दुनिया के किन देशों के संसद में है महिलाओं के लिए आरक्षण?

नई दिल्ली: भारत की संसद के लिए  महिला आरक्षण बिल लोकसभा में पेश कर दिया गया है.  वैसे तो यह मुद्दा कुछ दशकों से चला आ रहा है और इसे सबसे पहले संसद में 27 साल पहले पेश किया गया, इस बार उम्मीद है कि यह बिल पास हो जाएगा. बिल के मसौदे को देखते हुए विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे हैं कि यह साल 2026 से पहले लागू नहीं हो सकेगा. लेकिन नया बिल पेश होने के बाद यह तय हो गया है कि भारत दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जहां देश के उच्च लोकतांत्रिक प्रतिनिधि मंडल में महिलाओं के लिए आरक्षित किया है जिसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश तक शामिल हैं. .

दुनिया और भारत आज का प्रतिनिधित्व

दुनिया के कई देश हैं जहां महिलाओं के लिए वहां की संसद में आरक्षण हैं. लेकिन अगर केवल  महिलाओं की उपस्थिति ही बात की जाए तो महिलाओं की संसंद में प्रतिनिधित्व के लिहाज से (प्रतिशत में) भारत की 185 देशों में आज 141वीं रैंक है. यह 15 फीसदी आंकड़े वैश्वित औसत से कापी कम तो है ही, बल्कि हमारे पड़ोसी पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से भी कम है.

कई देशों में ही 50 फीसदी आरक्षण

दुनिया के कई देशों में महिलाओं के लिए संसद में 50 फीसदी से के आरक्षण का प्रावधान है. इसमें फ्रांस, दक्षिण कोरिया और नेपाल शामिल हैं. इनमें नेपाल और अर्जेंटीना ने तो 1990 के दशक में ही प्रयास शुरू कर दिए थे. आज अर्जेंटीना, मैक्सिको और कोस्टा रिका जैसे देशों की संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 36 प्रतिशत से अधिक हो गया है.

पाकिस्तान में महिला आरक्षण

पाकिस्तान में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए वहां की सरकारों ने समय समय  पर कदम उठाए हैं. 1956 में  पाकिस्तान की एस सदनीय संसद में दस सीटें महिलाओं क लिए आरक्षित थीं जिनमें से पांच पूर्वी तो पांच पश्चिमी पाकिस्तान के लिए आरक्षित थीं. 1962 के पाकिस्तान के संविधान में नेशनल असेंबली में महीलाओं के लिए छह सीटों का प्रावधान रखा गया था.

बढ़ता रहा प्रतिनिधित्व

लेकिन समय समय पर पाकिस्तान में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाता रहा. बांगलादेश बनने से पूर्वी पाकिस्तान का अस्तित्व खत्म हो गया और 1973 में नेशनल असेंबली में दस सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी गईं जिसे 985 में 20 सीटें कर दिया गया था. 2002 में जनरल परवेज मुशर्रफ सरकार ने यह संख्या बढ़ा कर 33 फीसदी कर दी थी और तब से ये संख्या 17 फीसदी है.

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