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भारत के राफेल-सुखोई के बदले चीन के पास कौन-कौन से लड़ाकू विमान

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
15/12/22
in अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय
भारत के राफेल-सुखोई के बदले चीन के पास कौन-कौन से लड़ाकू विमान
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बीजिंग: भारत और चीन के बीच जारी सीमा तनाव एक बार फिर भड़क गया है। इस बार चीन ने लद्दाख की जगह पूर्वोत्तर के अरुणाचल प्रदेश में हिमाकत की है। भारतीय सेना के सजग जवानों ने चीनी सैनिकों के घुसपैठ को विफल कर दिया। इस दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प भी हुई। हाल में ही खबर आई है कि चीन ने 2017 के विवादित स्थल डोकलाम के पास एक नए पुल और कुछ स्थायी सैन्य ठिकानों का निर्माण किया है। लद्दाख के डेपसांग से भी चीनी ब्रिगेड हेडक्वार्टर के निर्माण की खबरें आ रही हैं। ऐसे में भारत ने लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक चीन से लगी सीमा पर गश्त बढ़ा दी है। भारतीय वायु सेना ने भी तेजपुर एयरबेस से सुखोई एसयू-30एमकेआई और पश्चिम बंगाल के हाशिमारा एयर फोर्स स्टेशन से राफेल लड़ाकू विमानों की उड़ान को बढ़ा दिया है। ये विमान चीन से लगी सीमा पर जबदस्त हवाई गश्त लगा रहे हैं।

भारत ने क्यो तैनात किए लड़ाकू विमान

भारत के राफेल और सुखोई एसयू-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों की गश्त बॉर्डर से लगे चीनी एयरफोर्स बेसों पर बढ़ती हलचल के बाद तेज की गई है। चीन आक्रामक तरीके से अपने लड़ाकू विमानों को भारतीय सीमा के नजदीक उड़ा रहा है। इतना ही नहीं, चीनी हेलीकॉप्टर और ड्रोन भी सीमा से काफी नजदीक उड़ान भर रहे हैं। ऐसे में भारत को भी अपनी हवाई सीमा की सुरक्षा में लड़ाकू विमानों को तैनात करना पड़ा है। शी जिनपिंग के तीसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद पूरे चीन में उनके खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि चीनी सरकार को विरोध के आगे मजबूरी में जीरो कोविड पॉलिसी के कई प्रावधानों में ढील देनी पड़ी थी। इस कारण जिनपिंग और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी भारत के साथ सीमा पर तनाव बढ़ाकर पूरे देश में राष्ट्रवाद का छद्म माहौल खड़ा करना चाहती है। इससे लोगों का ध्यान भारत-चीन विवाद की ओर मुड़ जाएगा।

चीन के पास कौन-कौन से लड़ाकू विमान
चीन के पास दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी वायु सेना है। चीनी वायु सेना में स्ट्रैटजिक बॉम्बर्स के साथ स्टील्थ तकनीक से लैस लड़ाकू विमान और ड्रोन शामिल हैं। चीन ने दक्षिण चीन सागर में बढ़ते विवाद को देखते हुए अपने बॉम्बर्स और लड़ाकू विमानों को एयरक्राफ्ट कैरियर किलर मिसाइलों से लैस कर दिया है। ये मिसाइलें एयर लॉन्च होने के कारण लंबी दूरी तक बिना डिटेक्ट हुए मार कर सकती हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में चीनी वायु सेना और नौसेना के पास कुल 2,800 विमान हैं। इनमें ड्रोन और ट्रेनर विमान शामिल नहीं हैं। चीनी विमानों के बेड़े में लगभग 2,250 डेडिकेटेड कॉम्बेट एयरक्राफ्ट हैं, जिनमें 1,800 लड़ाकू विमान शामिल हैं। चीनी वायु सेना के बास चौथी पीढ़ी के लगभग 800 लड़ाकू विमान हैं। चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों में स्टील्थ कैपिसिटी नहीं होती है, हांलाकि ये मनुवरेबल ज्यादा होते हैं। चीनी वायु सेना ने खुद को आक्रामक और रक्षात्मक भूमिका के लिए तैयार किया है। वह खुद को लंबी दूरी तक मार करने वाली हवाई ताकत के तौर पर विकसित कर रही है।

