डिजिटल टैक्स बनाम ट्रंप की नई नीति, क्या बढ़ेगा व्यापारिक संकट?

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति एक बार फिर सुर्खियों में है. ट्रंप एक के बाद एक फैसले ले रहे हैं. ताजा मामला डिजिटल सर्विस टैक्स को लेकर है. ट्रंप ने कहा है कि हम जल्द ही जवाबी शुल्क लगाएंगे. उन्होंने कहा कि जवाबी शुल्क का मतलब है कि वे हमसे शुल्क लेते हैं, हम उनसे शुल्क लेंगे. यह बहुत सरल है. कोई भी कंपनी या देश, जैसे भारत या चीन या अन्य कोई… वे जो भी शुल्क लेते हैं, उतना ही. हम निष्पक्ष होना चाहते हैं.

क्या होता है डिजिटल टैक्स?

भारत सरकार ने साल 2020 में डिजिटल सेवा कर लागू किया था. इसके तहत विदेशी टेक कंपनियों, जैसे गूगल, फेसबुक और अमेजन, को भारत में अपनी डिजिटल सेवाओं से होने वाली आय पर 2% टैक्स देना होता है. यह नियम उन कंपनियों पर लागू होता है, जिनकी वैश्विक आय 2 करोड़ रुपये से ज्यादा है. इसका उद्देश्य भारत में कारोबार करने वाली डिजिटल कंपनियों से उचित टैक्स वसूलना है. लेकिन ट्रंप इसे अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ “भेदभाव” मानते हैं और इसे खत्म करने की मांग कर रहे हैं.

ट्रंप का क्या है बयान?

डोनाल्ड ट्रंप ने दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद कई देशों के साथ व्यापारिक नीतियों को सख्त करने का ऐलान किया है. उन्होंने भारत समेत उन देशों को चेतावनी दी है जो अमेरिकी कंपनियों पर टैक्स लगाते हैं. ट्रंप का कहना है कि अगर ये देश टैक्स जारी रखते हैं तो अमेरिका भारतीय सामानों पर जवाबी टैरिफ लगा सकता है. उनके पहले कार्यकाल में भी अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने बाकी देशों में अमेरिकी कंपनियों पर लगने वाले टैक्स की जांच शुरू की थी.

ट्रंप की नीतियों का भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

व्यापारिक रिश्तों पर पड़ेगा प्रभाव: अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है. अगर ट्रंप टैरिफ बढ़ाते हैं, तो भारतीय निर्यात जैसे दवाएं, कपड़े और सॉफ्टवेयर महंगे हो सकते हैं. भारत के आईटी सेक्टर को हो सकता है नुकसान: भारत का आईटी उद्योग अमेरिकी बाजार पर निर्भर है.लाखों लोगों को इस सेक्टर में रोजगार मिलता रहा है.

अगर ट्रंप इस तरह का कदम उठाते हैं तो भारत को बड़ा नुकसान हो सकता है.  अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर:  रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और भारत-अमेरिका व्यापार संतुलन बिगड़ सकता है. तेजी से बढ़ती भारत की अर्थव्यवस्था को धक्का लग सकता है. रणनीतिक संबंध पर भी पड़ेगा असर: चीन के खिलाफ साझेदारी के बावजूद, ट्रंप की लाभ-केंद्रित नीतियां भारत के लिए चुनौती बन सकती हैं. इसका असर रक्षा सहित अन्य क्षेत्रों में भारत और अमेरिका  के रिश्तों पर पड़ने वाला है.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की धमकियां दोनों देशों को नुकसान पहुंचा सकती हैं, क्योंकि अमेरिका भी भारत से आयात पर निर्भर है. ऐसे में कूटनीति ही रास्ता हो सकती है. भारत जैसे बड़े बाजार को नजर अंदाज या अपनी शर्तों पर चलाने की कोई भी कोशिश दुनिया के किसी भी देश के लिए आसान नहीं है.

भारत के सामने क्या है रास्ता?

भारत की उम्मीदें ट्रंप और पीएम मोदी के मजबूत रिश्तों पर टिकी है.भारत सरकार के सामने अब सवाल है कि क्या डिजिटल टैक्स को जारी रखा जाए या ट्रंप के दबाव में इसे बदला जाए. हालांकि पिछले 2 दशक में भारत और अमेरिका के रिश्ते जिस मुकाम पर पहुंचे हैं ऐसे में अमेरिका के लिए कोई बड़ा कदम उठाना आसान नहीं होगा. फिलहाल, देश की नजरें दोनों नेताओं- ट्रंप और पीएम मोदी- की रणनीति पर टिकी हैं.

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