गौमूत्र से बनता है पंचगव्य…आयुर्वेद और प्राचीन ग्रंथों में इसकी महिमा का क्यों है बखान?

गौमूत्र पर नये रिसर्च ने गाय में आस्था रखने वाले और पंतगव्य (Panchgavya) को धार्मिक अनुष्ठानों में पूरी श्रद्धा के साथ इस्तेमाल करने वालों को अचंभे में डाल दिया है. इस रिसर्च के मुताबिक गौमूत्र (Cow Urine) का उपभोग इंसानों के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है. रिसर्च में बताया गया है कि गौमूत्र में बैक्टीरिया होता है. लिहाजा गौमूत्र पीना सेहत के लिए नुकसानदायक है.

गौमूत्र पर चकित करने वाला यह रिसर्च उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित IVRI यानी इंडियन वेटेनरी रिसर्च इंस्टिट्यूट (भारतीय पशुचिकित्सा अनुुसंधान संस्थान) ने किया है. हिंदू धर्म के शास्त्रों में गौमूत्र पवित्र ही नहीं सेहत के लिए भी उत्तम माना गया है. देश में लाखों लोग गौमूत्र का धड़ल्ले से उपभोग करते रहे हैं. और इससे लाभ होने का दावा करते रहे हैं.

धार्मिक अनुष्ठान और गाय
हिंदू धर्म में गाय का अपना महत्व है. इसे मां का दर्जा दिया गया है. लोग गाय की पूजा करते हैं और गाय के सभी अंगों को विशेष आस्था के नजरिए से देखा जाता है. गाय से मिलने वाली सभी चीजों का ना केवल उपभोग किया जाता है बल्कि धार्मिक अनुष्ठानों में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है.

पंचगव्य का महत्व समझिए
हिंदू धर्म के धार्मिक अनुष्ठानों में पंचगव्य का अपना खास महत्व है. इसमें गाय से मिलने वाली पांच चीज़ें शामिल हैं. मसलन, दूध, दही, घी-मक्खन, गौमूत्र और गोबर. किसी भी पूजा-पाठ या अन्य धार्मिक आयोजनों में इसका आस्था के साथ उपयोग किया जाता है. मंत्रोच्चार के साथ पंतगव्य का उपयोग हिंदू धर्म की परंपरा का हिस्सा है.

पंचगव्य में आने वाली पांचों चीज़ों का अलग अलग महत्व है. दूध से पंचामृत बनता है, शिव लिंग का अभिषेक होता है, भगवान के भोग और प्रसाद में इस्तेमाल किया जाता है. वहीं दही से भी शिवलिंग का अभिषेक होता है.

इसी तरह गोबर से आंगन, द्वार और खासतौर पर पूजा स्थल को लीपा जाता है. माना जाता है गाय का गोबर बैक्टीरिया को दूर करता है और वातावरण को पवित्र और स्वस्थ बनाता है. वहीं गौमूत्र का इस्तेमाल गंगाजल की तरह किया जाता है. स्थान को पवित्र करने के लिए इसका छिड़काव होता है.

आयुर्वेद में गौमूत्र का जिक्र

युगों युगों से गौमूत्र के विशेष धार्मिक को स्थापित किया गया है. इसका अपना आयुर्वेदिक महत्व भी है. चरक, सुश्रुत और वाणभट्ट संहिता में आठ प्रकार के मूत्रों का जिक्र है. जिसमें एक गौमूत्र भी है. आर्युवेदिक शास्त्रों में इसके गुणों का वर्णन है. गौमूत्र को जीवन का अमृत बताया गया है. इसीलिए इसे पंचगव्य में शामिल किया गया है.

शास्त्रों में गौमूत्र के गुण का वर्णन
भारत के प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में गौमूत्र को विभिन्न रोगों को दूर करने वाला भी बताया गया है. आर्युवेदिक शास्त्रों में इसके इस्तेमाल से जहरीले रसायन को दूर करने की बात कही गई है. बताया यह भी कहा गया है कि गौमूत्र का उपभोग करने से शरीर में इम्यूनिटी बढ़ती है. और यह रोगों से लड़ने में मददगार साबित होता है.

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