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क्या स्कूल में ‘श्रमदान’ को कॉर्पोरल पनिशमेंट माना जाना चाहिए?

क्या स्कूल में ‘श्रमदान’ को कॉर्पोरल पनिशमेंट माना जाना चाहिए?

देवेन्द्र कुमार बुड़ाकोटी देवेंद्र कुमार बुड़ाकोटी देहरादून के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की एक वीडियो हाल ही में इंटरनेट पर...

उत्तराखंड में बोलियाँ, लोक संस्कृति और मौखिक परंपराएं

उत्तराखंड में बोलियाँ, लोक संस्कृति और मौखिक परंपराएं

देवेंद्र के. बुडाकोटी देवेंद्र के. बुडाकोटी बोलियाँ केवल भाषाई भिन्नताएँ नहीं होतीं—वे संस्कृतिक विरासत की संवाहक होती हैं, जो भौगोलिक,...

विज्ञापन क्षेत्र का ‘अ से ज्ञ’ सिखाती है विज्ञापन का जादू

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लोकेन्द्र सिंह लोकेन्द्र सिंह (समीक्षक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक हैं।) मीडिया शिक्षक डॉ. आशीष द्विवेदी अपनी...

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