इस देश में होने जा रहा 26 घंटे का दिन, जानें हैरान करने देने वाला प्लान

ओस्लो: आपको हर रोज कितने घंटे मिलते हैं? ये भी कोई पूछने वाली बात है। आखिर हम सभी को अपनी दिनचर्या सेट करने के लिए 24 घंटे ही मिलते हैं,…

भाषा के प्रति बाबा साहेब का राष्ट्रीय दृष्टिकोण

लोकेन्द्र सिंह बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के लिए भाषा का प्रश्न भी राष्ट्रीय महत्व का था। उनकी मातृभाषा मराठी थी। अपनी मातृभाषा पर उनका जितना अधिकार था, वैसा ही अधिकार अंग्रेजी…

जयंती विशेष: इसलिए याद किए जाने चाहिए अमर बहादुर सिंह ‘अमरेश’

गौरव अवस्थी लेखक पत्रकार अमर बहादुर सिंह ‘अमरेश’ रायबरेली के एक ऐसे साहित्यकार और पत्रकार थे जिनमें देश प्रेम कूट-कूट कर भरा था| 1 मार्च 1929 को ऊंचाहार तहसील के…

भारमुक्त और आभारयुक्त जीवन की ओर

गौरव अवस्थी वर्ष 1995 था| हम अमर उजाला कानपुर में हजार रुपए मानदेय वाले पत्रकार थे| लखनऊ से हिंदुस्तान के प्रकाशन की चर्चा तेजी पकड़ती जा रही थी| वेतन भोगी…

93वां बलिदान दिवस: शहीद आजाद कब कहां पैदा हुए? कंफर्म कीजिए सरकार!

गौरव अवस्थी भारत की आजादी के लिए सशस्त्र क्रांति के सूत्रधार अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद कब और कहां पैदा हुए? इन सवालों के जवाब से आजाद आज भी आजाद हैं|…

छत्रपति महाराज के व्यक्तित्व, स्वराज्य की संकल्पना व किलों की समझ विकसित करती है पुस्तक ‘हिन्दवी स्वराज्य दर्शन’

सौरभ तामेश्वरी पुस्तकों का लेखन जितना सरल हो, लोग उससे उतने ही अधिक जुड़ते हैं। पत्रकार, मीडिया शिक्षक एवं बेहतरीन लेखक लोकेंद्र सिंह की नई पुस्तक ‘हिंदवी स्वराज्य दर्शन’ पाठकों…

द्विवेदी जी की तरह निरालाजी ने भी ‘छद्म नामों’ से लिखी रचनाएं

गौरव अवस्थी जिस तरह आचार्य द्विवेदी ने सरस्वती को प्रतिष्ठा दिलाई, उसी तरह होश वाले जोश, जुनून और अपने असीमित ज्ञान की बदौलत निराला जी ने भी मतवाला को लोकपिय…

तमिल: लोक साहित्य का ‘आलोक’

 गौरव अवस्थी लोक साहित्य किसी भी भाषा, प्रांत या जाति का हो, उसमें माटी की सुगंध समाहित ही होती है। साहित्य को निखारने में लोकगीत, लोकभाषा, लोकोक्तियां, लोककथाएं और लोक…

सिंध के नागरिकों में राष्ट्रीयता की भावना जगाते रहे अमर शहीद हेमु कालाणी

प्रहलाद सबनानी सेवा निवृत्त उप महाप्रबंधक भारतीय स्टेट बैंक ऐसा कहा जाता है कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में गर्म दल के स्वतंत्रता सेनानियों का भी भरपूर योगदान रहा है।…

रामकृष्ण परमहंस की अद्वभुत ‘वानरोपासना’

गौरव अवस्थी स्वामी विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस के कुलदेवता श्रीरघुनाथ जी ही थे। उन्हें इस बात का अहसास था कि हनुमान जी की भक्ति के बिना रामचंद्रजी के दर्शन…