नई दिल्ली: आईआईटी रोपड़ की टीम ने सतलज में टैंटलम धातु ढूंढ निकाला है.आईआईटी रोपड़ की टीम ने सतलज में टैंटलम धातु ढूंढ निकाला है. टैंटलम बहुत महंगी और दुर्लभ धातु है. यह इतना लचीला होता है कि इसे सोने की तरह किसी भी आकर में तब्दील कर सकते हैं.
आईआईटी रोपड़ ने पंजाब में सतलज नदी की रेत में टैंटलम (Tantalum) खोज निकाला है. यह बहुत दुर्लभ धातु है. आईआईटी के सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की प्रोफेसर रश्मि सेबेस्टियन की अगुवाई में एक टीम रिसर्च कर रही थी. इसी दौरान उन्होंने टैंटलम का पता लगाया. एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह टैंटलम रेयर तो है ही, साथ ही बहुत बहुमूल्य भी है और भारत के खजाने को मालामाल कर सकती है.
क्या है टैंटलम?
टैंटलम (Tantalum) एक दुर्लभ धातु है, जिसका एटॉमिक नंबर 73 है. यह नंबर किसी परमाणु में प्रोटॉन की संख्या को दर्शाता है. टैंटलम ग्रे कलर का होता है. वजन में बहुत भारी और ठोस होता है. सबसे महत्वपूर्ण बात है यह कि यह जंग रोधी धातु है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक जब टैंटलम हवा के संपर्क में आता है तो अपने आसपास ऑक्साइड की एक परत बना लेता है, जिसे हटाना बहुत मुश्किल है.
अमेरिकी उर्जा विभाग से जुड़े एक्सपर्ट्स के मुताबिक टैंटलम (Tantalum) ऐसा मेटल है जो 150 डिग्री सेल्सियस तापमान से नीचे भी, किसी केमिकल अटैक से पूरी तरह सुरक्षित रहता है. इस पर कोई असर नहीं होता. टैंटलम की एक और खासियत यह है कि ये इतना लचीला होता है कि इसे सोने की तरह किसी भी आकर में तब्दील कर सकते हैं.
पहली बार कब हुई इसकी खोज?
साल 1802 में स्वीडन के वैज्ञानिक एंटर्स गुस्ताफ एकेनबर्ग (Anders Gustaf Ekenberg) द्वारा पहली बार टैंटलम की खोज की गई थी. पहली बार लगा कि गुस्ताफ ने नियोबियम (Niobium) की खोज की है, जो एक तरीके से टैंटलम जैसा ही दिखता है. बाद में साल 1866 में स्वीडन के एक और वैज्ञानिक जीन चार्ल्स (Jean Charles Galissard de Marignac) ने यह गुत्थी सुलझाई और बताया कि नियोबियम और टैंटलम दो अलग-अलग धातु हैं.
