रैल को सत्र अदालत में दो याचिकाएं दाखिल की थीं. एक सजा पर रोक के लिए और दूसरा अपील के निस्तारण तक दोषी ठहराये जाने पर स्थगन के लिए था. राहुल गांधी 2019 के लोकसभा चुनाव में केरल के वायनाड से सांसद बने थे. गत 23 मार्च को सूरत की एक अदालत ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक पूर्णेश मोदी द्वारा दायर आपराधिक मानहानि के मामले में राहुल गांधी को दोषी करार दिया था और दो साल के कारावास की सजा सुनाई थी, जिसके एक दिन बाद उन्हें लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य करार दिया गया. अदालत ने राहुल को जमानत देते हुए शिकायतकर्ता पूर्णेश मोदी और राज्य सरकार को नोटिस जारी किए थे. उसने पिछले बृहस्पतिवार, 13 अप्रैल को दोनों पक्षों को सुना और फैसला 20 अप्रैल तक के लिए सुरक्षित रख लिया था.
निचली अदालत ने कांग्रेस नेता को कर्नाटक के कोलार में 2019 के दौरान एक चुनावी रैली में की गई उनकी टिप्पणी ‘सभी चोरों का मोदी उपनाम कैसे हो सकता है’ के लिए दोषी ठहराते हुए दो साल कैद की सजा सुनाई थी.
गुरुवार के फैसले के बाद राहुल गांधी को गिरफ्तार किए जाने की संभवना के बारे में एडवोकेट विराग गुप्ता बताते हैं कि ऐसा फिलहाल तीन मई तक नहीं होगा. दरअसल, सूरत सेशन कोर्ट ने पहले ही राहुल की सजा पर रोक वाली याचिका को स्वीकार कर उन्हें अंतरिम जमानत दे दी है. राहुल की मिली जमानत तब तक कायम रहेगा जब तक कि सजा पर रोक वाली याचिका पर फैसला न आ जाए.
हाईकोर्ट का विकल्प?
अब दूसरा सवाल यह है कि सत्र अदालत के आज के फैसले का राहुल गांधी के लिए क्या मायने हैं. सत्र अदालत ने आज दोषसिद्धि पर रोक वाली याचिका खारिज कर दी है. विराग गुप्ता बताते हैं कि यह फैसला राहुल गांधी के लिए एक झटका है. दोषसिद्धि पर स्टे वाली याचिका खारिज होने की वजह से राहुल गांधी की सांसदी फिलहाल बहाल होती नहीं दिख रही है. लोक प्रहरी बनाम भारत निवार्चन आयोग के केस में सुनाए गए फैसले के मुताबिक राहुल गांधी तब तक दोबारा से संसद नहीं बन सकते हैं, जब तक कि उनके दोषसिद्धि पर स्टे नहीं लग जाता है. ऐसे में अब आगे राहुल गांधी के पास एक ही विकल्प है. उनको हाईकोर्ट जाना होगा.
सत्र अदालत के फैसले के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का ऐलान कर दिया है. 21 अप्रैल को कांग्रेस उच्च अदालत जाएगी. एडवोकेट गुप्ता बताते हैं कि राहुल गांधी की तरफ से हाईकोर्ट में दो आवेदन दिए जा सकते हैं. इसमें वह सजा पर रोक यानी स्टे की मांग के साथ-साथ दोषसिद्धि पर रोक यानी कन्विक्शन पर स्टे की अपील कर सकते हैं.
राहुल गांधी को फिलहाल अंतरिम जमानत मिली है. ऐसे में वह स्थायी जमानत और सजा कम कराने के लिए हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं. इसके अलावा दोषी ठहराए जाने के खिलाफ सूरत सेशन कोर्ट के फैसले को भी चुनौती देंगे. ताकी उनकी संसदी फिर से बहाल हो जाए.