जे-11 लड़ाकू विमान

चीनी वायु सेना का जे-11 रूसी सुखोई एसयू-27 की लाइसेंस कॉपी है। चीन ने 1992 से 2015 के बीच रूस से कई Su-27, Su-30MKK, और Su-35 लड़ाकू विमान खरीदे थे। जे-11 विमान 30एमएम की गन से लैस होता है। इसमें मिसाइलों के लिए 10 हार्डपाइंट्स बने होते हैं, जिनमें अलग-अलग क्षमता की मिसाइलों को लगाया जा सकता है। यह लड़ाकू विमान 2 मैक की टॉप स्पीड से लगभग 60000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। चीन ने 2004 में जे-11 को बनाना बंद कर दिया है। अब इसका एक अपग्रेडेड वेरिएंट जे-11बी को बनाया जा रहा है। वर्तमान में चीनी वायु सेना और नौसेना में कुल 297 जे-11 विमान तैनात हैं।

जे-16 लड़ाकू विमान

चीन का जे-16 लड़ाकू विमान रूसी सुखोई 30एमकेके की कॉपी है। चीन ने जे-16 को 2015 में चीनी वायु सेना में शामिल किया था। इसे जे-11 का अपग्रेडेड वेरिएंट बताया जाता है। जे-11 एयर सुपीरियॉरिटी वाला लड़ाकू विमान है, जबकि जे-16 एक मल्टीरोल फाइटर जेट है। इस लड़ाकू विमान में 30मिमी का गन भी लगा हुआ है. इसके अलावा इसमें मिसाइलों को लगाने के लिए 12 हार्डपाइंट्स बने हुए हैं। इसमें दुश्मन के ठिकानों और लक्ष्यों को ढूंढने के लिए एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्केन्ड एरे रडार लगाया गया है। वर्तमान में चीनी वायु सेना और नौसेना में जे-16 के 150 से भी ज्यादा यूनिट तैनात हैं।

जे-10 लड़ाकू विमान
चीनी वायु सेना के पास सबसे ज्यादा संख्या में जे-10 लड़ाकू विमान हैं। यह विमान इजरायल के आईएआई लवी की कॉपी है। चीन ने इसे 2005 में पहली बार पेश किया था। जे-10 भारत के तेजस के जैसे डेल्टा विंग, कैनार्ड डिजाइन वाला सिंगल-इंजन मल्टीरोल फाइटर जेट है। जे-10 में 11 हार्डपॉइंट, एक एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्केन्ड एरे रडार और एक 23 एमएम की गन लगाई गई है। यह लड़ाकू विमान मैक 2 की स्पीड से लगभग 60,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। जे-10 की 488 यूनिट चीनी वायु सेना और नौसेना के एविएशन विंग में तैनात हैं।

जे-15 लड़ाकू विमान

जे-15 एक एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़ान भरने में सक्षम एयरक्राफ्ट है। चीन ने इसे यूक्रेन से खरीदे गए सुखोई एसयू-33 के अधूरे प्रोटोटाइप को विकसित कर बनाया है। वर्तमान में चीनी नौसेना में 34 J-15 लड़ाकू विमान मौजूद हैं। ये चीन के दो एयरक्राफ्ट कैरियर्स पर से ऑपरेट होने वाले एकमात्र फिक्स्ड-विंग विमान हैं। चीन के पास एयरक्राफ्ट कैरियरों की बढ़ती संख्या के कारण इन विमानों का उत्पादन बढ़ाया जा रहा है। यह विमान अपनी कैटेगरी में काफी भारी है, ऐसे में चीन के दो स्की जंप वाले एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़ान भरने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह विमान कभी भी अपने पूरे ईंधन और हथियारों के साथ उड़ान नहीं भर पाता है।

जे-20 लड़ाकू विमान
चीन के पास पांचवी पीढ़ी का जे-20 लड़ाकू विमान भी है। यह विमान स्टील्थ तकनीक से लैस है। चीन पूरी दुनिया में अमेरिका के बाद दूसरा ऐसा देश है, जिसने पूरी तरह स्टील्थ तकनीक से लैस पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने का दावा किया है। हालांकि, रूस का भी दावा है कि उसका एसयू-57 पांचवी पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है। J-20 की बेसिक रेंज 1,200 किलोमीटर है जिसे 2,700 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है। यह लड़ाकू विमान 66000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है।

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