नई दिल्ली : जेल में बंद आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी को लेकर कई विपक्षी दल कड़ा विरोध दर्ज करा रहे हैं। लेकिन देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस पसोपेश में नजर आ रही है। कांग्रेस सिसोदिया की गिरफ्तारी का न तो समर्थन कर रही है और न ही खुले तौर पर विरोध। मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी पर लगभग एक दिन तक चुप्पी बनाए रखने के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने सोमवार को बिना किसी का नाम लिए एक बयान जारी कर ‘उत्पीड़न’ के लिए केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल की आलोचना की।
देश सबसे पुरानी पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट कर लिखा, “कांग्रेस का हमेशा यह मानना रहा है कि ED, CBI और इनकम टैक्स जैसे संस्थान मोदी सरकार के तहत राजनीतिक प्रतिशोध और उत्पीड़न के साधन बन गए हैं। इन संस्थानों ने सभी व्यावसायिकता खो दी है। उनकी प्रतिष्ठा को नष्ट करने के लिए विपक्षी नेताओं को चुनिंदा रूप से टारगेट किया जाता है।” भले ही कांग्रेस की दिल्ली इकाई ने सिसोदिया की गिरफ्तारी का “स्वागत” किया है, लेकिन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी कहीं न कहीं 2024 की ओर इशारा कर रही है। रायपुर में अपने तीन दिवसीय अधिवेशन में कांग्रेस ने बार-बार अन्य विपक्षी दलों के साथ काम करने की अपनी इच्छा जाहिर की थी।
कांग्रेस की चुप्पी के और भी कई मायने निकाले जा रहे हैं। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि आम आदमी पार्टी उन राज्यों में कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगा रही है जहां उसकी अच्छी पकड़ रही है, खासकर दिल्ली में जहां कांग्रेस लगातार दो चुनावों में एक भी विधानसभा सीट नहीं जीत पाई। इसके अलावा, जब सोनिया गांधी जैसे कांग्रेस नेताओं को नेशनल हेराल्ड मामले में पूछताछ का सामना करना पड़ा तो भी AAP ने कुछ नहीं बोला था। नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों पर पिछले साल जुलाई में ईडी द्वारा सोनिया गांधी से पूछताछ किए जाने के दिन टीएमसी के अलावा, AAP भी विपक्षी दलों द्वारा जारी एक संयुक्त बयान से दूर रही थी।
हालांकि कांग्रेस ने मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी पर अपने रुख में अस्पष्टता होने की बात को खारिज करते हुए मंगलवार को कहा कि इस पूरे प्रकरण की जांच होनी चाहिए, लेकिन उसका यह सवाल भी है कि जांच एजेंसियों द्वारा सिर्फ विपक्ष के नेताओं को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है। पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने यह भी कहा कि कांग्रेस नेताओं के प्रवर्तन निदेशालय द्वारा किए गए ‘उत्पीड़न’ की आम आदमी पार्टी ने भर्त्सना नहीं की थी क्योंकि उसमें (आप में) नैतिकता नहीं है, लेकिन उसके (कांग्रेस के) भीतर नैतिकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘जब हमारे नेताओं को बुला-बुलाकर ईडी प्रताड़ित करती है, हमारे नेताओं को गिरफ्तार किया जाता है तो तब क्या आम आदमी पार्टी ने भर्त्सना करते हुए एक शब्द बोला था? उनके अंदर नैतिकता नहीं है, हमारे अंदर नैतिकता है।’’सुप्रिया ने आप से सवाल किया, ‘‘क्या आपको इसका अहसास है कि जब विपक्ष पर हमला हो रहा है तब चुप रहने का कोई विकल्प नहीं है?’’
‘शराब घोटाले’ की जांच होनी चाहिए- कांग्रेस
यह पूछे जाने पर कि क्या सिसोदिया की गिरफ्तारी को लेकर पार्टी के रुख में अस्पष्टता की स्थिति है तो सुप्रिया ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह किसी से छिपा नहीं है कि सरकार की एजेंसिया भाजपा के किसी नेता के पास नहीं जाएंगी। अडाणी जी के पास ईडी और सीबीआई नहीं जाएगी। सारी एजेंसियां सिर्फ विपक्षी नेताओं के पास क्यों जाती हैं?’’ उन्होंने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘जब ऑक्सीजन के लिए दिल्ली तड़प रही थी तो आप शराब नीति बना रहे थे। भाजपा के लोग भी कुंभकरण की नींद सो रहे थे। इस मामले में हम ही शिकायतकर्ता हैं। सवाल इस घोटाले के लिए हैं और रहेंगे। क्या यह उचित कार्रवाई है, इस बारे में भी सवाल हैं।’’ सुप्रिया का कहना था कि ‘शराब घोटाले’ की जांच होनी चाहिए।
भाजपा से मुकाबले के लिए कांग्रेस को क्षेत्रीय दलों की जरूरत
देश भर में अपनी उपस्थिति को देखते हुए, कांग्रेस पार्टी के पास उत्तर प्रदेश, केरल, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना जैसे राज्यों में काफी कुछ दांव पर है। इन राज्यों में कांग्रेस खुद को क्षेत्रीय दलों के खिलाफ खड़ा पाती है, लेकिन भाजपा को हराने के लिए उसे केंद्र में इनकी जरूरत भी है। इस लिहाज से कुछ पार्टी नेताओं का मानना है कि कांग्रेस को अपना स्टैंड क्लियर करना पड़ेगा। उदाहरण के लिए, केरल को ले लीजिए। कांग्रेस और वामपंथियों के बीच कुछ समय तक केंद्र में अच्छे संबंध रहे। लेकिन अब दोनों मुख्य प्रतिद्वंद्वी हैं।
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के कुछ करीबी सहयोगी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के तहत जांच के दायरे में हैं। कांग्रेस इसको लेकर CPI(M) पर काफी हमलावर रही। इसी तरह टीएमसी नेताओं के खिलाफ शारदा और नारदा घोटाले के आरोपों को लेकर कांग्रेस ममता सरकार पर भी हमलावर रही। तेलंगाना में भी, कांग्रेस की राज्य इकाई मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी के कविता के खिलाफ सीबीआई के हर कदम पर खुशी जाहिर करती है। हालांकि क्षेत्रीय भारत राष्ट्र समिति 2024 के बाद एक और मूल्यवान भागीदार हो सकती है।
सिसोदिया दे चुके हैं इस्तीफा
सिसोदिया ने दिल्ली के उपमुख्यमंत्री पद इस्तीफा दे दिया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। सिसोदिया के अलावा, जेल में ही बंद आप के एक अन्य नेता सत्येंद्र जैन ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अगर दो साल या उससे अधिक की जेल की सजा सुनाई जाती है, तो सिसोदिया और जैन अपनी सीट खो सकते हैं और छह साल तक चुनाव नहीं लड़ सकते हैं।
