देश में 20 साल बाद बदलने जा रही राष्ट्रीय सहकारी नीति

नई दिल्ली : देश में करीब 20 वर्ष बाद राष्ट्रीय स्तर पर सहकारी नीति में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मोदी सरकार के ‘सहकार से समृद्ध’ मॉडल के तहत नई राष्ट्रीय सहकारी नीति बनने जा रही है। गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु की अध्यक्षता में 47 सदस्यीय राष्ट्रीय समिति गठित की। यह समिति राष्ट्रीय सहकारिता नीति दस्तावेज का प्रारूप तैयार करेगी। नई नीति से देश की 8.5 लाख सहकारी समितियों से जुड़े 29 करोड़ सदस्यों को लाभ पहुंचने की उम्मीद है।

वर्ष 2002 में बनी थी मौजूदा नीति

मौजूदा राष्ट्रीय सहकारिता नीति, वर्ष 2002 में तैयार हुई थी। इस समय देश में करीब 8.5 लाख सहकारी समितियां हैं, जो करीब 29 करोड़ सदस्यों के साथ पूरे देशभर में फैली हैं। ये सहकारी समितियां कृषि प्रसंस्करण, डेयरी, मत्स्यपालन, आवासन, बुनाई, ऋण और विपणन समेत विविध कार्यकलापों में सक्रिय हैं।

नई नीति से पारदर्शिता को बढ़ावा

बताया जा रहा है कि नई नीति से मोदी सरकार में अलग से सहकारिता मंत्रालय खोले जाने से जुड़ा उद्देश्य पूरा होगा। बड़ी सहकारी समितियों आधुनिकीकरण और पारदर्शिता लाने में मदद मिलेगी, जिससे जमीनी स्तर पर सहकारिता आंदोलन को मजबूती मिलेगी। नई नीति से सहकारिता आधारित विकास मॉडल को बल देने की तैयारी है। नई नीति से सहकारिता की पहुंच जन-जन तक होगी।

कौन होगा समिति में
राष्ट्रीय समिति में देश के सभी हिस्‍सों से 47 सदस्यों को शामिल किया गया है। सहकारी क्षेत्र के विशेषज्ञ, राष्‍ट्रीय,राज्‍य, जिला व प्राथमिक सहकारी समितियों के प्रतिनिधि, राज्‍यों के सहकारिता सचिव, समितियों के पंजीयक व केन्‍द्रीय मंत्रालयों के अधिकारी शामिल हैं।

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