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अप्रैल में क्यों बना गर्मी का रिकॉर्ड, किन राज्यों में लू का सबसे ज्यादा खतरा?

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
01/05/24
in राष्ट्रीय, समाचार
अप्रैल में क्यों बना गर्मी का रिकॉर्ड, किन राज्यों में लू का सबसे ज्यादा खतरा?
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नई दिल्ली। गर्मी ने रिकॉर्ड बना दिया है. शुक्रवार को प्रयागराज का तापमान 44.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा. इसके अलावा देश के कई शहरों में तापमान 41 डिग्री पार कर गया. अप्रैल से गर्मी का असर दिखना तो शुरू हो जाता है, लेकिन ऐसा रिकॉर्ड कम ही बनता है. मौसम विभाग का कहना है कि अगले पांच दिन और भी ज्यादा गर्मी पड़ने वाली है. जिन राज्यों में सबसे ज्यादा हीटवेव का खतरा है उनमें पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश शामिल हैं. अप्रैल में गर्मी का रिकॉर्ड यूं ही नहीं बना है. इस हीटवेव के पीछे भी दो वजह बताई गई हैं.

इसकी वजह समझने से पहले यह जान लेते हैं कि हीटवेव की स्थिति कब बनती है? मौसम विभाग कहता है कि लू तब चलती है कि जब मैदानी इलाकों में कम से कम दो इलाकों का सामान्य अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. या सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस अधिक हो जाता है. वहीं, पहाड़ी और तटीय क्षेत्रों में तापमान क्रमशः 30 डिग्री सेल्सियस और 37 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने पर लू की घोषणा की जाती है. अगर तापमान सामान्य से 6 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाता है तो उसे आमभाषा में भीषण लू चलना कहते हैं.

अप्रैल में क्यों बना गर्मी का रिकॉर्ड, ये हैं दो बड़ी वजह

मौसम विभाग ने अपने अप्रैल के पूर्वानुमान में पहले ही देश के बड़े हिस्से में अधिक गर्मी और लंबे समय तक लू चलने की चेतावनी दी थी. और ऐसा ही हुआ. अप्रैल में गर्मी का रिकॉर्ड टूटने की दो वजह बताई गईं. पहली अलनीनो और दूसरी एंटीसायक्लोन. अब इन दोनों को समझ लेते हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में मौसम विभाग के डायरेक्टर जनरल मृत्युंजन मोहपात्रा कहते हैं, साल 2024 की शुरुआत अलनीनो की स्थिति से हुई थी. यह मौसम की ऐसी स्थिति होती है जब भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर की सतह जरूरत से ज्यादा गर्म होने लगती है. इसके कारण दुनिया के कई हिस्सों में गर्मी बढ़ती है और समुद्र के तापमान पर भी असर पड़ता है. इसकी शुरुआत जून 2023 में हुई थी. आमतौर पर जब किसी साल की शुरुआत अलनीनो के साथ होती है तो गर्मी तो पड़ती ही है, इसके साथ ही प्री-मानसून की बारिश की न होने या बहुत कम होने का खतरा बढ़ता है.

अप्रैल में गर्मी होने की दूसरी वजह है कि एंटी-सायक्लोन सिस्टम. दक्षिणी प्रायद्वीपीय और दक्षिणपूर्वी तटीय क्षेत्रों में लगातार बना एंटी-सायक्लोन सिस्टम भी अप्रैल की गर्मी की वजह है. यह एक तरह का हाई प्रेशर सिस्टम होता है जो 3 किलोमीटर की ऊंचाई पर बनता है. इसका दायरा 1 से 2 हजार किलोमीटर तक होता है. यह अपने नीचे की हवा को पृथ्वी की ओर धकेलता है. नतीजा, दबाव के साथ पृथ्वी की तरफ आई हवा सतह पर पहुंचने तक गर्मी पैदा करती है और ऐसे हालात बनते हैं.

एंटी सायक्लोन सिस्टम से हवा का फ्लो जमीन से समुद्र की ओर होता है और समुद्र की तरफ से आने वाली ठंडी हवा को भी रोकने का काम करता है. इस तरह अलनीनो और एंटी-सायक्लोन ने मिलकर अप्रैल में गर्मी बढ़ाई और लू जैसे हालात बने. इसके कारण खासतौर पर पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और महाराष्ट्र में तापमान बढ़ा.

गर्मी में इन बातों का ध्यान रखें

  • तेज धूप में से बाहर न निकलें. सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक निकलने से बचें.
  • गर्मियों में शरीर को हाइड्रेट रखने के लिएरोजाना कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी पिएं.
  • हीट स्ट्रोक के लक्षणों को समझें. जैसे कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द, पसीना अधिक आना. ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

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