वैश्विक स्तर पर हिन्दी का विस्तार

लोकेन्द्र सिंह विश्व में करीब तीन हजार भाषाएं हैं। इनमें से हिन्दी ऐसी भाषा है, जिसे मातृभाषा के रूप में बोलने वाले दुनिया में दूसरे स्थान पर हैं। मातृभाषा की…

किले में किटी पार्टी

गौरव अवस्थी कानपुर: कानपुर से महज 20 किलोमीटर दूर स्थित बिठूर (पुराना नाम ब्रह्मावर्त) एक पौराणिक-धार्मिक स्थान के रूप में तो प्रसिद्ध है ही लेकिन इसकी ऐतिहासिकता भी कम चर्चित…

छत्रपति शिवाजी महाराज के किलों और उनसे जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों का रोचक वर्णन ‘हिन्दवी स्वराज्य दर्शन’

प्रो. (डॉ) संजय द्विवेदी लेखक लोकेन्द्र सिंह बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। कवि, कहानीकार, स्तम्भलेखक होने के साथ ही यात्रा लेखन में भी उनका दखल है। घुमक्कड़ी उनका स्वभाव है।…

आचार्य की पुण्यतिथि पर विशेष: गांव में सरपंच और बाहर आचार्य के रुप में प्रसिद्ध हुए महावीर प्रसाद द्विवेदी

दुर्गेश मिश्र रायबरेली। हिंदी को संजीवनी प्रदान करने वाले लेखक और विलक्षण व्यक्तित्व के रूप में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की पहचान है। आज हिंदी का जो स्वरुप सबके सामने…

कालपी कॉलिंग…

 गौरव अवस्थी वैसे तो उरई-कालपी से अपना नाता तीन दशक पुराना है। किताबी ज्ञान की परिधि लांघकर कालपी से सीधा परिचय उरई से लौटते समय इस बार ही हुआ। पौराणिक…

हनुमान जयंती : अतुलित बल धामं… हेम शैलाभदेहं…

गौरव अवस्थी कलियुग के जीवित देवता माने जाने वाले केसरी नंदन श्रीहनुमान जी के जन्म की पुराणों में की कथाएं विभिन्न प्रकार से पाई जाती हैं। ऐसी ही एक कथा…

पुण्यतिथि पर विशेष : प्रभात की पहली किरण से…प्रभाष जी

गौरव अवस्थी प्रभाष जोशी जी आज होते तो 85 वें वर्ष में प्रवेश कर रहे होते। 11 बरस हो गए आज ही के दिन काल के क्रूर हाथों में विरल-सरल…

एनटीएससी सम्मेलन कक्ष में हुआ निबंध, स्लोगन, पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन

राजपुरा: एनटीएससी राजपुरा थीम “भ्रष्टाचार को ना कहें: राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्ध रहें” के साथ 30 अक्टूबर से 5 नवंबर तक सतर्कता जागरूकता सप्ताह मना रहा है। एन.टी.एस.सी राजपुरा ने…

दिल की बात कहने में सफल रही ‘सुन रही हो न तुम…’

लोकेन्द्र सिंह  कविता के संबंध में कहा जाता है कि यह कवि के हृदय से सहज ही बहकर निकलती है और जहाँ इसे पहुँचना चाहिए, वहाँ का रास्ता भी खुद…

तकनीक ने विश्व फलक पर बढ़ाई हिंदी की ताकत

लखनऊ। तकनीक और सोशल मीडिया हिंदी को विश्व फलक पर विस्तार दे रहा है। हिंदी प्रचलन की भाषा है। दूसरी भाषाओं के शब्दों को हिंदी आसानी से स्वीकार कर लेती…