गरीब घर की लड़की – (लघु कथा)

गरीब घर की लड़की – (लघु कथा) आज सुधा को अपनी सबसे छोटी बहू के साथ रहते दस वर्ष बीत गया पर इस छोटी बहुत उर्फ़ कविता ने कभी कोई…

पहले वाली गुंजाइश अब खत्म हो चुकी है !

*गुंजाइश* ऊपर टट्टर पर से तेज़ आवाजें आ रही थीं….कभी तेज़ कभी धीमी, कभी अचानक से टट्टर पर तेज़ कदम की उछाल की आवाज तो हम बच्चों को डरा जाती।…

लघुकथा……दिल का अमीर

लघुकथा —-दिल का अमीर —- चारबाग चौराहे पर वो लड़की हमारी टैक्सी में बैठी थी l उसके टैक्सी में बैठते ही टैक्सी एक अजीब सी सुगंध से सराबोर हो गयीं…

तुम्हारा आखिरी प्रेम-पत्र….(कविता)

तुम्हारा आखिरी प्रेम-पत्र (1) इस मौसम भी गुलमोहर जरूर खिला होगा मैं ही मुरझा रही हूँ तुम्हें देखना था जी भर आँचल में भर लेना था मन की तहों में…

शोर…शिनाख़्त.. मुख़ौटा…खेल (कविता)

शोर…शिनाख़्त.. मुख़ौटा…खेल ●●● “शोर बहुत था वहाँ पकड़ा गया है मुज़रिम कोई … शिनाख्ती के साथ … क्या… ? सचमुच मुज़रिम नहीं था वो मुख़ौटा था … मात्र मुख़ौटा शायद…

कविता फूटती है…

सीमा “मधुरिमा” लखनऊ कविता लिखी नहीं जाती बल्कि फूट जाती है अन्तस् में कहीं जब मिलता है अथाह प्रीत जब होती है आत्मा की जीत कविता फूट ही जाती है…

आज ख़ुद चाँद ने  मुबारक़ ईद , कहा है  किसी से…

उजली सी  इस मुबारक़ रात में  धानी से दुपट्टे में  खुशबुएँ साथ लिए  महकती साँसें से  सुर्ख़ लरज़ते पाँखुरी से  होठों से  आज ख़ुद चाँद ने  मुबारक़ ईद , कहा…

‘मुखर मौन’ गाँधी के तीन बंदर –(ब्यंग)

‘मुखर मौन’ गाँधी के तीन बंदर — -(व्यंग्य)- बहुत अरसे बाद गांधी जी के तीन बंदरों को सूझा कि आपस में एक मीटिंग किया जाए — फिर क्या था तीनों…

लॉक डाउन की भूख…और हमारा सिस्टम-(कविता)

घटना/प्रकरण : मध्य प्रदेश के सीधी में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के घर से एक चोर पाँच रोटी चोरी करके ले गया…यह घटना पुलिसकर्मियों की नहीं है, समाज और सरकार की…जांच का…

बहुत खुरदुरा हूँ…

प्रज्ञा शालिनी भोपाल मध्यप्रदेश बहुत खुरदुरा हूँ, औऱ रूखा भी कहा था उसने, कुछ उदासी भरे लहज़े से… तुम बहुत कोमल हो औऱ मुलायम भी… मुस्कराई थी वो शायद असहजता,…