Thursday, July 9, 2026
नेशनल फ्रंटियर, आवाज राष्ट्रहित की
  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार
  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार
No Result
View All Result
नेशनल फ्रंटियर
Home राष्ट्रीय

भारत के इस बाहुबली वॉरशिप का नाम क्यों रखा गया ‘मोरमुगाओ’, बेहद रोचक है इतिहास

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
18/12/22
in राष्ट्रीय, समाचार
भारत के इस बाहुबली वॉरशिप का नाम क्यों रखा गया ‘मोरमुगाओ’, बेहद रोचक है इतिहास
Share on FacebookShare on WhatsappShare on Twitter

नई दिल्ली : सोलहवीं शताब्दी में पुर्तगालियों ने गोवा के हिस्से में बसावट शुरू कर दी थी. तिस्वाड़ी के केंद्रीय जिले जो अब पुराना गोवा है, से अपनी कमान संभाली. अपने समुद्री प्रभुत्व को बचाने के लिए पुर्तगालियों ने पहाड़ियों पर समुद्री तट के साथ किलों का निर्माण किया. 1624 में उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ वाले शहर को मोरमुगाओ बंदरगाह की दिशा वाली भूमि पर बनाना शुरू किया.

पुर्तगालियों से पहले गोवा पर राज करने वाले बीजापुर के सुल्तानों ने आसानी से हार नहीं मानी. कई आक्रमण हुए. समुद्र से डच आए, जिन्होंने अंततः पुर्तगालियों से अधिकांश तटीय बस्तियों पर कब्जा कर लिया. 1640 से 1643 तक, डचों ने मोरमुगाओ पर कब्जा करने की पूरी कोशिश की, लेकिन अंत में उन्हें खदेड़ दिया गया.

1683 में गोवा में पुर्तगाली मराठों से गंभीर खतरे में थे. लगभग निश्चित हार टल गई जब संभाजी ने अचानक घेराबंदी उठा ली और मुगल सम्राट औरंगजेब से अपने राज्य की रक्षा के लिए दौड़ पड़े. तब के पुर्तगाली शासक को भारत में पुर्तगाली होल्डिंग्स की राजधानी को मोरमुगाओ के दुर्जेय किले में स्थानांतरित करने की सलाह दी गई.

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मोरमुगाओ का बंदरगाह ऑपरेशन क्रीक का केंद्र था. इसी ऑपरेशन के तहत जर्मन व्यापारी जहाज एरेनफेल्स पर बमबारी हुई, जो गुप्त रूप से यू-बोट्स को सूचना प्रसारित कर रहा था. अब आपको यह तो पता चल ही गया होगा कि गोवा का मोरमुगाओ क्यों विशेष है. मोरमुगाओ.. गोवा का सबसे पुराना बंदरगाह भी है, जिसपर आजादी से पहले हमेशा विदेशी ताकतों की नजर रही.

‘मोरमुगाओ’ (Mormugao) वॉरशिप को गोवा मुक्ति दिवस के मौके पर भारतीय नौसेना के दूसरे स्वदेशी विध्वंसक युद्धपोत के रूप में पिछले साल समुद्र में पहली बार ट्रायल के लिए उतारा गया था. इसका ट्रायल गोवा की पुर्तगाली शासन से आजादी के 60 साल पूरे होने के अवसर पर किया गया था.

‘मोरमुगाओ’ की लंबाई 163 मीटर है और यह 17 मीटर चौड़ा है. यह परमाणु, जैविक और रासायनिक युद्ध स्थितियों में लड़ सकता है. चार शक्तिशाली गैस टर्बाइनों द्वारा संचालित, युद्धपोत 30 समुद्री मील से अधिक की स्पीड से दुश्मनों की तरफ वार करने के लिए बढ़ सकता है. इसमें अत्याधुनिक हथियार और सेंसर हैं. यह आधुनिक निगरानी रडार के अलावा सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से लैस है जो हथियार प्रणालियों को लक्ष्य डेटा प्रदान करता है. इसे भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया है. युद्धपोत का निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने किया है.

About

नेशनल फ्रंटियर

नेशनल फ्रंटियर, राष्ट्रहित की आवाज उठाने वाली प्रमुख वेबसाइट है।

Follow us

  • About us
  • Contact Us
  • Privacy policy
  • Sitemap

© Copyright 2025 Uma Shankar Tiwari - All Rights Reserved .

  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार

© Copyright 2025 Uma Shankar Tiwari - All Rights Reserved .