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अफेयर, हाउसवाइफ जैसे शब्दों पर सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाईं रोक!

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
16/08/23
in राष्ट्रीय, समाचार
अफेयर, हाउसवाइफ जैसे शब्दों पर सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाईं रोक!

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नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने लैंगिक भेदभाव या असमानता दर्शाने वाले शब्दों के इस्तेमाल से बचने के लिए रूलबुक तैयार की है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पहल पर यह फैसला लिया गया है।इसमें न्यायाधीशों को अदालती आदेशों और कानूनी भाषा में लैंगिक पूर्वाग्रह से बचने की सलाह दी गई है। किसी भी तरह के स्टीरियोटाइप से बचने के लिए कुछ शब्दों को बोलने से परहेज को कहा गया है। इसके अलावा उनके विकल्प के तौर पर किन शब्दों का इस्तेमाल हो सकता है, उनकी भी लिस्ट दी गई है। शीर्ष अदालत ने जिन शब्दों के इस्तेमाल से परहेज की सलाह दी है, उनमें अनवेड मदर, हाउसवाइफ और अफेयर आदि शामिल हैं।

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि गाइडबुक उन शब्दों और वाक्यांशों के इस्तेमाल को पहचानने और खत्म करने के लिए है, जो अदालती आदेशों व कानूनी भाषा में लैंगिक पूर्वाग्रह को दर्शाते हैं। CJI ने कहा, ‘यह न्यायाधीशों को भाषा की पहचान करके स्टीरियोटाइप को पहचानने और उससे बचने में मदद करता है जो लैंगिक रूढ़िवादिता को बढ़ावा देती है। इसमें वैकल्पिक शब्दों और वाक्यांशों को बताया गया है।’

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, ‘यह हैंडबुक जज व लीगल कम्युनिटी को कानूनी चर्चा में महिलाओं के बारे में स्टीरियोटाइप को पहचानने, समझने और मुकाबला करने में सहायता के लिए है। इसमें लैंगिक अन्यायपूर्ण शब्दों की शब्दावली शामिल है और वैकल्पिक शब्द सुझाए गए हैं। इनका इस्तेमाल दलीलों के साथ-साथ आदेशों और निर्णयों का मसौदा तैयार करने में हो सकता है। यह वकीलों के साथ ही न्यायाधीशों के लिए भी है।’

सामान्य रूढ़िवादिता की होगी पहचान: CJI

चीफ जस्टिस ने कहा कि हैंडबुक महिलाओं की ओर से सामान्य रूढ़िवादिता की पहचान करती है। इनमें से कई शब्दों का इस्तेमाल अदालतों की ओर से पहले हो चुका है। इसमें बताया गया है कि वे क्यों गलत हैं और कैसे कानून के उपयोग को विकृत कर सकते हैं। उन्होंने साफ कर दिया कि इसका इरादा आलोचना करना या फिर निर्णयों पर संदेह करना नहीं है, बल्कि केवल यह दिखाना है कि कैसे स्टीरियोटाइप को धीरे-धीरे खत्म किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड हैंडबुक

चंद्रचूड़ ने कहा, ‘रूढ़िवादिता विशेष रूप से महिलाओं के खिलाफ काफी हानिकारक है। इसके खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए हैंडबुक को तैयार किया गया है। इसमें बताया गया है कि स्टीरियोटाइप क्या हैं।’ उन्होंने बताया कि ई-फाइलिंग के लिए मैनुअल और ट्यूटोरियल सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड हो चुका है। हैंडबुक को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है।

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