“बलमा जी का स्टूडियो”

अतीत और वर्तमान की ड्योढ़ी पर बैठे वर्तमान से एकदम मुंह फेरे मुझ जैसे तमाम नास्टैल्जिक पाठको के लिए कहानी “बलमा जी का स्टूडियो “हाथ पकड़कर उसी दुनिया में ले…

कविता – गुनहगारों की बस्ती

-गुनहगारों की बस्ती- माना  कि ये नहीं होते बेटा और  बेटी परंतु तुम्हारे गर्भ से जन्मी औलाद तो है न जिनके पैदा होने पर  वैसे ही उमड़ घुमड़ आँचल से…