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हिंदू राष्ट्र और राम राज्य पर आखिर संतों के बीच क्यों छिड़ी है तकरार!

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
26/05/23
in राष्ट्रीय
हिंदू राष्ट्र और राम राज्य पर आखिर संतों के बीच क्यों छिड़ी है तकरार!
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पंडित धीरेंद्र शास्त्री या फिर कहें बाबा बागेश्वर अपनी किसी भी कथा या फिर धर्म सम्मेलन में भारत को हिंदू राष्ट्र को बनाने के लिए लोगों से आह्वान करना नहीं भूलते हैं. अपनी कथाओं में लोगों का पर्ची के जरिए भविष्य बताने वाले कथावाचक बाबा बागेश्वर जिस तरह आस्था के बड़े मंचों से हिंदू राष्ट्र के मुद्दे को उछाल रहे हैं, उसे लेकर अब सिर्फ मुस्लिम ही नहीं बल्कि हिंदू धर्म से भी विरोध में अवाज उठने लगी है. बाबा बागेश्वर की हिंदू राष्ट्र से जुड़ी कल्पना पर ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बड़ा सवाल उठाया है.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कहना है कि वर्तमान में देश को हिंदू राष्ट्र नहीं बल्कि राम राज्य की जरूरत है क्योंकि उनके अनुसार ‘हिंदू राष्ट्र’ मतलब हिंदुओं की गोलबंदी करना होगा जबकि राम राज्य में कोई भी अपना या पराया नहीं होता है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का तर्क है कि जो हिंदू राष्ट्र में जो हिंदू नहीं होगा उसके साथ परायेपन के व्यवहार की आशंका बनी रहेगी. बाबा बागेश्वर बनाम शंकराचार्य के बीच चल रही इस तकरार में हमने देश के प्रमुख संतों से इस बाबत जब राय जाननी चाही तो उन्होंने क्या कहा, आइए इसे विस्तार से जानते हैं.

शंकराचार्य से मिलकर सुलझाएंगे ये मुद्दा
हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना पर अपनी पूरी सहमति जताते हुए हिंदू महासभा के अध्यक्ष कहते हैं वर्तमान में हिंदू राष्ट्र देश की आवश्यकता है, लेकिन इसके भीतर संरचना राम राज्य की होनी चाहिए. इसे इस तरह से समझना होगा कि जब राम राज्य था, उस समय इस्लॉम और इसाइयत नहीं था. अब यहां पर जिन लोगों को हिंदू शब्द पर विरोध है उन्हें समझना होगा कि ‘आसिन्धु सिन्धु पर्यन्ता यस्य भारत भूमिका:, पितृभू: पुण्यभूश्चैव, स वै हिन्दू रिती स्मृतः.” यानि इस देश को जो पितृभू और पुण्यभू मानता है वह हिंदू है. ऐसे में समझना होगा कि सिर्फ सनातनी को हिंदू नहीं कहते हैं. हमारे यहां सिख को सिख हिंदू कहेंगे, जैन को जैन हिंदू कहा जाएगा. यहां पितृभू का अर्थ है कि यह भारत हमारा पैतृक स्थान है और पुण्यभू का अर्थ यह है कि हमारे देवी-देवता सभी यहीं निवास करते हैं. स्वामी चक्रपाणि कहते हैं कि वे हिंदू राष्ट्र के मुद्दे पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से बात करें और इस मुद्दे को सुलझाएंगे.

प्रधानमंत्री ने कभी नहीं कही ऐसी बात
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान से जुड़े धर्मगुरु स्वामी विशालानंद कहते हैं कि हिंदू राष्ट्र की बहस नए संसद भवन में सिंगोल में बने नंदी के प्रतीक चिन्ह को लेकर और भी बढ़ गई है, जिसे लोग धार्मिक चिन्ह बता रहे हैं. ऐसे में यह बात जान लेना जरूरी है कि यहां धर्म का मतलब हिंदू या मुसलमान से नहीं बल्कि सत्य, न्याय और प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है. नंदी यहां पर धर्म न कि किसी संप्रदाय का प्रतीक है. इसी प्रकार यदि हिंदू राष्ट्र की कल्पना की बात की जाए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी अपने मुंह से हिंदू राष्ट्र की बात नहीं कही. वे जिस किसी भी तीर्थ स्थल पर गये वहां पर उन्होंने अपनी आस्था के अनुसार ईश्वर का उद्घोष किया. प्रधानमंत्री तो एक हाथ में कुरान और एक हाथ में कंप्यूटर की बात करते हैं. स्वामी विशालानंद हिंदू राष्ट्र बनाम राम राज्य की तकरार में राम राज्य का पक्ष लेते हैं. उनका मानना है कि राम राज्य की बात हमारे शास्त्रों में भी की गई है. स्वामी तुलसीदास जी ने कहा भी है कि ‘दैहिक, दैविक, भौतिक तापा, रामराज काहु नहीं व्यापा’ यानि उनके शासनकाल में किसी को किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं था.

गांधी भी करते थे राम राज्य की चर्चा
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी आजीवन राम राज्य स्थापित करने की बात करते रहे. गांधीयन साहित्य में कहीं हिंदू राष्ट्र की बात नहीं है पर राम राज्य की चर्चा जरूर है. गांधी का राम राज्य भी सभी लोगों के बीच समानता पर ही आधारित है. गांधी दर्शन में किसी खास धर्म को तवज्जो देने की बात नहीं है. भारतीय जनता पार्टी ने भी कभी हिंदू राष्ट्र स्थापित करने की बात नहीं की है. पर बाबा बागेश्वर सरकार ने इस बीच लगातार भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की बात करने और उनकी सभाओं में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की लगातार उपस्थिति ने हिंदू राष्ट्र को बीजेपी से जोड दिया है. विपक्ष भी इसे मुद्दा बनाने से नहीं चूक रहा है. जिस तरह संत समाज इस मुद्दे पर बंटा हुआ दिख रहा है उससे यही लग रहा है कि यह मामला अभी और तूल पकड़ने वाला है.

 

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