नई दिल्ली : मणिपुर हिंसा मामले को लेकर विपक्ष ने मोदी सरकार के खिलाफ संसद में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। अब इसपर चर्चा होनी है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बुधवार को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया। इसके अलावा तेलंगाना की सत्ताधारी पार्टी बीआरएस ने भी अलग से अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है।
कहा जा रहा है विपक्ष इसके जरिए पीएम मोदी को मणिपुर हिंसा मामले पर संसद में बोलने पर मजबूर करना चाहता है। वहीं, दूसरी ओर सियासी जानकारों का कहना है कि भाजपा ने इस प्रस्ताव के खिलाफ बड़ी तैयारी की है। आइए जानते हैं इसके बारे में सबकुछ…
पहले जानिए विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव क्यों लाया?
वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार सिंह कहते हैं, ‘विपक्ष सरकार को हावी होने का कोई मौका नहीं देना चाहता है। मौजूदा सत्र में वह मांग कर रहा है कि मणिपुर मामले में प्रधानमंत्री सदन में बयान दें। वहीं, सरकार ने कहा है कि गृहमंत्री अमित शाह इस मसले पर बयान देंगे। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव एक ऐसा तरीका है, जिसके जरिए विपक्ष पीएम मोदी को संसद में बुलाने की कोशिश कर रहा है। कुल मिलाकर विपक्ष पीएम मोदी को घेरने की कोशिश में लगा है।’
मोदी को ही घेरने की कोशिश क्यों?
सिंह कहते हैं, ‘अभी पूरी एनडीए का सबसे बड़ा चेहरा पीएम मोदी का है। विपक्ष किसी भी तरह उन्हें ऐसे मुद्दों पर घेरना चाहता है। वहीं, भाजपा भी नहीं चाहती है कि किसी भी तरह से पीएम मोदी इस तरह की विवादों में फंसे।’
संसद में विपक्ष और सरकार के समर्थन में सांसदों की संख्या कितनी है?
भाजपा की अगुआई वाली एनडीए सरकार के पास अभी लोकसभा में 330 से ज्यादा सांसदों का समर्थन है। अकेले भाजपा के 301 सांसद हैं। वहीं, विपक्षी खेमे यानी इंडिया गठबंधन के पास लोकसभा में 142 और राज्यसभा में 96 सांसद हैं। संख्याबल के हिसाब से दोनों सदनों में सत्ता पक्ष मजबूत है।
भाजपा अविश्वास प्रस्ताव से कैसे निपटेगी?
इसे जानने के लिए हमने भाजपा के एक राष्ट्रीय नेता से बात की। उन्होंने कहा, ‘अविश्वास प्रस्ताव में बिल्कुल भी दम नहीं है। उनकी मंशा सिर्फ इतनी है कि संसद का सत्र नहीं चल पाए। वह मणिपुर हिंसा मामले पर चर्चा नहीं करना चाहते हैं, बल्कि विवाद जारी रखना चाहते हैं। हमारी पार्टी विपक्ष की पोल खोलेगी। उनका असली चेहरा पूरे देश के सामने रखा जाएगा। ये सबकुछ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान ही होगा। जनता को बताया जाएगा कि कैसे विपक्षी दल के नेता अलग-अलग राज्यों के लिए चेहरे पर अलग-अलग नकाब लगाकर रखते हैं।’
क्या पीएम मोदी भी भाषण देंगे?
अपनी सरकार के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब प्रधानमंत्री जवाब देंगे। कहा जा रहा है कि इसमें वह दो तरह से विपक्ष को घेर सकते हैं। पहला बंगाल, राजस्थान व गैर भाजपा शासित राज्यों के आंकड़ों और घटनाओं का जिक्र करके और दूसरा भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर। मणिपुर हिंसा का जिक्र करेंगे, लेकिन इससे कहीं ज्यादा वह कांग्रेस के शासन में हुई बड़ी घटनाओं का जिक्र कर सकते हैं।
प्रमोद सिंह कहते हैं, ‘सरकार ये भी कोशिश कर रही है कि संसद में पीएम मोदी के बोलने से पहले मणिपुर की स्थिति काफी हद तक सामान्य हो जाए। इसके लिए सरकार ने हर तरह से प्रयास तेज कर दिए हैं।’
कैसे लाया जाता है अविश्वास प्रस्ताव?
सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाने का भी एक नियम है। इसे नियम 198 के तहत लोकसभा में पेश किया जाता है। इस अविश्वास प्रस्ताव को संसद में पेश करने के लिए करीब 50 सांसदों की जरूरत होती है। अगर संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान 51 प्रतिशत से ज्यादा सांसदों ने इसके पक्ष में मतदान कर दिया तो सरकार मुश्किल में पड़ जाती है। ऐसी स्थिति में सरकार को बहुमत साबित करना होता है।
