बीएसएफ जवानों को क्यों मिली सरकारी आवास खाली करने की धमकी!

नई दिल्ली: सीमा सुरक्षा बल ‘बीएसएफ’ की पंजाब से जुड़ी यूनिटों में जारी हुआ एक ‘सख्त’ आदेश चर्चा का विषय बना हुआ है। खासतौर पर, सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक, यह आदेश देखकर हैरान हैं। वजह, यह आदेश सीधे तौर पर उनके परिवार यानी मां बाप, पत्नी और बच्चों से जुड़ा है। आदेश में एक तरह से धमकी दी गई है, अगर बीएसएफ वाइव्ज वेलफेयर एसोसिएशन, (बावा) द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में जवानों के परिजन शामिल नहीं होते हैं तो तत्काल प्रभाव से उनका सरकारी आवास खाली करा लिया जाएगा। ‘बावा’ अध्यक्ष की जिम्मेदारी बीएसएफ महानिदेशक की पत्नी के पास होती है। यह संस्था, बल में विभिन्न तरह की कल्याणकारी गतिविधियां संचालित करती है।

कहां से जारी हुआ है परिपत्र …

इस बाबत पहला परिपत्र (सर्कुलर) उप महानिरीक्षक कार्यालय, क्षेत्रीय मुख्यालय फिरोजपुर, पंजाब से 11 सितंबर को जारी हुआ है। इसके एक दिन बाद ही मुख्यालय पंजाब सीमान्त, सीमा सुरक्षा बल, जालंधर पंजाब की प्रशासन शाखा से भी वही परिपत्र (सर्कुलर) जारी हो गया। दोनों परिपत्रों में एक ही बात कही गई है। परिपत्र के मुताबिक, मुख्यालय परिसर में अगर बीएसएफ वाइव्ज वेलफेयर एसोसिएशन, (बावा) द्वारा कोई भी कार्यक्रम आयोजित किया जाता है तो परिसर के सरकारी आवासों में रहने वाले परिवारों की उपस्थिति बहुत कम संख्या में दिखती है।

तत्काल प्रभाव से आवास खाली कराने की धमकी …

परिपत्र के अनुसार, सक्षम अधिकारी का निर्देश है कि भविष्य में आयोजित किए जाने वाले हर ‘बावा’ कार्यक्रम में इस परिसर के सरकारी आवासों में रहने वाले एवं परिसर के बाहर रहने वाले सभी कार्मिकों के परिवारों का शामिल होना अनिवार्य है। प्वाइंट नंबर 2 में कहा गया है कि इस मुख्यालय द्वारा आयोजित किए गए किसी भी ‘बावा’ कार्यक्रम में कार्मिक का परिवार एवं जो कार्मिक किसी भी मुख्यालय वाहिनी में पदस्थ हैं, जिनका परिवार इस मुख्यालय के सरकारी आवास में रहता है, उसे कार्यक्रम में शामिल होना पड़ेगा। अगर वह परिवार, बावा कार्यक्रम में शामिल नहीं होता तो इस परिसर में आवंटित सरकारी आवास को तत्काल प्रभाव से खाली करवाया जाएगा। इस संबंध में सभी शाखा प्रभारियों को निर्देश दिया जाता है कि उनके दायरे में कार्यरत कार्मिकों को, जो इस मुख्यालय में अपने परिवारों के साथ रहते हैं, उपरोक्त विषय के बारे में जानकारी दें और बावा कार्यक्रमों में उपस्थित होना सुनिश्चित करें।

‘एनजीओ’ के तौर पर है ‘बावा’ की लीगल पहचान … 

इस संबंध में बीएसएफ अधिकारी का कहना है कि बीएसएफ वाइव्ज वेलफेयर एसोसिएशन ‘बावा’, की लीगल पहचान केवल एक पंजीकृत गैर सरकारी संगठन ‘एनजीओ’ के रूप में होती हैं। बावा को बल की सपोर्ट रहती है। बीएसएफ के सेवानिवृत्त एडीजी एसके सूद ने कहा, इस तरह का कठोर आदेश जारी करना ठीक नहीं है। जवानों पर अपने परिवार को शामिल करने का दबाव, इसे किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता। ऐसे कार्यक्रमों में जवान की अपनी मर्जी होती है कि वह परिवार को साथ लाए या न लाए। अगर ऐसा कोई समारोह होता है तो उसमें परिवार को लाने का आग्रह किया जा सकता है। ये आदेश एक ‘सलाह’ या ‘अनुरोध’ तक तो ठीक रहता है, मगर यहां तो जवानों को धमकी सी दे दी गई कि उनका परिवार नहीं आया तो सरकारी आवास खाली करना होगा।

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