वक्फ बिल को लेकर क्या हैं विवाद, जिस पर विपक्ष ने कर रखा है बवाल!

नई दिल्ली: वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 बुधवार को निचले सदन लोकसभा में पेश होगा. इस पर चर्चा के लिए स्पीकर ओम बिरला ने 8 घंटे का समय निर्धारित किया है. वक्फ अधिनियम, 1995 में पहली बार संशोधन नहीं किया जा रहा है. इस कानून में 2013 में यूपीए की सरकार के समय भी संशोधन हुए थे. बिल पर बहस के लिए सत्ताधारी गठबंधन को 4 घंटे 40 मिनट का समय दिया गया है. लोकसभा में बहस के लिए भाजपा, कांग्रेस, जदयू, टीडीपी समेत पार्टियों ने अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी कर दिया है.

मंगलवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दोहराया कि सरकार बिल पर चर्चा चाहती है और इस पर सभी राजनीतिक दलों को बोलने का अधिकार है. देश भी जानना चाहता है कि किस पार्टी का क्या स्टैंड है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर विपक्ष चर्चा में शामिल नहीं होना चाहता तो ऐसा रोकने से उन्हें कोई रोक भी नहीं सकता.

क्यों ला रही है सरकार वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024?

वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 के उद्देश्यों और कारणों के विवरण में कहा गया है कि वर्ष 2013 में अधिनियम में व्यापक संशोधन किए गए थे. इसमें आगे कहा गया है, “संशोधनों के बावजूद, यह देखा गया है कि राज्य वक्फ बोर्डों की शक्तियों, वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण और सर्वेक्षण, अतिक्रमणों को हटाने, वक्फ की परिभाषा सहित संबंधित मुद्दों को प्रभावी ढंग से संबोधित करने के लिए अधिनियम में अब भी और सुधार की आवश्यकता है.”

इसमें कहा गया है कि 2013 में अधिनियम में संशोधन न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) राजिंदर सच्चर की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों और वक्फ और केंद्रीय वक्फ परिषद पर संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर और अन्य हितधारकों के साथ विस्तृत परामर्श के बाद किया गया था. विधेयक 2024 का एक प्रमुख उद्देश्य वक्फ अधिनियम, 1995 का नाम बदलकर एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995 करना है.

वक्फ बिल में 40 बदलावों का प्रस्ताव

बता दें, केंद्र सरकार वक्फ बोर्ड एक्ट में करीब 40 बदलाव करना चाहती है. एक अहम बदलाव वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों का प्रवेश हो सकता है. इसका मकसद महिलाओं और अन्य मुस्लिम समुदाय की सहभागिता को बढ़ाना है. साथ ही नए बिल में बोर्ड पर सरकार का नियंत्रण बढ़ाया जा सकता है. विधेयक पर चर्चा और उसके बाद उसे मंजूरी मिलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार द्वारा निचले सदन में एनडीए की संख्यात्मक श्रेष्ठता का दावा करने के लिए शक्ति प्रदर्शन के अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है.

विरोध में विपक्ष हुआ एकजुट

विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ ने मंगलवार को एकजुटता दिखाते हुए संसद में वक्फ (संशोधन) विधेयक का विरोध करने के लिए संयुक्त रणनीति पर चर्चा की. इस विधेयक को चर्चा और पारित कराने के लिए पहले लोकसभा में लाया जाएगा. विपक्षी दलों ने संसद भवन में बैठक की, जिसमें इस विवादास्पद विधेयक को लेकर रणनीति पर चर्चा की गई. बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और केसी वेणुगोपाल, समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव, राकांपा नेता सुप्रिया सुले, तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी और आप के संजय सिंह शामिल हुए. बैठक में द्रमुक के टी आर बालू, तिरुचि शिवा और कनिमोई, राजद के मनोज कुमार झा, माकपा के जॉन ब्रिटास, भाकपा के संदोष कुमार पी, आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन और वाइको भी उपस्थित थे.

खरगे ने बताया असंवैधानिक

खरगे ने ‘X’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘सभी विपक्षी दल एकजुट हैं और वक्फ संशोधन विधेयक पर मोदी सरकार के असंवैधानिक एवं विभाजनकारी एजेंडे को हराने के लिए संसद के पटल पर मिलकर काम करेंगे.’’

वहीं, गांधी ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि संसद में लोकसभा और राज्यसभा दोनों के विपक्षी नेताओं की बैठक हुई. उन्होंने कहा, ‘‘बैठक के दौरान हमने वक्फ विधेयक पर विस्तृत चर्चा की, जो कल संसद में पेश किया जाएगा.’’

कांग्रेस नेता वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘हमें संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करनी है और यह विधेयक वास्तव में एक लक्षित कानून है. यह असंवैधानिक भी है. हम, ‘इंडिया’ गठबंधन में शामिल दल, जो संविधान में विश्वास करते हैं, विधेयक के खिलाफ मतदान करने जा रहे हैं. यह संविधान का स्पष्ट उल्लंघन है. संविधान में विश्वास रखने वाले लोग निश्चित रूप से इसका विरोध करेंगे.’’

ईसाई समुदाय की भी चिंता

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि ईसाई समुदाय की चर्चों के संबंध में चिंताओं का समाधान किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि मुनंबम वक्फ भूमि विवाद का मुद्दा सुलझ जाए.’’ केरल के एर्नाकुलम जिले में लगभग 400 एकड़ भूमि को लेकर राज्य के वक्फ बोर्ड और भूमि के कब्जाधारकों के बीच विवाद ने तूफान खड़ा कर दिया है.

तृणमूल सांसद बनर्जी ने कहा, ‘‘हम चर्चा और मतदान में भी भाग लेंगे. हम चर्चा करना चाहते हैं लेकिन भाजपा ऐसा नहीं करना चाहती. हम संसद के पटल पर इस मामले पर चर्चा करना चाहते हैं. हम मतदान में भाग लेना चाहते हैं लेकिन भाजपा हमें चर्चा नहीं करने देगी.’’

राजद सांसद झा ने कहा कि अगर भाजपा नीत केंद्र सरकार विपक्ष को दबाने की कोशिश करेगी तो उसे विधेयक वापस लेने पर मजबूर होना पड़ेगा

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