Friday, July 10, 2026
नेशनल फ्रंटियर, आवाज राष्ट्रहित की
  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार
  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार
No Result
View All Result
नेशनल फ्रंटियर
Home राष्ट्रीय

SC ने केंद्र से क्यों कहा- RBI से 50 करोड़ लो और मुआवजा दो!

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
14/03/23
in राष्ट्रीय, समाचार
SC ने केंद्र से क्यों कहा- RBI से 50 करोड़ लो और मुआवजा दो!

google image

Share on FacebookShare on WhatsappShare on Twitter

नई दिल्ली : दिसंबर 1984 में हुई ‘भोपाल गैस त्रासदी‘ के पीड़ितों को अतिरिक्त मुआवजा देने के लिए दायर की गई केंद्र सरकार की क्यूरेटिव याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. केंद्र ने याचिका मेंयूनियन कार्बाइड कॉरपोरेशन (UCC) की उत्तराधिकारी कंपनियों से अतिरिक्त 7400 करोड़ रुपए देने की मांग की थी. इस त्रासदी में 3000 से ज्यादा लोग मारे गए थे और पर्यावरण को भी काफी नुकसान पहुंचा था.

जस्टिस संजय किशन कौल के नेतृत्व वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि समझौते के तीन दशक बाद केंद्र की ओर से इस मुद्दे को उठाने का कोई औचित्य नहीं बनता. इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़ितों के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के पास पड़ी 50 करोड़ रुपए की राशि का इस्तेमाल केंद्र सरकार लंबित दावों को पूरा करने के लिए करे.

इन 10 प्वाइंट्स में समझें पूरा मामला

  • ‘भोपाल गैस त्रासदी’ के पीड़ितों की मुआवजा राशि बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने दिसंबर 2010 में सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दायर की थी. केंद्र इस बात पर जोर देता रहा है कि 1989 में मानव जीवन और पर्यावरण को हुई वास्तविक क्षति का ठीक से आकलन नहीं किया जा सका था.
  • केंद्र साल 1989 में हुए समझौते के हिस्से के रूप में अमेरिकी कंपनी से प्राप्त 715 करोड़ रुपए के अलावा अमेरिका स्थित यूसीसी की उत्तराधिकारी कंपनियों से 7400 करोड़ रुपए और चाहता था, लेकिन याचिका खारिज हो गई. यानी अबअबडाऊ कैमिकल्स के साथ समझौता फिर से नहीं खुलेगा.
  • आज जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने फैसला सुनाया है. 12 जनवरी को जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस अभय एस ओका, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस जेके महेश्वर की पीठ ने भी केंद्र की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
  • 12 जनवरी को हुई सुनवाई में यूसीसी की उत्तराधिकारी फर्मों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि भारत सरकार ने निपटान के वक्त कभी भी यह सुझाव नहीं दिया था कि मुआवजा अपर्याप्त था. वकील ने इस बात पर जोर दिया कि साल 1989 के बाद से रुपए का अवमूल्यन भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए अब मुआवजे की मांग का आधार नहीं बन सकता.
  • आज पीठ ने कहा, हम दशकों बाद इस मुद्दे को उठाने के केंद्र सरकार के किसी भी तर्क से संतुष्ट नहीं हैं. हमारा मानना है कि क्यूरेटिव याचिकाओं पर विचार नहीं किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र को इस मामले में पहले आना चाहिए था न कि तीन दशक के बाद.
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर हम याचिका को स्वीकार करते है तो पेंडोरा बॉक्स खुल जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समझौते को सिर्फ फ्रॉड के आधार पर रद्द किया जा सकता है. केंद्र सरकार की तरफ से समझौते में फ्रॉड को लेकर कोई दलील नहीं दी गई.
  • फर्मों का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने मामले से जुड़े कई षडयंत्र सिद्धांतों का भी हवाला दिया. उन्होंने कहा कि सिद्धांत में यह दावा किया गया था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने समझौते से पहले पेरिस के एक होटल में UCC अध्यक्ष वॉरेन एंडरसन से मुलाकात की थी और कहा था कि एंडरसन तब तक अपने पद से सेवानिवृत्त हो चुके थे.
  • केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी से कोर्ट ने सवाल किया था कि सरकार समीक्षा दायर किए बिना क्यूरेटिव पिटीशन कैसे दायर कर सकती है.
  • भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड संयंत्र से दो-तीन दिसंबर 1984 की मध्यरात्रि को जहरीली मिथाइल आइसोसायनेट गैस का रिसाव होने लगा था, जिसकी वजह से 3000 से ज्यादा लोग मारे गए थे और 1.02 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए थे. यूनियन कार्बाइड संयंत्र ने तब 47 करोड़ डॉलर का मुआवजा दिया था. इस कंपनी का स्वामित्व अब डाउ जोन्स के पास है.
  • त्रासदी के बाद बचे लोग जहरीली गैस रिसाव के कारण होने वाली बीमारियों के लिए लंबे समय से पर्याप्त मुआवजे और उचित चिकित्सा उपचार के लिए संघर्ष कर रहे हैं. 7 जून 2010 को भोपाल की एक अदालत ने यूसीआईएल के 7 अधिकारियों को 2 साल की सजा सुनाई थी.

About

नेशनल फ्रंटियर

नेशनल फ्रंटियर, राष्ट्रहित की आवाज उठाने वाली प्रमुख वेबसाइट है।

Follow us

  • About us
  • Contact Us
  • Privacy policy
  • Sitemap

© Copyright 2025 Uma Shankar Tiwari - All Rights Reserved .

  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार

© Copyright 2025 Uma Shankar Tiwari - All Rights Reserved .