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तुर्की, बांग्लादेश और चीन की इन चीजों को भारत ने क्यों रोका!

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
02/12/24
in राष्ट्रीय, समाचार
तुर्की, बांग्लादेश और चीन की इन चीजों को भारत ने क्यों रोका!
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नई दिल्ली: भारत ने इस साल चीन, जापान, श्रीलंका, बांग्लादेश और तुर्की को एक मामले में बाहर का दरवाजा दिखा दिया है। दरअसल, भारत ने इन देशों के कुछ फूड प्रोडक्ट्स को नकार दिया है, क्योंकि ये कुछ मानकों पर खरे नहीं उतरे थे। खाद्य नियामक भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने हाल ही में अपने फूड इंपोर्ट रिजेक्शन अलर्ट्स(FIRA) पोर्टल पर इन देशों के नाम सार्वजनिक कर दिए हैं।

खाद्य सुरक्षा और मानक (आयात) विनियमन, 2017 का विनियमन 11(7) खाद्य प्राधिकरण को खाद्य चेतावनी अधिसूचना जारी करने का अधिकार देता है। जानते हैं इन देशों के खानपान को भारत ने क्यों खारिज कर दिया? इसे समझते हैं।

140 देशों के 6,000 फूड प्रोडक्ट्स आयात करता है भारत

भारत 140 से अधिक देशों से खाद्य वस्तुओं आयात करता है। वह इन देशों से 6,000 से ज्यादा चीजें मंगाता है। 2022 में भारत के टॉप फूड प्रोडक्ट इंपोर्ट वाले देश थे-अमेरिका, ब्रिटेन, इंडोनेशिया, ब्राजील और थाईलैंड। इन देशों में श्रीलंका, चीन, जापान, तुर्की और बांग्लादेश भी शामिल रहे हैं।

श्रीलंका की सुपारी और दालचीनी को ‘पिलाया पानी’

FIRA पोर्टल के अनुसार, FSSAI ने 24 मई को बेंगलुरु में श्रीलंका से दालचीनी के फूल की कली (सूखी) को नामंजूर कर दिया था। वजह यह थी कि इस प्रोडक्ट की पहले से मंजूरी नहीं ली गई थी। इससे पहले 22 अप्रैल को कई खामियों की वजह से तूतीकोरिन बंदरगाह पर श्रीलंकाई सुपारी की खेप को खारिज कर दिया गया था। यहां से आए फफूंद और कीड़ों से क्षतिग्रस्त मेवे दागदार, फटे हुए, टूटे हुए मिले।

बांग्लादेश के मेवों में लगा फंफूद, भारत ने लौटाया

इसी साल 20 फरवरी को भारत ने तूतीकोरिन बंदरगाह पर बांग्लादेश से आए सूखे मेवों की खेप को खारिज कर दिया था। इन मेवों में फंफूद और कीड़े लगे हुए मिले। इनमें नमी की मात्रा भीह सीमा से अधिक पाई गई थी। भारत के वैसे भी इन दिनों बांग्लादेश से संबंध खराब चल रहे हैं।

जापान की यह खास चाय भी हुई खारिज

FSSAI ने 25 जून को बेंगलुरु में जापान से हेल्थ सप्लीमेंट्स और न्यूट्रास्यूटिकल्स की कैटेगरी में शामिल टीबैग को खारिज कर दिया था। दरअसल, यह टीबैग ‘रूइबोस’ नाम के पौधे से तैयार होता है, जो भारत में मानदंडों के मुताबिक मान्य नहीं है।

तुर्की के लाल सेबों की मियाद औरों के मुकाबले कम

इसी तरह FSSAI ने तुर्की से आए ताजे लाल सेबों को 31 जुलाई को कोलकाता बंदरगाह पर ही खारिज कर दिया था। वजह यह बताई गई कि ये सेब ज्यादा दिन तक टिकते नहीं हैं। मानकों के मुताबिक, इन सेबों की शेल्फ लाइफ कम से कम 60 फीसदी होनी चाहिए थी। यानी ये 3 महीने के पहले ये खराब नहीं होने चाहिए।

चीन की ग्रीन एप्पल बीयर में अल्कोहल ज्यादा

FSSAI ने 31 मई को मुंबई के जवाहरलाल नेहरू न्हावाशेवा बंदरगाह पर चीन से गैर अल्कोहल बीयर यानी ग्रीन एप्पल को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि इसका पीएच मान अल्कोहल-मुक्त बीयर के लिए निर्धारित सीमा से कम है। इसी तरह, चीन की समुद्री शैवाल सुशी नोरी को भी भारी धातु और आर्सेनिक की मौजूदगी के कारण मई में दिल्ली में अस्वीकार कर दिया गया था। चीन के कुछ खानपान में जहरीली धातु आर्सेनिक की मात्रा काफी ज्यादा मिली थी।

क्या हैं सुरक्षा मापदंडों में इन बातों का रखा ध्यान

भारत में आयातित खाद्य पदार्थों को विनियमित करने के लिए FSSAI ने कई पॉइंट्स पर निगरानी केंद्र बनाए हैं, जहां से विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की ओर से उन खाद्य पदार्थों के आयात की अनुमति दी जाती है। आमतौर पर सुरक्षा मापदंडों में कीटनाशक, भारी धातु, रंग, स्वाद, गुणवत्ता मानकों में कमी, फैट वगैरह का ध्यान रखा जाता है।

क्यों हुआ था FSSAI का गठन

FSSAI) का गठन खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत किया गया है। FSSAI का मकसद खाद्य पदार्थों के लिए साइंटिफिक स्टैंडर्ड तय करने और उपभोग के लिए सुरक्षित पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित कराना है। FSSAI खानपान के भंडारण, वितरण, बिक्री और आयात को विनियमित करता है।

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