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इजरायल-हमास युद्ध : कांग्रेस को समझ आई गलती तो डैमेज कंट्रोल में जुटे नेता

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
14/10/23
in राष्ट्रीय, समाचार
इजरायल-हमास युद्ध : कांग्रेस को समझ आई गलती तो डैमेज कंट्रोल में जुटे नेता
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नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने इजरायल पर हमास के हमले के बाद जिस तरह फिलिस्तीन के समर्थन में प्रस्ताव पास किया, उसे पार्टी के अंदर भी एक वर्ग ने पसंद नहीं किया। मायूस नेताओं के इस वर्ग का ऐतराज सिर्फ इतना है कि आखिर इजरायल के निर्दोष नागरिकों के साथ हमास ने जो बर्बरता की, उस पर कांग्रेस पार्टी के प्रस्ताव में कुछ क्यों नहीं कहा गया? ध्यान रहे कि कांग्रेस पार्टी की कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने सप्ताह की शुरुआत में एक प्रस्ताव जारी किया था, जिसमें आतंकवादी हमले की निंदा करना तो दूर, हमास का जिक्र तक नहीं किया गया। इस कदम ने कांग्रेस के एक धड़े में बेचैनी पैदा कर दी है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, एक आंतरिक जांच चल रही है कि प्रस्ताव कैसे तैयार और जारी किया गया।

पवन खेड़ा ने संभाला मोर्चा, भूल सुधार में जुटे

शुक्रवार को कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सीडब्ल्यूसी के प्रस्ताव का सीधा उल्लेख किए बिना हमास का इजरायली नागरिकों पर हमले की साफ शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस हमास के इजरायल के निर्दोष नागरिकों पर हमले की स्पष्ट रूप से निंदा करती है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘हमारा हमेशा से मानना रहा है कि आत्म-सम्मान, समानता और गरिमा के जीवन के लिए फिलिस्तीन के लोगों की वैध आकांक्षाओं को केवल इजरायल के लोगों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली बातचीत और बातचीत की प्रक्रिया के माध्यम से पूरा किया जा सकता है।’

खेड़ा के बयान से पहले पार्टी के मीडिया हेड जयराम रमेश ने भी इजरायलियों पर ‘क्रूर हमलों’ की निंदा की थी, लेकिन वो हमास को आतंकी बताने से बचे। खेरा ने आगे इजरायल के लोगों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने के साथ ही बातचीत के माध्यम से फिलिस्तीनियों की वैध मांगों को भी पूरा किए जाने की वकालत की। यह जयराम रमेश ही थे जिन्होंने शुरू में बहुत महीनी दिखाई। उन्होंने खास तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान की आलोचना नहीं की जिसमें उन्होंने कठिन समय के दौरान इजरायल के साथ भारत की एकजुटता व्यक्त की थी, जो कांग्रेस के रुख में बदलाव को दर्शाता है। इससे पहले, पार्टी ने फिलिस्तीनियों की कीमत पर इजरायल का पक्ष लेने के लिए सरकार की आलोचना की थी।

उधर, पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने सुझाव दिया कि हिंसा को समाप्त करने के साथ ही रमेश के बयान और सीडब्ल्यूसी के प्रस्ताव दोनों पर एक साथ विचार किया जाना चाहिए। चिदंबरम ने शुरू में इजरायल का समर्थन करने और बाद में फिलिस्तीनियों के अधिकारों की बात करने के लिए भाजपा की आलोचना की। उन्होंने कहा कि भाजपा इजरायल-फिलिस्तीन के मुद्दे पर पाला बदल रही है।

सीडब्ल्यूसी की मीटिंग में हुआ क्या था?

वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के बयानों से संकेत मिल रहा है कि सीडब्ल्यूसी ने संघर्ष पर चर्चा करके एक संक्षिप्त प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया था और इसे सदस्यों को देने से पहले संशोधित किया था। पार्टी के भीतर मतभेदों को दूर करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रस्ताव पारित नहीं करने का फैसला किया, इसके बजाय जाति जनगणना की मांग पर चर्चा पर ध्यान केंद्रित करने का विकल्प चुना। इस फैसले को राहुल गांधी सहित पार्टी के वरिष्ठ सदस्यों का समर्थन मिला। अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट द इंडियन एक्सप्रेस पर प्रकाशित एक लेख में कांग्रेस सूत्र के हवाले कहा गया है, ‘यहां तक कि इस पर (खरगे के फैसले का स्वागत करते हुए) मेज की गड़गड़ाहट भी हुई। राहुल गांधी ने भी इस फैसले से सहमति जताते हुए मेज थपथपाई।’

कांग्रेस के अंदर पर कांग्रेस के अंदर खेमेबंदी

कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि प्रस्ताव को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए था। उन्होंने स्वीकार किया, ‘हम नहीं जानते कि यह कैसे हुआ और किसने किया।’ जबकि कुछ कांग्रेस नेताओं ने स्वीकार किया कि ‘यह (सीडब्ल्यूसी प्रस्ताव) प्रचलित दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व नहीं करता था, कुछ शरारत की गई थी और प्रस्ताव जारी किया गया था। कई अन्य कांग्रेसियों ने भी इसे गलत करार दिया। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘गलती या शरारत, (हमास की निंदा नहीं करना) हमारा रुख नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘आतंकवादी हमला, आतंकवादी हमला है। ऐसा कोई तरीका नहीं है जिससे पार्टी नागरिकों पर हमले को माफ कर सके।’

भारत-इजरायल संबंधों की मजबूती और कांग्रेस का रुख

बीते कुछ वर्षों में इजरायल और अमेरिका के साथ भारत के संबंध गहरे हुए हैं, जिससे कांग्रेस को अपना स्टैंड बदलना पड़ा है। इजरायल के साथ पार्टी के प्रारंभिक राजनयिक संबंध 1992 में प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव ने स्थापित किए थे। यहां तक कि फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (पीएलओ) के नेता यासिर अराफात ने भारत की यात्रा की थी। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में I2U2 समूह और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे के गठन के साथ इजरायल के साथ भारत के संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंचे।

देर से सही, दुरुस्त आए

शुक्रवार को कांग्रेस का भूल सुधार न केवल ‘कभी नहीं से बेहतर देर से’ दृष्टिकोण का संकेत देता है, बल्कि सत्तारूढ़ दल और मुख्य विपक्षी दल के बीच आम सहमति के एक दुर्लभ क्षण का भी प्रतिनिधित्व करता है, जिससे एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर विभाजन का दौर खत्म होता है। हालांकि कांग्रेस के भीतर आंतरिक सहमति मुश्किल हो सकती है, लेकिन भाजपा के साथ साझा रुख आज के राजनीतिक परिदृश्य में थोड़ा अलग तो है।

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