नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम-ईबस (PM-eBus) सेवा नाम से एक योजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य भारत में निर्बाध हरित गतिशीलता को बढ़ावा देना है. इस योजना के तहत 100 से अधिक शहरों में पीपीपी (Public-Private Partnership) मॉडल पर करीब 10 हजार इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो केंद्र सरकार ने इसके लिए 57,613 करोड़ रुपये का बजट रखा है. केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के मुताबिक करीब 168 शहरों में इस योजना को शुरू करने की तैयारी है. केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि जो शहर इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, उन्हें इसके लिए चरणबद्ध तरीके से आवेदन करना होगा.
किन शहरों को किया गया शामिल?
अब सवाल ये है कि आखिर कौन-कौन से शहर इस योजना का लाभ ले पाएंगे. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जिन शहरों की आबादी 3 लाख से 40 लाख के बीच है और उनके पास सही बस सेवा नहीं है. ऐसे शहरों को पीएम-ईबस सेवा में प्राथमिकता दी जाएगी. सबसे पहले शहरों में बुनियादी ढ़ाचों का विकास किया जाएगा. इसके बाद शहरों को इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू की जाएगी. बुनियादी ढांचों में ई-बसों के लिए चार्जिंग स्टेशन, स्वचालित किराया संग्रह प्रणाली (Automatic Fare Collection System) और मल्टीमॉडल इंटरचेंज सुविधा के अलावा कई अन्य जरूरी चीजों को रखा गया है.
इस योजना को सक्सेस करने के लिए सरकार सब्सिडी भी देगी. ताकी ई-बस के किराए को यात्रियों के लिए कम रखा जा सके. पीएम-ईबस सेवा शुरू होने के बाद करीब 55 हजार लोगों को नौकरी मिलेगी. मंत्री अनुराग ठाकुर के मुताबिक ऐसे शहर जिनकी आबादी 5 लाख से कम है, वहां पर करीब 50 ई-बसें चलाई जाएंगी. जिस शहर की आबादी 5 लाख से अधिक और 20 लाख से कम है वहां पर 100 ई-बसों को चलाया जाएगा. ऐसे शहर जहां की आबादी 20 लाख से अधिक और 50 लाख से कम है वहां पर 150 ई-बसें चलाई जाएंगी.
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो देशभर में ई-बसों को चलाने का लक्ष्य 2037 तक तय किया गया है, जिसके लिए कुल बजट 20 हजार करोड़ रुपये तय किया गया है. हालांकि, इस योजना के लिए राज्य सरकार को 37,613 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे. बता दें कि इस योजना का हिस्सा बनने वाले शहरों से डीजल बसों को हटा दिया जाएगा. इसके साथ ही बिजली से चलने वाली इलेक्ट्रिक बसों को सड़कों पर उतारा जाएगा. जेबीएम ऑटो के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक निशांत आर्य का कहना है कि देश के मुख्य शहरों के साथ केंद्र शासित राज्यों और पूर्वोत्तर में करीब 10 हजार इलेक्ट्रिक बसों को उतारा जाएगा. यह योजना सार्वजनिक हरित परिवहन को बढ़वा देगी और पर्यावरण के लिए भी ठीक रहेगी.
